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रावण का जैमर और लाचार मोबाइल

Tue, 08 Jan 2013 09:42 PM IST
राजेंद्र शर्मा
राजेंद्र शर्मा Updated Tue, 08 Jan 2013 09:42 PM IST
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ravana jammer and forlorn mobile
औरतों के खिलाफ बढ़ती यौन हिंसा ने हम सबको शर्मिंदा तो कर दिया है। लेकिन हम भी शर्म का बोझ उतारने में उस्ताद हैं। दरअसल हम ठहरे कर्मठ, और कर्मठ का मन पक्के घड़े की तरह होता है, शर्म-वर्म का बोझ उस पर चिपक ही नहीं सकता। औरतों के खिलाफ होने वाली यौन हिंसा का असली कुसूरवार हमने झटपट खोज निकाला है। हम क्यों शर्मिंदा हों! शर्मिंदा हो, बल्कि सजा पाए वह मोबाइल, जिसकी आदत आज हरेक लड़की को पड़ चुकी है। झगड़े की असली जड़ वही है। तभी तो पंचायतें जनाने हाथों से मोबाइल छुड़वाने के फरमान सुना रही हैं।
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अब कोई कुछ भी कहता रहे, इस देश की स्त्री का आदर्श तो सीता ही हो सकती है। और किसी ने बिल्कुल सही कहा कि सीता की कहानी का तो एक ही सबक है-स्त्री लक्ष्मण रेखा के अंदर रहे। उसने रेखा पार की और रावण ने अपहरण किया। जब रेखा के भीतर सुरक्षा का पक्का इंतजाम है, तो सीता लक्ष्मण रेखा पार करने का पंगा ही क्यों ले? वह रेखा पार करने का पंगा लेगी, तो उसके साथ जो होगा, उसके लिए स्त्री खुद जिम्मेदार होगी। रावण से अगर वह बच भी गई, तब भी रेखा लांघने के लिए उसे घर निकाले की सजा तो मिलेगी ही मिलेगी।

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मोबाइल की समस्या यह है कि वह इंडिया की चीज है, जो भारत में घुस आई है। मोबाइल फोन ही है, जो भारतीय नारी को इंडिया की ओर खींचता है, जहां बलात्कार होते हैं। न मोबाइल होगा, न नारी बलात्कार-मुक्त भारत की रेखा लांघेगी और न इंडिया के रावणों के हाथ चढ़ेगी। ये दलीलें बेकार हैं कि खतरा होने पर मोबाइल से पुलिस से लेकर घरवालों तक से मदद भी तो मांगी जा सकती है। रावण के जैमर के सामने कोई मोबाइल नहीं चलता। फिर पुलिस बेचारी क्या करेगी, वह तो हमेशा फिल्म के आखिरी सीन में ही आती है!   
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कुछ लोग इसमें भी बराबरी का तर्क देते हैं। उनकी दलील है कि औरतों को मर्दों के बराबर अधिकार मिलने चाहिए। पर किस चीज की बराबरी? जिंदगी क्या स्त्री की इज्जत के बराबर हो सकती है? बराबरी इंडियावालों को ही मुबारक हो, भारत के लिए तो लक्ष्मण रेखा की सुरक्षा ही भली। मोबाइल ही उनसे लक्ष्मण रेखा लंघवाता है। ऐसे में मोबाइल छुड़वाकर महिलाओं को सुरक्षित किया जा सकता है। फिर भी अगर कोई लक्ष्मणरेखा लांघे, तो भारत वाले भी उसे कड़ी सजा दे सकते हैं, जिससे दूसरों को सबक मिले कि रेखा पार करने पर क्या हो सकता है!

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