कसरत से कोरोना को मात! बता रहे हैं वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. आर कुमार
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कोरोना के प्रसार को रोकने के लिए आपदा अधिनियम (घर पर रहने तथा पार्क, जिम और फिटनेस सेंटर को बंद करने का निर्देश) के तहत सार्वजनिक स्वास्थ्य सिफारिशें जारी की गईं, जिसने दैनिक शारीरिक गतिविधि को कम कर दिया। शारीरिक गतिविधि से मनाही दुर्भाग्यपूर्ण है, क्योंकि व्यायाम से शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली बढ़ाने और मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, और हृदय रोग जैसी बीमारियों का मुकाबला करने में मदद मिल सकती है, जो हमें गंभीर कोविड बीमारी के प्रति अतिसंवेदनशील बनाते हैं। लॉकडाउन ने आम लोगों की शारीरिक गतिविधि को कम कर दिया। गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देश में बुजुर्गों और छोटे बच्चों को खास तौर से कहा गया कि वे घर के भीतर रहें, जिन्हें विशेष रूप से निरोग रहने के लिए नियमित व्यायाम की आवश्यकता होती है। जो लोग शारीरिक रूप से निष्क्रिय रहते हैं, उनमें रोग से प्रभावित होने की क्षमता बढ़ जाती है, खासकर जब व्यक्ति वास्तव में संक्रमित होता है।
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संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती होने पर क्वारंटीन और सोशल डिस्टेंसिंग की स्थिति में बिस्तर पर आराम करने और शारीरिक गतिविधि में कमी के चलते अंगों की प्रतिरोधक क्षमता घट जाती है और प्रतिरक्षा, श्वसन, हृदय, मस्कुलोस्केलेटल और मस्तिष्क प्रणाली को नुकसान का खतरा बढ़ जाता है। दिल्ली के अस्पतालों में कोरोना वायरस के रोगियों में तनाव, मनोदशा, नींद की गुणवत्ता, लक्षण की तीव्रता, जीवन की गुणवत्ता और नैदानिक परिणामों पर योग (प्राणायाम) के प्रभावों का मूल्यांकन करने के लिए अध्ययन किया जा रहा है। चूंकि यह वायरस मानव प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए नया है, इसलिए हम प्रारंभिक संक्रमण से निपटने के लिए अपनी जन्मजात प्रतिरक्षा के पहलुओं पर निर्भर हैं।
हालांकि हम अभी यह नहीं जानते हैं कि हमारी जन्मजात प्रतिरक्षा पर्याप्त मजबूत है या कोरोना वायरस से बचाव के लिए लंबे समय तक पर्याप्त होगी। इसलिए विभिन्न प्रयोगशालाओं में बन रहे टीके की प्रभावकारिता पर बहस चल रही है। इसमें कोई शक नहीं कि नियमित रूप से मध्यम व्यायाम सुरक्षात्मक होते हैं, जो संक्रमण से रुग्णता और मृत्यु दर में सुधार करते हैं। यदि जन्मजात प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत बनाया जाता, तो कोरोना से जंग में भारत बेहतर प्रदर्शन करता, क्योंकि कोरोना संक्रमितों की चिकित्सा सेवा अनिश्चित है।
जो लोग अपने कार्यस्थलों पर साइकिल चलाकर जा सकते हैं, धूल झाड़ने, झाड़ू लगाने, बर्तन धोने, खाना बनाने, लॉन की घास काटने, पालतू जानवरों को पालने या बच्चे खिलाने जैसा शारीरिक कार्य कर सकते हैं, वे शारीरिक निष्क्रियता से बच सकते हैं और सहज प्रतिरक्षा स्तर को बनाए रख सकते हैं। 'एनल्स ऑफ इंटरनल मेडिसिन' में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, यह पाया गया कि लॉकडाउन के पहले 30 दिनों में लोगों का दैनिक पैदल चलना काफी कम हो गया। इटली में लोगों के दैनिक पैदल चलने में 48.7 फीसदी की कमी हुई, जबकि स्वीडन में मात्र 6.9 फीसदी की कमी देखी गई। यह अंतर सरकारी आदेशों के कारण पैदा हुआ, क्योंकि इटली ने बहुत पहले लॉकडाउन लगा दिया था, जबकि स्वीडन ने इसे लागू ही नहीं किया।
शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के कई क्षेत्रों में शारीरिक गतिविधि का प्रभाव बहुत ज्यादा देखा जा सकता है। यह सुखद है कि नियमित व्यायाम करने वालों को कोविड का जोखिम कम हो सकता है, क्योंकि पुराने रोग वाले व्यक्ति (हृदय रोग, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा-ये सभी कसरत न करने से बढ़ते हैं) को कोविड का खतरा ज्यादा होता है। क्यों? हाल की रिपोर्टों से पता चलता है कि आक्रामक वायरस से लड़ने की क्षमता बी और टी कोशिकाओं की उपस्थिति पर आधारित है, जो बुढ़ापे में और पुरानी बीमारियों के साथ घटती हैं या शारीरिक गतिविधि में कमी से घट सकती हैं।
पैदल चलने, खेलने, जिम में कसरत करने, घरेलू काम करने से प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है, वजन घटता है, गैर-संचारी रोगों के जोखिम कम होते हैं, हड्डी एवं मांसपेशियों की ताकत में सुधार होता है और कोर्टिसोल के स्तर को संतुलित रखता है, जो तनाव और निराशा को कम करता है।