रावण का जैमर और लाचार मोबाइल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अब कोई कुछ भी कहता रहे, इस देश की स्त्री का आदर्श तो सीता ही हो सकती है। और किसी ने बिल्कुल सही कहा कि सीता की कहानी का तो एक ही सबक है-स्त्री लक्ष्मण रेखा के अंदर रहे। उसने रेखा पार की और रावण ने अपहरण किया। जब रेखा के भीतर सुरक्षा का पक्का इंतजाम है, तो सीता लक्ष्मण रेखा पार करने का पंगा ही क्यों ले? वह रेखा पार करने का पंगा लेगी, तो उसके साथ जो होगा, उसके लिए स्त्री खुद जिम्मेदार होगी। रावण से अगर वह बच भी गई, तब भी रेखा लांघने के लिए उसे घर निकाले की सजा तो मिलेगी ही मिलेगी।
मोबाइल की समस्या यह है कि वह इंडिया की चीज है, जो भारत में घुस आई है। मोबाइल फोन ही है, जो भारतीय नारी को इंडिया की ओर खींचता है, जहां बलात्कार होते हैं। न मोबाइल होगा, न नारी बलात्कार-मुक्त भारत की रेखा लांघेगी और न इंडिया के रावणों के हाथ चढ़ेगी। ये दलीलें बेकार हैं कि खतरा होने पर मोबाइल से पुलिस से लेकर घरवालों तक से मदद भी तो मांगी जा सकती है। रावण के जैमर के सामने कोई मोबाइल नहीं चलता। फिर पुलिस बेचारी क्या करेगी, वह तो हमेशा फिल्म के आखिरी सीन में ही आती है!
कुछ लोग इसमें भी बराबरी का तर्क देते हैं। उनकी दलील है कि औरतों को मर्दों के बराबर अधिकार मिलने चाहिए। पर किस चीज की बराबरी? जिंदगी क्या स्त्री की इज्जत के बराबर हो सकती है? बराबरी इंडियावालों को ही मुबारक हो, भारत के लिए तो लक्ष्मण रेखा की सुरक्षा ही भली। मोबाइल ही उनसे लक्ष्मण रेखा लंघवाता है। ऐसे में मोबाइल छुड़वाकर महिलाओं को सुरक्षित किया जा सकता है। फिर भी अगर कोई लक्ष्मणरेखा लांघे, तो भारत वाले भी उसे कड़ी सजा दे सकते हैं, जिससे दूसरों को सबक मिले कि रेखा पार करने पर क्या हो सकता है!