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समाजवादी भैंसें
हेमंत शर्मा
Updated Tue, 11 Feb 2014 06:52 PM IST
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अगर कोई पूछे अक्ल बड़ी या भैंस? तो समझदार लोग एक जमाने से अक्ल को ही बड़ी बताते आए हैं। लेकिन इधर मामला कुछ बदला है। अब सामने वाला पूछता है, पहले बताइए वह भैंस किसकी है? अगर वह आजम साहब की भैंस है, तो अक्ल से बड़ी होगी। शायद इसलिए आजम साहब को खुद अपनी भैंसों से रश्क होने लगा है। वह कह रहे हैं, ऐसी शोहरत मल्लिका विक्टोरिया को भी न मिली होगी।
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लालू यादव भैंस का चारा खा गए थे। अब आजम खां की भैंस भाग गईं। जो पुलिस राज्य में दंगे नहीं रोक पाती। चोर नहीं पकड़ सकती। आदमखोर बाघिन को महीने भर से नहीं पकड़ सकी। वह इन सात भैंसों को चौबीस घंटे में पकड़ने में कामयाब रही। हां, भैंसों की भाषा समझ पाने में नाकाम तीन पुलिस वालों पर कार्रवाई जरूर हो गई।
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प्रेम का दुश्मन समाज भैंसों को भी नहीं बख्शता। भैंसों के प्रति इंसानी रंगभेदी सोच इन पर जुल्म करती रही है। मुझे तो भैंसें हमेशा बुद्धत्व की प्रतिमूर्ति दिखीं। न जाने क्यों उसकी सहिष्णुता को लोग उसकी मूर्खता मानते हैं। सोचिए! शहर में अगर भैंसें न हों, तो दबंग लोग अपनी लाठी का इस्तेमाल किस पर करेंगे?
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आजम खां कहते हैं यह मेरे खिलाफ साजिश है, मेरी भैंसें चोरी हुई और लोग मजे ले रहे हैं। अगर राज्य में चार हजार सपा कार्यकर्ताओं को गनर और सुरक्षा मिल सकती है, तो भैंसों को क्यों नहीं सुरक्षा दी जा सकती? वे तो आजम साहब की भैंसे थीं। जिनके खिलाफ अमर सिंह से लेकर जया प्रदा तक साजिश में लगे रहते हैं।
मुहावरों की दुनिया में भी भैंसों के साथ बहुत ज्यादती हुई है। अक्ल बड़ी या भैंस, काला अक्षर भैंस बराबर, जिसकी लाठी उसकी भैंस, भैंस के आगे बीन बजाना जैसे सारे मुहावरे भैंस को अपमानित करते हैं। ऐसा लगता है कि भैंसें किसी संगीत घराने से आती हैं कि उन्हें बीन की धुन समझना जरूरी है।
भारत में भैंसों का पांच हजार साल पुराना इतिहास है। कौटिल्य के यहां भैंस पालने वालों को ‘पिण्डारक’ कहा जाता था। मार्कंडेय पुराण में भैंसों जैसा दिखने वाला भैंसासुर था। जिसे दुर्गा ने मारा था। मृत्यु का देवता यमराज भैंसे पर ही बैठ कर आता है। ऋग्वेद में भी भैंस के पाले जाने का उल्लेख है।
अल्लाह का शुक्र है कि आजम साहब की भैंसें बरामद हो गईं। चौबीस घंटे के भीतर भैंसों की बरामदगी ने साबित कर दिया कि उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था दुरुस्त है।