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छोटे कारोबार को नई राहत की दरकार

Tue, 15 Oct 2019 07:45 AM IST
जयंतीलाल भंडारी जयंतीलाल भंडारी
जयंतीलाल भंडारी Published by: जयंतीलाल भंडारी Updated Tue, 15 Oct 2019 07:45 AM IST
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Small businesses need new relief
जयंतीलाल भंडारी - फोटो : a

इस समय आर्थिक सुस्ती से मुश्किलों का सामना कर रहे सूक्ष्म, लघु और मझोले (एमएसएमई) कारोबारियों द्वारा सरकार से बड़ी रियायत देने की अपेक्षा की जा रही है। इन रियायतों के तहत एमएसएमई सेक्टर की परिभाषा बदलने और छोटे उद्योगों को विभिन्न श्रेणियों में बांटकर तत्काल राहत मुहैया कराए जाने की अपेक्षा की जा रही है। अभी देश में विनिर्माण और सेवा क्षेत्र दो ही श्रेणियां हैं। इससे बदहाल उद्योगों की पहचान करना मुश्किल हो जाता है। छोटे उद्यमी व कारोबारी चाहते हैं कि इन्हें कई श्रेणियों में बांटा जाए, ताकि इनकी दिक्कतें समय से पहचानी जा सकें। विभिन्न सेक्टर के हिसाब से श्रेणी बनाकर टर्नओवर की सीमा तय की जाए, ताकि कारोबारियों को जीएसटी रिफंड के साथ दूसरी रियायतें तेजी से मिल सकें। छोटे उद्यमी, कारोबारी यह भी चाहते हैं कि उन्हें जीएसटी संबंधी मुश्किलों से राहत मिले, साथ ही तकनीकी विकास और नवाचार का भी लाभ मिले। यदि छोटे उद्योगों के ऐसे अवरोध खत्म होंगे, तो उनकी आर्थिक सूझबूझ बढ़ेगी, उनके क्रेडिट प्रवाह में सुधार होगा।


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छोटी और मझोली औद्योगिक-कारोबारी इकाइयां देश की अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा है। देश में कृषि के बाद सबसे अधिक रोजगार एमएसएमई क्षेत्र द्वारा ही दिया जा रहा है। देश की जीडीपी में छोटे और मझोले वर्ग के कारोबार का हिस्सा 29 फीसदी है। देश में एमएसएमई के तहत कोई 6.5 करोड़ उद्यम आते हैं, जो 15 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मुहैया करा रहे हैं। छोटे और मध्यम उद्योग-कारोबार का देश के औद्योगिक उत्पादन में करीब 45 फीसदी एवं निर्यात में करीब 40 फीसदी योगदान है। अगले पांच वर्षों में सरकार उन्हें रियायतें देकर उनकी भागीदारी 50 फीसदी तक पहुंचाने के लक्ष्य पर काम कर रही है। लेकिन इस समय वैश्विक सुस्ती के कारण छोटे उद्योगों की अधिकांश इकाइयां महंगे कर्ज, बिजली समस्या, मांग में कमी, खरीदारों से भुगतान रुकने, टैक्सेशन, बैंकिंग, वित्तीय और विपणन संबंधी परेशानियों का सामना कर रही हैं। बड़े उद्योग और बड़ी पूंजी के उद्यमी छोटे उद्यमियों को मैदान से बाहर करते हुए दिखाई दे रहे हैं।

इसलिए आर्थिक सुस्ती के मौजूदा दौर में सरकार को छोटी-मझोली इकाइयों की कारोबारी सुगमता के लिए देश की वित्तीय और औद्योगिक संस्थाओं को मजबूती देनी चाहिए। इसके लिए उद्योग-व्यापार में नवाचार को प्रोत्साहन देना होगा। अर्थव्यवस्था में नौकरशाही का हस्तक्षेप कम करना होगा। साथ ही कारोबार से संबंधित अहम क्षेत्रों में अच्छा प्रदर्शन करना होगा। सुधारों के क्रियान्वयन को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए तेजी से कदम उठाने होंगे। जरूरी है कि व्यापार सुगमता का लाभ छोटे उद्योग-कारोबारियों को भी मिले। अभी यह बड़े शहरों और बड़े उद्योग-कारोबार तक सीमित दिखाई दे रहा है। नवाचार और प्रतिस्पर्धा का लाभ छोटे उद्योग-कारोबार को भी मिलने चाहिए।

निश्चित रूप से देश में रिसर्च ऐंड डेवलपमेंट पर खर्च बढ़ाना होगा और इसका लाभ छोटे उद्योग-कारोबार को भी देना होगा। रिजर्व बैंक द्वारा छोटे उद्योग-कारोबार को ज्यादा और सस्ता कर्ज दिए जाने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए। ऐसा करने पर ही सूक्ष्म, छोटी और मझोली इकाइयां आर्थिक सुस्ती के दौर से बाहर आ सकेंगी। उम्मीद करें कि अर्थव्यवस्था का यह अहम क्षेत्र आय वृद्धि, रोजगार वृद्धि और अर्थव्यवस्था की चमकीली संभावनाओं को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेगा।

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