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इस बजट में दक्षिण और पूर्वोत्तर को मिली नई दिशा
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
- फोटो : PTI
निर्मला सीतारमण का बजट 2019 के लोकसभा चुनाव के भाजपा के घोषणापत्र से प्रेरित है। उन्होंने नरेंद्र मोदी के चुनावी वादे के कई प्रमुख बिंदुओं को इसमें शामिल किया है। सबसे बड़ी बात यह है कि तमिल होने के नाते निर्मला सीतारमण ने तमिलनाडु में राजमार्ग के विकास के लिए एक लाख करोड़ रुपये के आवंटन की घोषणा की। अगले कुछ महीनों में तमिलनाडु में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं। यह बजट मतदाताओं के लिए एक प्रोत्साहन है। यह एक चुनावी बजट है। इस केंद्रीय बजट में प्रधानमंत्री मोदी की भी छाप है, जिसमें कम से कम 18 बार आत्मनिर्भर भारत शब्द को दोहराया गया, जो इसकी राजनीति को प्रकट करता है। हाई-वे के नारे के प्रोत्साहन के साथ मोदी निश्चित रूप से तमिलनाडु में अपनी चुनावी रैलियों में वोट खींचने की कोशिश करेंगे।
तो क्या वर्ष 2021 का केंद्रीय बजट इस वर्ष पांच राज्यों में होने वाले चुनावों से प्रेरित है? इसका उत्तर हां भी हो सकता है और नहीं भी। कारण, भारतीय चुनाव प्रणाली का यह अभिशाप है कि हर वर्ष कहीं न कहीं चुनाव होते हैं। यह भी एक कारण है कि प्रधानमंत्री मोदी एक राष्ट्र-एक चुनाव को आगे बढ़ाने के इच्छुक हैं। अगर ऐसा होता, तो बजट बनाना आसान होता। अलग-अलग क्षेत्रों में आवंटन को जोड़कर देखा जाए तो कई क्षेत्रों में 45 प्रतिशत तक का लाभ दक्षिणी राज्यों को मिलेगा। विपक्ष इसलिए नाराज है कि यह निराशाजनक बजट नहीं है। और विपक्ष बजट में किए गए विकासात्मक आवंटन की आलोचना भी नहीं कर सकता, खासकर दक्षिणी राज्यों के लिए। एक ही झटके में मोदी सरकार ने यह भावना खत्म कर दी कि
भाजपा उत्तर भारतीयों की पार्टी है।
वित्तमंत्री ने कहा कि केंद्र मार्च 2022 तक 8,500 किलोमीटर की राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं को मंजूरी देगा और राष्ट्रीय राजमार्ग गलियारे के अतिरिक्त 11,000 किलोमीटर हाई-वे पूरा किया जाएगा। इसके लिए उन्होंने तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल और असम में परियोजनाओं की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह केंद्र प्रायोजित भारतमाला परियोजना के तहत प्रदान की गई 13,000 किलोमीटर से अधिक सड़क कार्य के अलावा होगा, जिसमें से 3,800 किलोमीटर का निर्माण पहले ही किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने के लिए और अधिक आर्थिक गलियारों की योजना बनाई जा रही है। तमिलनाडु में, मदुरई-कोल्लम आर्थिक गलियारे के निर्माण सहित 1.03 लाख करोड़ रुपये के निवेश पर 3,500 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग कार्यों का प्रस्ताव किया गया है। केरल में 65,000 करोड़ रुपये के निवेश पर 1,100 किलोमीटर के राष्ट्रीय राजमार्ग प्रस्तावित किए गए हैं। इसमें मुंबई-कन्याकुमारी कॉरिडोर का 600 किलोमीटर का खंड शामिल है।
पश्चिम बंगाल में, 675 किलोमीटर राजमार्ग कार्यों के लिए 25,000 करोड़ रुपये अलग रखे गए हैं। वित्तमंत्री ने घोषणा की कि असम में आगामी तीन वर्षों में 1,300 किलोमीटर का राष्ट्रीय राजमार्ग बनाया जाएगा। अटल बिहारी वाजपेयी के शासन में भी राजमार्गों को प्राथमिकता दी गई थी। और नरेंद्र मोदी अटल जी के सपने को मजबूती प्रदान कर रहे हैं।
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तो क्या वर्ष 2021 का केंद्रीय बजट इस वर्ष पांच राज्यों में होने वाले चुनावों से प्रेरित है? इसका उत्तर हां भी हो सकता है और नहीं भी। कारण, भारतीय चुनाव प्रणाली का यह अभिशाप है कि हर वर्ष कहीं न कहीं चुनाव होते हैं। यह भी एक कारण है कि प्रधानमंत्री मोदी एक राष्ट्र-एक चुनाव को आगे बढ़ाने के इच्छुक हैं। अगर ऐसा होता, तो बजट बनाना आसान होता। अलग-अलग क्षेत्रों में आवंटन को जोड़कर देखा जाए तो कई क्षेत्रों में 45 प्रतिशत तक का लाभ दक्षिणी राज्यों को मिलेगा। विपक्ष इसलिए नाराज है कि यह निराशाजनक बजट नहीं है। और विपक्ष बजट में किए गए विकासात्मक आवंटन की आलोचना भी नहीं कर सकता, खासकर दक्षिणी राज्यों के लिए। एक ही झटके में मोदी सरकार ने यह भावना खत्म कर दी कि
भाजपा उत्तर भारतीयों की पार्टी है।
वित्तमंत्री ने कहा कि केंद्र मार्च 2022 तक 8,500 किलोमीटर की राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं को मंजूरी देगा और राष्ट्रीय राजमार्ग गलियारे के अतिरिक्त 11,000 किलोमीटर हाई-वे पूरा किया जाएगा। इसके लिए उन्होंने तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल और असम में परियोजनाओं की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह केंद्र प्रायोजित भारतमाला परियोजना के तहत प्रदान की गई 13,000 किलोमीटर से अधिक सड़क कार्य के अलावा होगा, जिसमें से 3,800 किलोमीटर का निर्माण पहले ही किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने के लिए और अधिक आर्थिक गलियारों की योजना बनाई जा रही है। तमिलनाडु में, मदुरई-कोल्लम आर्थिक गलियारे के निर्माण सहित 1.03 लाख करोड़ रुपये के निवेश पर 3,500 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग कार्यों का प्रस्ताव किया गया है। केरल में 65,000 करोड़ रुपये के निवेश पर 1,100 किलोमीटर के राष्ट्रीय राजमार्ग प्रस्तावित किए गए हैं। इसमें मुंबई-कन्याकुमारी कॉरिडोर का 600 किलोमीटर का खंड शामिल है।
पश्चिम बंगाल में, 675 किलोमीटर राजमार्ग कार्यों के लिए 25,000 करोड़ रुपये अलग रखे गए हैं। वित्तमंत्री ने घोषणा की कि असम में आगामी तीन वर्षों में 1,300 किलोमीटर का राष्ट्रीय राजमार्ग बनाया जाएगा। अटल बिहारी वाजपेयी के शासन में भी राजमार्गों को प्राथमिकता दी गई थी। और नरेंद्र मोदी अटल जी के सपने को मजबूती प्रदान कर रहे हैं।