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चुनावी मौसम में राजनेताओं की सुरक्षा

Sun, 24 Mar 2019 07:01 PM IST
Raman Singh आर राजगोपालन
आर राजगोपालन Published by: Raman Singh Updated Sun, 24 Mar 2019 07:01 PM IST
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Security of politicians in election season
एसपीजी

जैसे ही लोकसभा चुनाव की घोषणा हुई, प्रधानमंत्री की सुरक्षा बढ़ा दी गई। विशेष सुरक्षा दल (एसपीजी) ने पुलिस महानिदेशक को एक गोपनीय पत्र के जरिये क्या करें और क्या नहीं करें से संबंधित दिशानिर्देश जारी किए हैं। भारी खतरे के कारण एसपीजी ने अपनी सुरक्षा ड्रिल दोगुनी कर दी है। दिलचस्प बात यह है कि एसपीजी सुरक्षा पाने वाले तीन राजनेता 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। चुनाव के दौरान इन राजनेताओं की सुरक्षा एसपीजी के लिए एक बड़ी चुनौती है। ये तीन राजनेता हैं-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सोनिया गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी। कांग्रेस ने अगर मनमोहन सिंह को टिकट दिया, तो चुनाव में एसपीजी सुरक्षा प्राप्त नेताओं की संख्या चार हो सकती है। 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान अचूक सुरक्षा पाने वाले देश के शीर्ष सात राजनेता हैं-नरेंद्र मोदी, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, संघ प्रमुख मोहन भागवत, फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला।


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चुनाव के दौरान न केवल आम नागरिकों को, बल्कि देश के अति महत्वपूर्ण नेताओं को सुरक्षा प्रदान करना भी केंद्र सरकार की जवाबदेही है। भारत ने पद पर रहते हुए दो प्रधानमंत्रियों-इंदिरा गांधी और राजीव गांधी, को खोया है। उसके बाद से भारत सरकार का मंत्रिमंडीय सचिवालय और केंद्रीय गृह मंत्रालय किसी भी पदासीन प्रधानमंत्री की सुरक्षा में कोई कोताही नहीं बरतना चाहता।

लोकसभा चुनाव तो छोड़िए, हाल ही में न्यूजीलैंड में जो हुआ है, उसे ध्यान में रखते हुए हमारी सुरक्षा एजेंसी ने प्रधानमंत्री की सुरक्षा दोगुनी कर दी है। नरेंद्र मोदी दुनिया के सातवें सबसे ज्यादा संरक्षित व्यक्ति हैं। इस मामले में पहले नंबर पर अमेरिकी राष्ट्रपति हैं। नरेंद्र मोदी 35 अंतरराष्ट्रीय आतंकी समूहों और आठ पाकिस्तानी आतंकी संगठन के निशाने पर हैं। एसपीजी की कुल ताकत 5,600 है, और एक समय में 350 एसपीजी ब्लैक कैट कमांडो तैनात रहते हैं। इन सभी को सेना, बीएसएफ, सीआरपीएफ और सीआईएसएफ से प्रतिनियुक्ति पर लाया जाता है। एसपीजी का प्रमुख काम पदासीन व पूर्व प्रधानमंत्रियों तथा उनके परिजनों की सुरक्षा है। वर्ष 1985 में एसपीजी का गठन संसद के एक अधिनियम के तहत किया गया था। इसके संस्थापक निदेशक भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी डॉ. एस सुब्रमण्यन थे।

