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गर्मी, बिजली और संकट: संकेतों को बनाया जाए भविष्य की तैयारी का अवसर

Thu, 21 May 2026 06:03 AM IST
Devesh Tripathi अमर उजाला
अमर उजाला Published by: Devesh Tripathi Updated Thu, 21 May 2026 06:03 AM IST
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सार
बिजली की उच्चतम मांग अपने सभी रिकॉर्ड तोड़ती जा रही है। बढ़ती आबादी व विकास के साथ यह स्वाभाविक भी है। पर, इसे सिर्फ गर्मी की तीव्रता का संकेत मानने के बजाय भविष्य की तैयारी का अवसर बनाया जाए, तभी हम एक ऊर्जा सुरक्षित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे।
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बिजली संकट - फोटो : ANI

विस्तार

बढ़ती गर्मी के बीच देश में बिजली की उच्चतम मांग का अब तक के अपने सर्वोच्च स्तर पर पहुंचना महज एक आंकड़ा नहीं, बल्कि भविष्य के उस संकट की चेतावनी है, जिसके लिए हमें अभी से तैयार होने की जरूरत है। देखा जाए, तो हर वर्ष मई व जून के महीने बिजली की खपत के लिहाज से चुनौतीपूर्ण होते ही हैं, लेकिन इस बार स्थितियां सामान्य से अलग दिख रही हैं। मौसम विभाग के अनुसार, इस सप्ताह की शुरुआत में ही उत्तर-पश्चिम, पश्चिम और मध्य भारत के अधिकांश हिस्सों के साथ पूर्वी व उत्तरी प्रायद्वीपीय क्षेत्रों में अधिकतम तापमान 40 से 47 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा। उत्तर भारत में तो ज्यादातर जगहों पर तापमान 45 डिग्री को छूता दिखा, वहीं उत्तर प्रदेश के बांदा में पारा सभी रिकॉर्ड तोड़ता हुआ 48 के पार पहुंच रहा है। जाहिर है कि तापमान में लगातार वृद्धि के कारण एयर कंडीशनर व कूलर वगैरह की मांग बढ़ने से आने वाले दिनों में बिजली खपत के सभी रिकॉर्ड ध्वस्त होने की पूरी आशंका है। उच्चतम बिजली की मांग, जो फिलहाल 260 गीगावाट के ऊपर पहुंच चुकी है, विद्युत मंत्रालय के अनुमान के अनुसार, अधिकतम 271 गीगावाट तक पहुंच सकती है। इस रिकॉर्ड मांग को पूरा करने में यदि अब तक कोई बड़ी दिक्कत नहीं आई है, तो इसकी वजह सौर ऊर्जा है, जिसका इस हफ्ते के आंकड़ों के अनुसार, आपूर्ति में करीब 61 गीगावाट का योगदान रहा है, जो थर्मल संयंत्रों के लगभग 157 गीगावाट के योगदान के बाद दूसरे स्थान पर रहा। लेकिन, इसमें समस्या यह है कि सूर्यास्त के बाद सौर ऊर्जा के फायदे मिलने बंद हो जाते हैं, जिसकी पुष्टि ग्रिड कंट्रोलर ऑफ इंडिया के आंकड़े भी करते हैं। इस दौरान, बिजली की मांग को पूरा करने के लिए कोयला, जलविद्युत, परमाणु और पवन जैसे पारंपरिक स्रोतों पर निर्भरता बढ़ जाती है। हालांकि, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की रिपोर्ट आश्वस्त करती है कि कोयला आपूर्ति की स्थिति पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में बेहतर है। इसके बावजूद, जिस ढंग से गर्मी सभी रिकॉर्ड तोड़ रही है, उससे स्वाभाविक ही आशंकाएं पैदा होती हैं। देश में पिछले कुछ वर्षों में बिजली की उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, खासकर सौर व अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में। पर समस्या वितरण व भंडारण की भी है। कई शहरों व क्षेत्रों में पुराना बिजली ढांचा बढ़ती मांग के दबाव को झेलने में सक्षम नहीं दिखता। बढ़ती आबादी व विकास के साथ ऊर्जा की मांग बढ़ना स्वाभाविक है, लेकिन इसे सिर्फ गर्मी की तीव्रता का संकेत मानने के बजाय भविष्य की तैयारी का अवसर बनाया जाए, तभी हम एक ऊर्जा सुरक्षित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे।
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