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वक्फ प्रशासन में सुधार राष्ट्रीय हित में

Wed, 11 Sep 2024 06:17 AM IST
शिव शुक्ला तारिक मंसूर
तारिक मंसूर Published by: शिव शुक्ला Updated Wed, 11 Sep 2024 06:17 AM IST
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सार
मुस्लिम समुदाय को भ्रामक सूचनाओं का शिकार नहीं होना चाहिए कि इन सुधारों से उनकी संपत्तियां छिन जाएंगी।
 
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Reforms in Waqf administration in national interest
वक्फ बोर्ड। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वक्फ कानून में संशोधन के प्रस्ताव पर मुस्लिम धर्मगुरुओं के एक वर्ग में काफी चिंता है। वक्फ, मुसलमानों की एक प्रमुख प्रथा है, जिसमें धार्मिक या धर्मार्थ उद्देश्य के लिए संपत्ति दान की जाती है। इस मुद्दे को मीडिया में व्यापक रूप से स्थान मिला है। हैरानी की बात है कि संशोधन की विषय-वस्तु मालूम होने के बावजूद जमीनी वास्तविकता की अनदेखी करके मात्र सैद्धांतिक मुद्दे उठाए जा रहे हैं। अब जबकि वक्फ संशोधन विधेयक संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) में विचाराधीन है, यह जरूरी है कि इसका निष्पक्ष, बिना किसी डर और धारणाओं से प्रभावित हुए विश्लेषण किया जाए। सरकार और संसद को इस मामले में सहमति और परामर्श से ही आगे बढ़ना चाहिए, ताकि समुदाय के एक वर्ग में व्याप्त डर और आशंकाएं कम हो सकें।



यह पहली बार नहीं है कि वक्फ कानून में बदलाव किया जा रहा है। 1913 और 1930 में भी इसमें संशोधन किए गए थे, जबकि अधिक व्यापक परिवर्तन वक्फ अधिनियम-1995 और वक्फ (संशोधन) अधिनियम-2013 के माध्यम से किए गए थे। वर्तमान विधेयक के कई बदलावों की सिफारिश 2006 में सच्चर समिति की रिपोर्ट और मार्च 2008 में राज्यसभा में प्रस्तुत वक्फ पर संयुक्त संसदीय समिति की रिपोर्ट में भी की गई थी। इन सिफारिशों में वक्फ के प्रबंधन में सुधार के लिए विभिन्न उपाय शामिल थे, जैसे प्रबंधकों के कामकाज को विनियमित करना, अभिलेखों का कुशल प्रबंधन, वक्फ बोर्डों की संरचना का पुनर्गठन करते हुए अन्य सामाजिक समूहों को शामिल करना, तकनीकी विशेषज्ञता, वित्तीय लेखा परीक्षा आदि। अतः यह कोई नया विचार नहीं है।


यह उल्लेख भी जरूरी है कि वक्फ में सुधार की मांग मुस्लिम समुदाय के भीतर से भी उठ रही है। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय को वक्फ संपत्तियों के अतिक्रमण और कुप्रबंधन जैसे मुद्दों पर मुसलमानों से बड़ी संख्या में शिकायतें मिलती रही हैं, जो बड़े पैमाने पर मुकदमों के रूप में सामने आई हैं। इन शिकायतों के विश्लेषण में पाया गया कि अप्रैल 2023 से मिली 148 शिकायतों में से अधिकतर अतिक्रमण, वक्फ भूमि की अवैध बिक्री, सर्वेक्षण और पंजीकरण में अत्यधिक विलंब और वक्फ बोर्डों और प्रबंधकों के खिलाफ शिकायतों से संबंधित थीं। केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली के डाटा का विश्लेषण बताता है कि अप्रैल 2022 से मार्च 2023 तक प्राप्त 566 शिकायतों में से 194 वक्फ भूमि पर अवैध अतिक्रमण और हस्तांतरण से संबंधित थीं और 93 शिकायतें वक्फ बोर्ड के अधिकारियों व प्रबंधकों के खिलाफ थीं।

न्यायाधिकरणों में 40,951 मामले लंबित हैं, जिनमें से 9,942 मामले मुस्लिम समुदाय द्वारा वक्फ का प्रबंधन करने वाली संस्थाओं के खिलाफ हैं। पिछले कई वर्षों में, तमाम सांसदों ने वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण में देरी, वक्फ बोर्ड द्वारा बाजार मूल्य से कम किराया लेने, वक्फ भूमि पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण, विधवाओं के विरासत अधिकार, सर्वेक्षण आयुक्त द्वारा सर्वेक्षण पूरा न करने, वक्फ संपत्ति रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण की धीमी प्रगति आदि के मुद्दे उठाए हैं।

हमें नहीं भूलना चाहिए कि वक्फ बेशक धर्मार्थ और धार्मिक उद्देश्यों के लिए बनाई गई मुस्लिम संस्थाएं हैं, लेकिन वे सार्वजनिक संस्थाएं भी हैं, जिनमें राष्ट्र के सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देने की अपार क्षमता है। इसलिए उनके प्रशासन में सुधार राष्ट्रीय हित में है। भारत के पास दुनिया की सबसे अधिक वक्फ संपत्तियां हैं। लगभग 8 लाख एकड़ वक्फ भूमि है, जिसका अनुमानित मूल्य लगभग 1.2 लाख करोड़ रुपये है। यदि उनका पारदर्शी और कुशल उपयोग किया जाए, तो वे सभी समुदायों को लाभ पहुंचा सकते हैं। सऊदी अरब, मिस्र, कुवैत, ओमान, बांग्लादेश और तुर्किये जैसे देशों में वक्फ संपत्तियों को आम तौर पर सरकारी कानूनों और संस्थानों द्वारा विनियमित किया जाता है।

इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए वक्फ सुधारों पर बहस तर्कसंगत, वस्तुनिष्ठ और अनुभवों से प्रेरित होनी चाहिए। ऐसे प्रस्ताव, जो सामाजिक न्याय और लैंगिक समानता को आगे बढ़ाएं, का स्वागत होना चाहिए और यह मुस्लिम समुदाय के लिए चिंता का कारण नहीं होना चाहिए। वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक और कुशल प्रक्रिया की शुरुआत करने से प्रशासन में सुधार होगा। मुस्लिम समुदाय को भ्रामक सूचनाओं का शिकार नहीं होना चाहिए कि इन सुधारों से उनकी संपत्तियां छिन जाएंगी।

(लेखक उत्तर प्रदेश विधान परिषद के मनोनीत सदस्य और एएमयू के पूर्व कुलपति हैं।)

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