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मुद्दा: नई ऊंचाई पर ग्रामीण बाजार, अर्थव्यवस्था के लिए नई अहम भूमिका

Tue, 20 Jan 2026 06:39 AM IST
Jayantilal Bhandari जयंतीलाल भंडारी
Updated Tue, 20 Jan 2026 06:39 AM IST
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सार
उम्मीद है कि सरकार आगामी बजट में देश के ग्रामीण बाजारों के विकास और उन्हें रफ्तार देने के समुचित प्रावधान करेगी।
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Rural markets reach new heights, playing a crucial new role in indian economy
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

विस्तार

एक फरवरी को वित्त मंत्री द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले आगामी वित्त वर्ष 2026-27 के बजट के तहत छोटे किसान, कृषि और ग्रामीण विकास के लिए बेहतरी के संकेतों तथा विकसित भारत जी-राम-जी कानून के लागू होने से ग्रामीण बाजारों के मजबूत होने की संभावनाएं उभरकर दिखाई दे रही हैं। साथ ही, ट्रंप की टैरिफ चुनौतियों का मुकाबला करने में देश की अर्थव्यवस्था के लिए ग्रामीण बाजारों की नई अहम भूमिका होगी।  


उल्लेखनीय है कि भारत के ग्रामीण बाजारों पर प्रकाशित हो रही रिपोर्टों के मुताबिक, भारत में ग्रामीण बाजार शहरी बाजारों की तुलना में तेजी से बढ़ रहे हैं। फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस (फाडा) की रिपोर्ट के अनुसार, जहां शहरी बाजारों में यात्री वाहनों की बिक्री आठ फीसदी बढ़ी, वहीं ग्रामीण इलाकों में इसमें 12 फीसदी की वृद्धि हुई। 2024 में 41 लाख वाहनों की तुलना में वर्ष 2025 में ग्रामीण बाजारों में कुल 44.7 लाख यात्री वाहन बिके। भारत के ग्रामीण परिवेश से संबंधित कई अन्य रिपोर्टों से स्पष्ट हो रहा है कि सरकार की योजनाओं से किसानों की आमदनी बढ़ने से गांवों में खपत बढ़ रही है, जिससे ग्रामीण बाजार को रफ्तार मिल रही है। राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) द्वारा जारी आठवें चरण के ग्रामीण आर्थिक स्थिति एवं भावना सर्वेक्षण (आरईसीएसएस) में बताया गया है कि देश में पिछले एक साल में ग्रामीण परिवारों की आमदनी बढ़ने से खर्च करने की क्षमता और इच्छा, दोनों में बढ़ोतरी हुई है।


सर्वे के मुताबिक, 80 फीसदी ग्रामीण परिवारों द्वारा पिछले एक साल में अपनी खपत में वृद्धि की सूचना दी गई है। सर्वे के अनुसार, अब तक ग्रामीण क्षेत्रों में खपत इतनी तेज रफ्तार से कभी नहीं बढ़ी। निवेश और औपचारिक ऋण में भी रिकॉर्ड तेजी दर्ज की गई है, जो बढ़ती आय के समानुपातिक मानी जा सकती है। 29.3 फीसदी ग्रामीण परिवारों ने पिछले एक साल में पूंजीगत निवेश (खेती व गैर-खेती, दोनों क्षेत्रों में) बढ़ाया है। औपचारिक स्रोतों (बैंक, सहकारी संस्थाएं आदि) से कर्ज लेने वाले परिवारों का हिस्सा भी बढ़ा है।

हाल ही में जारी विश्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रामीण सुधार, बेहतर कृषि उत्पादन, ग्रामीण वेतन वृद्धि, ग्रामीण उपभोग में बढ़ोतरी तथा कर सुधार जैसे घटकों के दम पर भारत के ग्रामीण बाजार तेजी से आगे बढ़े हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना देश के करोड़ों छोटे व सीमांत किसानों को वित्तीय मजबूती दे रही है। पीएम स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीणों को उनकी जमीन का कानूनी हक देकर उनका आर्थिक सशक्तीकरण किया जा रहा है। किसानों को औपचारिक ऋण से जोड़ने के मद्देनजर गांवों में बैंक शाखाओं की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर फंड, सहकारी समितियों और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वयं सहायता समूह, ग्रामीण बैंकिंग व्यवस्था आदि प्रभावी भूमिका निभा रहे हैं। सरकार ने बीते 11 वर्षों में फसलों पर दी जाने वाली सब्सिडी और फसल बीमा की राशि को तेजी से बढ़ाया है। किसान डिजिटल पेमेंट को अपना रहे हैं। वर्ष 2024-25 में भारत में रिकॉर्ड 37.7 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन हुआ है तथा देश का कुल कृषि निर्यात 50 अरब डॉलर के पार पहुंच गया है।

केंद्र सरकार अब विकसित भारत जी-राम-जी कानून के तहत ऐसे मॉडल की स्थापना करने जा रही है, जिससे ग्रामीण स्तर पर विकास कार्यों की दिशा तय हो। जिन चार प्राथमिकताओं का जिक्र किया गया है, उनमें जल सुरक्षा, ग्रामीण बुनियादी ढांचा, आजीविका से जुड़े बुनियादी ढांचे और मौसमी घटनाओं के लिए विशेष कार्य शामिल हैं। इनके तहत रोजगार और विकास कार्यों के क्षेत्र भी सुनिश्चित किए गए हैं। पर हमें अभी भी ग्रामीण बाजारों के विकास और किसानों की आमदनी में वृद्धि के लिए कई बातों पर ध्यान देना होगा। छोटे व सीमांत किसान अब भी आधुनिक खेती की तकनीक अपनाने में असमर्थता का अनुभव कर रहे हैं। अब भी ग्रामीण जनजीवन के करीब 22 फीसदी लोगों की कर्ज के लिए साहूकारों और अनौपचारिक स्रोतों पर निर्भरता बनी हुई है। ऐसे में, ग्रामीण ऋण लागत कम करने और विश्वास बढ़ाने के लिए तकनीक का लाभ उठाना होगा। गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी की भूमिका को प्रभावी बनाना होगा। प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना का विस्तार करके छोटे किसानों की संस्थागत ऋण तक पहुंच बढ़ानी होगी।

उम्मीद करें कि सरकार आगामी वर्ष 2026-27 के बजट के तहत देश के ग्रामीण बाजारों के विकास और उन्हें रफ्तार देने के लिए रणनीतिपूर्वक आगे बढ़ेगी। किसानों की आय बढ़ाने के अधिक उपाय किए जाएंगे। ग्रामीण रोजगार बढ़ाए जाएंगे। गांव से शहर को जोड़ने वाली सड़कों और बुनियादी ढांचे पर अधिक जोर दिया जाएगा। उम्मीद करें कि सरकार ग्रामीण भारत में परिवारों के युवाओं को कौशल प्रशिक्षण व डिजिटल कौशल से लैस करके रोजगार से सशक्तीकरण का रणनीतिक अभियान आगे बढ़ाएगी। इन सभी उपायों से ग्रामीण भारत में आमदनी बढ़ेगी और ग्रामीण बाजार नई ऊंचाई पर पहुंचते हुए दिखाई दे सकेंगे।
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