एसपीजी का प्रमुख काम हर मिनट प्रधानमंत्री की हर गतिविधि पर नजर रखना है। एसपीजी सभी खतरों, आतंकवादियों, प्राकृतिक आपदाओं, राजनीतिक दुश्मनों, दुश्मन देश के राजनीतिक व आतंकी समूहों से प्रधानमंत्री की रक्षा करती है। राज्यों में रैलियों के दौरान प्रधानमंत्री की सुरक्षा चार स्तरों पर होती है। एसपीजी प्रधानमंत्री के आंतरिक स्तर के घेरे की सुरक्षा करती है। उसके बाद दूसरे स्तर की सुरक्षा केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल करती है। उसके बाद तृतीय स्तर की सुरक्षा की जिम्मेदारी खुफिया ब्यूरो के राज्यों की सहायक इकाइयों के जवान करते हैं और चौथे स्तर की सुरक्षा की जिम्मेदारी राज्य पुलिस की होती है। मान लीजिए, यदि प्रधानमंत्री तमिलनाडु के दौरे पर जाते हैं, तो तमिलनाडु पुलिस प्रधानमंत्री के चौथे स्तर की जिम्मेदारी संभालेगी। प्रधानमंत्री की हर यात्रा के लिए पचास से साठ कारों की योजना बनाई जाती है, जिसका समन्वय एसपीजी द्वारा किया जाता है। एसपीजी के पास विशेष जैमर होता है, जो किसी भी विस्फोटक उपकरण के रिमोट कंट्रोल को बेअसर करता है। जैमर की निगरानी और देखभाल एसपीजी द्वारा की जाती है। प्रधानमंत्री जहां भी यात्रा पर जाएंगे, वायुसेना के विमान नई दिल्ली से बुलेट प्रूफ कार उन स्थानों पर ले जाएंगे।

प्रधानमंत्री मोदी की कार को एसपीजी के पांच जवान घेरे रहते हैं। उन्हें सुरक्षा एजेंसी से सख्त निर्देश है कि जब तक बाहर से सुरक्षा मंजूरी नहीं मिल जाती, प्रधानमंत्री अपनी कार का दरवाजा न खोलें। ये पांचों एसपीजी जवान बुलेट प्रूफ जैकेट पहने होते हैं। अगर उन्हें गोलीबारी या भीड़ का कोई खतरा होता है, तो ये जवान प्रधानमंत्री के लिए मानव दीवार बन जाते हैं। वे प्रधानमंत्री को चारों तरफ से घेर लेते हैं, ताकि उन्हें कोई छू भी न सके। एसपीजी के एक जवान के हाथ में काला हैंडबैग होता है। यह सामान रखने वाला कोई थैला नहीं, बल्कि इसमें इलेक्ट्रिक शील्ड होती है, जो मात्र तीन सेकंड में खुल जाएगी और प्रधानमंत्री को अपने घेरे में लेकर उनकी सुरक्षा करेगी। यह किसी भी रिमोट सेंसिंग से नियंत्रित हथियारों को बेअसर कर देगी। एसपीजी के जवान चारों तरफ देखते रहते हैं और उनकी घूमती आंखों को भीड़ या आतंकवादी न देख सकें, इसलिए वे हमेशा अपनी आंखों पर काला चश्मा लगाए रखते हैं। काले चश्मे फैशन के लिए नहीं, उनकी आंखों की सुरक्षा के लिए होता है।

बढ़ते वैश्विक आतंकवाद के कारण नरेंद्र मोदी की रक्षा सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती है। जिस तरह से आतंकवादी किसी भी व्यक्ति पर हमला करने के लिए नई तकनीक विकसित कर रहे हैं, हमारी सुरक्षा एजेंसियां भी विभिन्न प्रकार की तकनीकों और उपकरणों का विकास कर रही हैं, ताकि प्रधानमंत्री की सुरक्षा हो सके। दुनिया भर में सुरक्षा एजेंसियां बंदूकों, जैमरों और बख्तरबंद गाड़ियों जैसे कई सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल करती हैं।

एसपीजी अधिनियम के अनुसार प्रधानमंत्री किसी निजी वाहन में यात्रा नहीं कर सकते, उन्हें एसपीजी द्वारा मान्य वाहनों में ही यात्रा करनी होगी, जो बुलेट प्रूफ होता है। प्रधानमंत्री की यात्रा से तीन दिन पहले ही एसपीजी उनके लिए भारतीय वायुसेना के विमान से संबंधित स्थान पर बुलेट प्रूफ कार का विशेष प्रबंध करती है।

एसपीजी अधिनियम के अनुसार राष्ट्रपति, उप राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की निजी सुरक्षा के लिए पुलिस महानिदेशक और पुलिस कमिश्नर सीधे उत्तरदायी होते हैं। यही कारण है कि एसपीजी हमेशा पुलिस महानिदेशक के साथ तालमेल बिठाती है। एसपीजी केवल प्रधानमंत्री की सुरक्षा करती है, जबकि राज्य पुलिस को प्रधानमंत्री को विरोधियों से भी बचाना होता है।

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