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शिन्जो अबे: आक्रामकता में छिपी लोकप्रियता

हेमेन्द्र मिश्र Updated Fri, 28 Dec 2012 09:53 PM IST
shinzo abe popularity lies in aggression
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जापान में करीब छह साल पहले जब शिन्जो अबे ने प्रधानमंत्री की कुर्सी छोड़ी थी, तो शायद ही उन्होंने सोचा होगा कि मंझधार में फंसे देश की सियासत संभालने के लिए लोग उन पर फिर से भरोसा करेंगे। पड़ोसी देशों, विशेषकर एशियाई मुल्कों में 'टोक्यो के आक्रामक नेता' के रूप में चर्चित अबे में आखिर ऐसा क्या है कि उनके सत्ता छोड़ने के बाद इस पूर्वी एशियाई देश में प्रधानमंत्री बदलने का सालाना चलन-सा निकल पड़ा? जवाब अबे की शख्सियत और उनकी आक्रामक नीतियों में छिपा है। हाल के वर्षों में जिस तरह जापान के सत्ता-प्रतिष्ठानों में गड़बड़ियां सामने आई हैं, उसमें लोग ऐसे नेता को राष्ट्र का मुखिया चुनना चाहते थे, जो जापान के डूबते 'सूरज' को थाम सके।
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द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद देश के सबसे युवा प्रधानमंत्री के रूप में गिने जाने वाले शिन्जो को राजनीतिक शिक्षा अपने परिवार से मिली। जो आक्रामकता आज उनकी पहचान है, उसका बीजारोपण भी तभी हुआ, जब वह आम बच्चों की तरह स्कूल और कॉलेजों में शिक्षा ले रहे थे। अपनी किताब उत्सुकूशी कुनीए (एक बेहतर देश की ओर) में शिन्जो लिखते हैं, मुझे उन लोगों से हमेशा नाराजगी रही, जो क्लास-ए युद्ध अपराधी (द्वितीय विश्वयुद्ध समाप्त होने के बाद मित्र राष्ट्रों द्वारा घोषित किए गए अपराधी) के नाती के रूप में मेरा 'मजाक' उड़ाते थे। उनके नाना नोबुसुके किशी विश्वयुद्ध से पहले जापान के उद्योग मंत्री थे और दक्षिणपंथी विचारों से प्रभावित थे। नाना को लेकर की जाने वाली टीका-टिप्पणी से ही उनका रुझान रूढ़िवादी विचारों की तरफ हुआ।

पुराने विचारों के समर्थक शिन्जो आधुनिकता को भी आसानी से अपनाने वाले व्यक्ति हैं। पहले कार्यकाल में जिस तरह उन्होंने मित्र राष्ट्रों द्वारा थोपे गए संविधान को शांतिपूर्ण तरीके से बदला, वह उनकी इसी सोच को दिखाता है। उनके व्यक्तित्व का एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि जिस सामाजिक सुरक्षा को विशेष तवज्जो देने के कारण 'बुजुर्ग होता जापान' उन्हें उम्मीद की नजर से देखता है, वह यह जानता है कि अबे का आर्थिक ज्ञान उनके राजनीतिक ज्ञान की तरह मजबूत नहीं है। इसे अबे खुद भी कई बार कुबूल कर चुके हैं। लेकिन इसे झुठलाना भी मुश्किल है कि अगर राजनीतिक रूप से आप सशक्त हों, तो आर्थिक जिम्मेदारियों का निर्वहन आसानी से किया जा सकता है। और इस कसौटी पर अबे शत-प्रतिशत खरे उतरते हैं।

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