सियासत-सा जहरीला कराची का समंदर

राफिया जकारिया Updated Sun, 12 Apr 2015 04:26 PM IST
Sea of karachi as poisoness politics
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कराची की हवा में घुलते राजनीतिक और आतंकी जहर से हर कोई वाकिफ है। यह हर रोज जनाजों की शक्ल में शहर से अपनी कीमत वसूलता है। कभी किसी बम विस्फोट की जिम्मेदारी तालिबान लेता है, तो कभी कोई दूसरा आतंकी समूह कुछ और लोगों की जान ले लेता है। यहां इतनी ज्यादा राजनीतिक हत्याएं और आतंकी वारदातें होती हैं कि इनसे होने वाली शहरबंदी रोजमर्रा की बात हो गई है। मगर कराची ने केवल यही जहर नहीं पैदा किया। तेजी से शहरीकृत होते पाकिस्तान के सबसे बड़े शहर कराची में फैला हुआ जहर केवल राजनीति तक सीमित नहीं है। हाल में वाशिंगटन पोस्ट में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक कराची से रोज 35 करोड़ गैलन सीवेज और अशुद्ध औद्योगिक कचरा अरब सागर में गिरता है। यह मात्रा इतनी है, जो 530 ओलंपिक आकार के स्विमिंग पूलों को भरने के लिए काफी होगी। इसके अलावा शहर में होने वाली अवैध औद्योगिक गतिविधियों से भी आठ हजार टन ठोस कचरा रोज कराची पत्तन में गिरता है। इस कचरे का गणित समझना कोई मुश्किल नहीं है। फिलहाल कराची की आबादी तकरीबन दो करोड़ बीस लाख है, जो इसे देश के शहरीकरण का केंद्र बनाती है। समझने वाली बात है कि मनुष्य की रोजमर्रा की जिंदगी में कचरा पैदा होना बिल्कुल स्वाभाविक होता है। मगर बुनियादी सरंचना के विकास के प्रयासों में इसको निपटाने पर गौर नहीं किया जाता।
दरअसल, रोजमर्रा की राजनीतिक खटपट से किसी भी मामले में एकमत होना मुश्किल हो जाता है। वहीं, मौके की ताक में रहने वाले आतंकी समूह हालात को और कठिन बनाते हैं। ऐसे में, सफाई व्यवस्था और कचरे के व्यवस्थित प्रबंधन की उम्मीद लगातार कम होती दिखती है। चाहे आतंकी हों, या राजनीतिक विरोधी, शौच तो सभी करते हैं, इस तरह वे सभी कराची की समस्या का हिस्सा हैं। वाशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, एक-दूसरे का हमेशा विरोध करने वाले इन सभी समूहों का संयुक्त अशोधित कचरा अरब सागर में गिरता है। ऐसे में यह मानना गलत होगा कि सारा कचरा पानी में बह जाता है, और शहर में समुद्र के किनारे मौज-मस्ती करने वालों को साफ पानी मिलता है।

पाकिस्तान की कृषि समृद्ध गन्ना बेल्ट से निकलने वाला टनों कचरा सिंधु नदी में मिलकर कराची के पास उस बिंदु पर, जहां यह समुद्र में मिलती है, नदी को सबसे ज्यादा विषैला बना देता है। कराची के तट पर खड़ी इमारतों और मॉलों के नीचे का समुद्र सीवेज से भरा है। तट पर बसे हुए छोटे-छोटे गांवों के लोग पहले अपनी आजीविका के लिए मछलियों पर निर्भर थे। पर आज कमाई का यह स्रोत उनसे छिन्ा गया है। हैरत नहीं है कि सी-फूड के मामले में भी शहर की स्थिति खासी प्रभावित हुई है। हालिया जांच रिपोर्ट बताती है कि कराची तट के पास के मत्स्य क्षेत्र में क्रोमियम, कैडमियम लेड और आयरन काफी मात्रा में मिला है। इसका असर मछलियों पर हो रहा है, मगर मछुआरों की हालत तो और भी दयनीय हो गई है। स्वच्छ समुद्र का भुलावा कायम रखने के लिए हॉक्स बे के नजदीक स्थापित छोटे से परमाणु रिएक्टर पर किसी अध्ययन की जरूरत महसूस नहीं की जा रही है। कोई भी यह जानने की उत्सुकता नहीं दिखा रहा कि यह प्लांट अपने आसपास के वातावरण में कितना विकिरण उत्सर्जित कर रहा है। नजदीकी गांव वाले आए दिन तरह-तरह की बीमारियों को लेकर शिकायत करते रहते हैं, मगर इसके पीछे विकिरण व प्रदूषण भी हो सकता है, इस पर किसी का ध्यान नहीं है। वैसे भी गरीबों की हैसियत मछलियों से ज्यादा कहां मानी जाती है! अस्तित्व में आने के बाद से ही इस शहर के लोगों के लिए यहां का समुद्र तट दर्शनीय रहा है। मगर अब इसमें जहर की मात्रा हद से ज्यादा बढ़ चुकी है। एक मरीन जीव विज्ञानी ने वाशिंगटन पोस्ट को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि यह दुनिया के सबसे प्रदूषित पर्यावरण वाली जगह बन गई है, जिस पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है। इन हालात में यह कहना सही होगा कि यहां केवल अस्थिर मानसून व ज्वार-भाटे की अनिश्चित स्थिति ही मौज-मस्ती करने वालों को समुद्र से दूर नहीं रख रही है। यहां यह काम समुद्र में फैलता जहर कर रहा है। जाहिर है कि पाकिस्तान के पवित्र समझे जाने वाले समुद्र तट इस मुल्क की राजनीति, आचार शास्त्र और इतिहास की तरह ही अपवित्र है। लंबे समय से हालात में सुधार का इंतजार करते खामोश समुद्र की हालत कुछ-कुछ पाकिस्तान जैसी है, जो सफाई तो चाहता है, मगर नाकामयाबी हाथ आने पर, गंदगी की अनदेखी करने लगता है।

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