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खत्म होते प्रबंधन संस्थान

Tue, 24 Feb 2015 07:56 PM IST
मुकुल श्रीवास्तव
मुकुल श्रीवास्तव Updated Tue, 24 Feb 2015 07:56 PM IST
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Shutting down of B-school

भारत की अर्थव्यवस्था में तेजी आने के साथ ही जगह-जगह कुकुरमुत्तों की तरह प्रबंधन संस्थान उग आए थे। मगर हाल के दिनों में अर्थव्यवस्था के पटरी से उतरने के साथ ही प्रबंधन गुरु पैदा करने का दावा करने वाले इन संस्थानों की दुकानों पर भी ताले लगने शुरू हो गए हैं। ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्नीकल एजुकेशन (एआईसीटीई) यानी अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2012 से अब तक लगभग तीन सौ प्रबंधन संस्थानों की दुकानों पर ताला लग चुका है। इतनी तेजी से बंद होते इन संस्थानों के हालात इशारा कर रहे हैं कि विगत कुछ वर्षों में भारतीय मध्य वर्ग पर चढ़ा प्रबंधन शिक्षा का खुमार अब उतरने लगा है। आंकड़े बता रहे हैं कि आज की तारीख में देश में प्रबंधन की डिग्री अथवा डिप्लोमा देने वाले 3,217 संस्थान हैं, जबकि वर्ष 2011-12 के दौरान यह आंकड़ा 3,541 था। झारखंड, बिहार और केरल को छोड़कर देश के सभी राज्यों में प्रबंधन संस्थानों की संख्या में गिरावट आई है।

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परिषद के अनुसार, वर्ष 2007 से 2012 के दौरान हमारे देश में लगभग नौ सौ से भी अधिक प्रबंधन संस्थान खुले। यह वह दौर था, जब हमारी अर्थव्यवस्था की विकास दर सात प्रतिशत के करीब थी। पर जैसे ही पिछले कुछ वर्षों में अर्थव्यवस्था में मंदी आने लगी, तो उसका असर इन प्रबंधन संस्थानों पर भी पड़ा। कॉरपोरेट जगत को भी यह बात समझ में आ गई कि गली-गली खुले इन प्रबंधन संस्थानों में से निकलने वाले विद्यार्थी उनके किसी काम के नहीं हैं। इसलिए उन्होने कुछ चुनिंदा प्रबंधन संस्थानों से पढ़े विद्यार्थियों को ही लेने का निर्णय किया।
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वर्ष 2014 में भारत में प्रबंधन की शिक्षा पर आई एक रिपोर्ट में प्रबंधन संस्थानों की शिक्षा के गिरते स्तर को लेकर चिंता जाहिर की गई थी। उस रिपोर्ट में बताया गया था कि चूंकि अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद अनुमोदन के लिए ही अधिकृत है और इन संस्थानों में पढ़ाए जाने वाले पाठ्यक्रम या पढ़ाने के तरीकों पर हस्तक्षेप करने का अधिकार उसे प्राप्त नहीं है, इसलिए भी इन संस्थानों में शिक्षा का स्तर उच्च नहीं है।
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एक अमेरिकी गैर सरकारी संस्था एसोसिएशन टू एडवांस कॉलीजिएट स्कूल ऑफ बिजनेस के अनुसार, भारत में प्रबंधन की डिग्री प्रदान करने वाले संस्थानों की संख्या लगभग चार हजार है, जो अमेरिका से करीब दोगुनी है। मगर यहां मौजूद प्रबंधन संस्थानों की हालत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2015 में फाइनेंशियल टाइम्स द्वारा जारी एक वैश्विक रैंकिंग में सिर्फ तीन भारतीय संस्थान को ही जगह मिली। इनमें से दो सरकारी और एक गैर-सरकारी है। इनमें से कोई भी पहले दस में भी स्थान बनाने में सफल नहीं हुआ।


बहरहाल यदि इन शिक्षण संस्थानों की यही स्थिति रही, तो आने वाले कुछ वर्षों में इनके लिए छात्र ढूंढ पाना मुश्किल हो जाएगा, क्योंकि अधिकतर छात्र या तो उन पेशेवर पाठ्यक्रमों का रुख करेंगे, जो उन्हें नौकरी दिला सके अथवा वे सिर्फ सर्वश्रेष्ठ प्रबंधन संस्थानों में ही दाखिला पाने की कोशिश करेंगे। लिहाजा यदि इन प्रबंधन संस्थानों ने अपने को बेहतर नहीं बनाया, तो आने वाले कुछ वर्षों में प्रबंधन की डिग्रियां बांटने वाले इन संस्थानों की हालत और भी बदतर हो जाएगी।

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