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पहाड़ पर भारी पड़ती सड़क

सुरेश भाई Updated Tue, 06 Mar 2018 07:33 PM IST
सुरेश भाई
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आजकल चारधाम-गंगोत्री, यमनोत्री, केदारनाथ और बदरीनाथ मार्गों पर हजारों वन प्रजातियों के ऊपर पहाड़ टूटने लगे हैं। ऋषिकेश से आगे देवप्रयाग, श्रीनगर, रुद्रप्रयाग, अगस्तमुनि, गुप्तकाशी, फाटा, त्रिजुगीनारायण, गौचर, कर्णप्रयाग, नंदप्रयाग, चमोली, पीपलकोटी, हेंलग से बदरीनाथ तक हजारों पेड़ों का सफाया हो गया है। 'ऑल वेदर रोड' के नाम पर 43 हजार पेड़ काटे जा रहे हैं, लेकिन सवाल खड़ा होता है कि 10-12 मीटर सड़क विस्तारीकरण के लिए 24 मीटर तक पेड़ों का कटान क्यों किया जा रहा है? और यह समझना भी जरूरी है कि एक पेड़ गिराने का अर्थ है, दस अन्य पेड़ों का खतरे में पड़ जाना। सड़क चौड़ीकरण के नाम पर कई प्रजातियों के पेड़ वन निगम काट रहा है, जिसकी छवि केवल 'वनों को काटो और बेचो' पर खड़ी है।
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मध्य हिमालय के इस भू-भाग में विकास का यह नया प्रारूप स्थानीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जनजीवन पर भारी पड़ रहा है। सड़क निर्माण, सड़क चौड़ीकरण, बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं व सुरंगों का निर्माण इस भूकंप प्रभावित क्षेत्र की अस्थिरता को बढ़ा रहा है। भारी व अनियोजित निर्माण कार्यां का असर जनजीवन पर भी पड़ रहा है। लोग पलायन कर रहे हैं।

इस दौरान पर्यावरण कार्यकर्ताओं की टीम राधा बहन और स्वयं लेखक ने वन कटान से प्रभावित चारों धामों में ऑल वेदर रोड के लिए प्रस्तावित 750 किलोमीटर तक का भ्रमण किया है। इसके आसपास के लोगों से बातचीत की है। जिसकी एक रिपोर्ट केंद्रीय सड़क एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को 18 जनवरी को सौंपी गई है। गंगोत्री, केदारनाथ, बदरीनाथ में कई स्थानों पर सड़क चौड़ीकरण से लोगों की आजीविका, रोजगार और जंगल प्रभावित हो रहे हैं।

केदारनाथ मार्ग पर काकड़ा गाड़ से सिगोली के घने वनों के बीच से ऑलवेदर रोड का नया संरेखण गुप्तकाशी के लिए किया जा रहा है। इसी तरह फाटा बाजार को छोड़कर मैखंडा से खड़िया गांव होते हुए नया निर्माण किया जाना है। फाटा और सेमी के लोग इससे बहुत आहत हैं। लोगों का कहना है कि जिस रोड पर वाहन चल रहे हैं, वही मजबूत की जानी चाहिए।

यहां स्थित रुद्रप्रयाग, अगस्तमुनि, तिलवाड़ा ऐसे स्थान हैं, जहां लोग सड़क चौड़ीकरण नहीं चाहते हैं। यदि यहां ऑल वेदर रोड नए स्थान से बनाई गई, तो वनों का बड़े पैमाने पर कटान होगा और यहां का बाजार सुनसान हो जाएगा। प्रभावितों का कहना है कि सरकार केवल डेंजर जोन यानी खतरनाक क्षेत्र में ही मरम्मत कर दे, तो सड़कें ऑल वेदर हो जाएंगी। चार धामों में ऐसे दो दर्जन से अधिक संवेदनशील क्षेत्र खनन कार्यों से ही पैदा हुए हैं।

उत्तराखंड की सरकार भूमि अधिग्रहण के लिए जितनी सक्रिय हुई है, उतना उन्हें प्रभावित क्षेत्र की पीड़ा को समझने का मौका नहीं मिला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑल वेदर रोड बनाने की घोषणा उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के समय की थी, तब से अब तक यह चर्चा रही है कि पहाड़ों के दूरस्थ गांव तक सड़क पहुंचाना अभी बाकी है। सीमांत जनपद चमोली उर्गम घाटी के लोग वर्ष 2001 से सुरक्षित मोटर सड़क की मांग कर रहे हैं। 24 मीटर के स्थान पर 10 मीटर तक ही भूमि का अधिग्रहण होना चाहिए, क्योंकि यहां छोटे और सीमांत किसानों के पास बहुत ही छोटी-छोटी जोत है, उसी में उनके गांव, कस्बे और सड़क किनारे आजीविका के साधन मौजूद हैं, जिसे पलायन रोकने और रोजगार देने की दृष्टि से बचाना चाहिए। 

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