चुनावी शोर में दबी चुप्पियां: कितनी चीखें, पिछले दो महीने से चल रहे शोर में अनसुनी रह गईं
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इस चुनाव में बहुत शोर मच रहा है। इस बहुत ही लंबे चुनाव अभियान में बहुत शोर मच रहा है। इस शोर में बहुत कुछ सुनाई नहीं पड़ रहा है। जैसे, झारखंड में भूखे बच्चे मिट्टी खाकर मर गए। उनके मां-बाप का विलाप कहीं सुनाई नहीं पड़ा। इसी शोर में एक बच्ची को कुत्तों ने काट-काटकर मार डाला, लेकिन उसकी चीख भी कोई सुन ही नहीं पाया। ऐसे ही पता नहीं, कितनी चीखें, कितना विलाप चुनाव के इस शोर में, पिछले दो महीने से चल रहे शोर में अनसुना रह गया।
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इस चुनाव में बहुत शोर मच रहा है। इस बहुत ही लंबे चुनाव अभियान में बहुत शोर मच रहा है। इस शोर में बहुत कुछ सुनाई नहीं पड़ रहा है। जैसे, झारखंड में भूखे बच्चे मिट्टी खाकर मर गए। उनके मां-बाप का विलाप कहीं सुनाई नहीं पड़ा। इसी शोर में एक बच्ची को कुत्तों ने काट-काटकर मार डाला, लेकिन उसकी चीख भी कोई सुन ही नहीं पाया। ऐसे ही पता नहीं, कितनी चीखें, कितना विलाप चुनाव के इस शोर में, पिछले दो महीने से चल रहे शोर में अनसुना रह गया।
लेकिन अस्पताल के बिस्तर पर पड़ी हुई एक महिला की बहुत ही दबी आवाज में कही गई एक बात सिर्फ सुनाई ही नहीं दे रही है, बल्कि लगातार सुनाई देती चली जा रही है। वह महिला बहुत बुरी तरह से जली हुई है। उसने खुद ही अपने शरीर में आग लगाई। वह भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के एक थाने के सामने। उस महिला की कहानी बड़ी दर्दनाक है। उसको उसके घरवालों ने एक आदमी के हाथ बेच दिया था।
उस आदमी ने उसे कुछ लोगों के घरों में काम करने के लिए भेजा। उन सबने उसकी मजबूरी का फायदा उठाकर उसके साथ बलात्कार किया। लगातार किया और सबने मिलकर भी किया। वह महिला कई बार उन लोगों के खिलाफ शिकायतें लिखवाने के लिए थाने में भी गई, लेकिन उसकी बात किसी ने नहीं सुनी। आखिर में मुक्ति पाने के लिए उसने थाने के सामने ही अपने ऊपर तेल डालकर आग लगा ली।
ठीक इसी चुनावी दौर में राजस्थान के अलवर में एक दलित महिला के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया। वह घटना भी उतनी ही दर्दनाक है और प्रशासन-व्यवस्था की कमी को उजागर करती है। वह महिला अपने पति या साथी के साथ स्कूटर पर बैठकर कहीं जा रही थी कि रास्ते में खड़े छह लोगों ने स्कूटर रुकवाया और दोनों को पीटा। उसके बाद उन लोगों ने उस महिला के साथ तीन घंटे तक बलात्कार किया और उसका वीडियो भी बनाया। उस घटना के दो दिन बाद पीड़ित युवक थाने में रपट लिखाने के लिए गया। लेकिन चुनाव की व्यस्तता की बात कहकर उसकी रपट पांच दिनों के बाद लिखी गई। और एक सप्ताह के बाद आरोपियों की गिरफ्तारियां हुईं।
पीड़ित पक्ष की आवाज तो दबी ही रही, लेकिन मामला चुनावी मुद्दा बन गया। बसपा अध्यक्ष मायावती ने इस हादसे का जिक्र किया, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने चुनावी भाषणों में इस मामले को बड़े ही मार्मिक तरीके से पेश किया और मायावती से राजस्थान की कांग्रेस सरकार को समर्थन न देने की सलाह दी। चुनाव भी कैसे बंद जुबान खोल देता है।
जम्मू के कठुआ में हुए हादसे पर चुप्पी। दिल्ली में हर चार घंटे में हो रहे एक बलात्कार पर चुप्पी। हापुड़ की उस जली हुई महिला पर चुप्पी। इतनी सारी चुप्पियां अलवर की वीभत्स घटना से क्यों टुटी, यह फैसला कब और कौन करेगा? अभी तो केवल दिल्ली के अस्पताल में पड़ी जली हुई महिला की बात कानों में गूंज रही है-अच्छा हुआ, मैं जल गई। अब कोई मेरे साथ बलात्कार तो नहीं करेगा।
-लेखिका माकपा पोलित ब्यूरो की सदस्य हैं।