बेकसूर नहीं हैं शरीफ

मरिआना बाबर Updated Sun, 23 Apr 2017 03:08 PM IST
Sharif is not innocent
मरिआना बाबर
पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट में बृहस्पतिवार को पनामा पेपर लीक मामले की अहम सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों ने साबित कर दिया कि प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को अयोग्य घोषित करने के मामले में वे बंटे हुए हैं, नतीजतन उन्होंने इस बहुचर्चित मामले में खंडित फैसला सुनाया। विगत जनवरी में ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल द्वारा जारी भ्रष्टाचार सूचकांक में  पाकिस्तान176 देशों की सूची में 116वें स्थान पर था।

नवाज शरीफ और उनके करीबी सहयोगी लाइव दिखाए जाने वाले फैसले को जानने के लिए प्रधानमंत्री भवन में टीवी सेटों से चिपके हुए थे। शरीफ सौभाग्यशाली हैं कि 540 पृष्ठों के फैसले में तीन जजों ने एक संयुक्त जांच दल (जेआईटी) के गठन की सिफारिश की हैं, जिसमें इंटर सर्विस इंटेलीजेंस (आईएसआई), सैन्य खुफिया एजेंसी (एमआई), फेडरल इंटेलीजेंस एजेंसी (एफआईए) के साथ अन्य खुफिया एजेंसियां भी होंगी। यह दल इस बात की जांच करेगा कि नवाज शरीफ के पैसे पाकिस्तान से कतर कैसे पहुंच गए। पांच जजों की खंडपीठ के दो अन्य जजों ने अपनी असहमत टिप्पणी में कहा है कि नवाज शरीफ को मुल्क के प्रधानमंत्री के रूप में अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए। अगर सुप्रीम कोर्ट का फैसला शरीफ के खिलाफ जाता, तो वह निर्धारित समय से एक साल पहले ताजा चुनाव कराने के लिए तैयार थे और यह कोई रहस्य नहीं है कि उनकी पाकिस्तान मुस्लिम लीग फिर से विजयी होती।

नवाज शरीफ और उनके दो बेटे हसन और हुसैन शरीफ को अब इस जेआईटी के समक्ष पेश होना पड़ेगा और जेआईटी का नेतृत्व करने वाले एफआईए के महानिदेशक स्तर के अफसर के साथ-साथ सरकार के कनिष्ठ अधिकारियों के सवालों का जवाब देना होगा। जेआईटी को जांच पूरी करने के लिए दो महीने का समय दिया गया है और प्रधानमंत्री तथा उनके दोनों बेटों को जेआईटी के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है। जांचकर्ताओं को भी हर पखवाड़े सुप्रीम कोर्ट की विशेष पीठ में जांच रिपोर्ट सौंपनी होगी।

प्रधानमंत्री नवाज शरीफ, मरियम नवाज, हसन नवाज, हुसैन नवाज, सेवानिवृत्त कैप्टन मोहम्मद सफदर (प्रधानमंत्री के दामाद) और वित्त मंत्री इशहाक डार इस मामले में प्रतिवादी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने नवाज शरीफ को न तो अयोग्य ठहराया है और न ही उन्हें सभी आरोपों से मुक्त किया है। लेकिन यह देखना दिलचस्प है कि कैसे मरियम नवाज (जिन्हें प्रधानमंत्री पार्टी के नए नेता के रूप में तैयार कर रहे हैं) को सुप्रीम कोर्ट ने बख्श दिया है, जबकि उनके दोनों भाइयों को जेआईटी का सामना करना पड़ेगा।

टीवी फुटेज में नवाज शरीफ को अपने छोटे भाई शहबाज शरीफ और मरियम नवाज के साथ राहत भरे अंदाज में देखा गया, हालांकि वे इसको लेकर सुनिश्चित नहीं थे कि फैसला प्रधानमंत्री के खिलाफ था या नहीं। प्रधानमंत्री की बेटी मरियम नवाज ने एक तस्वीर ट्वीट की, जिसमें नवाज शरीफ, उनका परिवार और पार्टी के नेता फैसले पर जश्न मना रहे थे। यह मुल्क के इतिहास में पहली बार होगा, जब कोई पदासीन प्रधानमंत्री जांच एजेंसी के सवालों के जवाब देगा।

प्रतिष्ठित पत्रकार और डॉन टीवी के एंकर नुसरत जावेद ने एक महीने पहले ही खंडित फैसले के बारे में भविष्यवाणी की थी। उन्होंने अमर उजाला को बताया कि ताजा खंडित फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने सेना के नेतृत्व वाली जांच टीम से मदद मांगी है कि वह तय करे कि प्रधानमंत्री और उनके बेटे भ्रष्ट हैं या नहीं।

सवाल उठता है कि सुप्रीम कोर्ट को इस तरह का फैसला करने में इतने हफ्ते क्यों लग गए। फैसल ने उस विपक्ष को बहुत निराश किया है, जो इतिहास रचे जाने की आस लगाए बैठे थे और उम्मीद कर रहे थे कि मुल्क में कथित भ्रष्टाचार को रोक दिया जाएगा और शरीफ परिवार की कारगुजारियों को उजागर किया जाएगा।

दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद पीठ ने 23 फरवरी को अवलोकन के लिए अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, ताकि उनका फैसला सदियों तक प्रासंगिक और वैध रहेगा। इस फैसले ने यह रेखांकित किया कि एफआईए और राष्ट्रीय जवाबदेह ब्यूरो सफेदपोश अपराध को उजागर करने की अपनी भूमिका में विफल रहे हैं।

पनामा की लॉ कंपनी मोसेक फोन्सेका द्वारा उजागर पनामा पेपर में कहा गया है कि प्रधानमंत्री के बच्चों-मरियम, हसन, हुसैन नवाज कई विदेशी कंपनियों के मालिक थे या विदेशी कंपनियों में उनके पास लेनदेन का अधिकार था। कम से कम आठ विदेशी कंपनियों से शरीफ परिवार का जुड़ाव उन दस्तावेजों में पाया गया।

फैसले में कहा गया है कि यह जांच किए जाने की जरूरत है कि धन कतर हस्तांतरित कैसे किया गया। दो जजों जस्टिस खोसा और जस्टिस गुलजार ने प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को अयोग्य घोषित करने की बात की, जबकि तीन जजों ने जेआईटी के गठन की सिफारिश की।

किसी अप्रत्याशित फैसले की उम्मीद में रेड जोन में स्थित पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के बाहर करीब 1,500 पुलिस कमांडो और दंगा निरोधक बल तैनात किए गए थे।

पिछले शासन में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के प्रधानमंत्री युसूफ रजा गिलानी इतने सौभाग्यशाली नहीं थे, जब 2012 में वह तत्कालीन राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच से इन्कार करने के कारण अवमानना के दोषी सिद्ध हुए, जिसके चलते उन्हें अयोग्य ठहराया गया था।

हेराल्ड के संपादक बदर आलम कहते हैं, बेशक कोर्ट ने आज उन्हें दोषी न ठहराया हो, लेकिन इस मामले से उन्हें परेशानी होगी और वह कमजोर होंगे। सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि एक भी न्यायाधीश ने उन्हें बेकसूर नहीं माना है। यदि दो न्यायाधीशों ने उन्हें दोषी पाया, तो बाकी तीन न्यायाधीश शरीफ के राजनीतिक भविष्य पर अंतिम फैसला लेने के लिए जेआईटी की जांच का इंतजार कर रहे हैं।

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