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बड़े बेआबरू होकर
सहीराम
Updated Wed, 08 Oct 2014 07:34 PM IST
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जी, हमारे लिए तो अच्छे दिनों का वायदा है, सो उम्मीद करनी चाहिए कि आ ही जाएंगे। पर लगता है कि सांसदों के बुरे दिन आ गए। नहीं, हम अपने वालों की बात नहीं कर रहे। वे तो अभी चुनकर ही आए हैं और हमारी ही तरह अच्छे दिनों के इंतजार में हैं।
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इधर पता चला कि पाकिस्तान के सांसदों के बुरे दिन आ गए। अब आप यह मत पूछिएगा कि पाकिस्तान में भी सांसद होते हैं क्या। जी, वहां सिर्फ फौज नहीं होती, सांसद भी होते हैं। हां, कर्नलों और जनरलों का कद वहां इतना बड़ा होता है और सांसदों का कद इतना छोटा कि उनके बारे में ज्यादातर पता ही नहीं चलता। पर अगर वे नहीं होते, तो नवाज शरीफ साहब प्रधानमंत्री कैसे होते।
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वैसे तो पाकिस्तान में जब फौज के अच्छे दिन आते हैं, नेताओं और सांसदों के तभी बुरे दिन आते हैं। वैसे वहां फौज के दिन बुरे कब आते हैं, यह शोध का विषय हो सकता है। पर अगर कोई यह मानता है कि वहां जम्हूरियत है, तो यह भी मानना होगा कि वहां नेताओं और सांसदों के दिन अच्छे ही गुजर रहे होंगे।
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पर पिछले दिनों पता चला कि उनके दिन अच्छे नहीं जा रहे। अब देखिए न, एक रहमान मलिक साहब हैं। पिछली सरकार में मंत्री थे। जब मंत्री थे, तो अक्सर ही उनके ऐसे बयान आते थे, जो चुटकले ज्यादा लगते थे।
तो जी, इन्हीं रहमान मलिक साहब को पिछले दिनों लोगों ने हवाई जहाज से उतार दिया। क्योंकि अपने नेता होने की ठसक में उन्होंने उसे लेट करवा दिया था। उनके साथ ही एक और सांसद रमेश वाथवानी को भी प्लेन से उतार दिया गया।
जनता जब शासकों को सिंहासन से उतार सकती है, तो सांसदों को हवाई जहाज से क्यों नहीं उतार सकती? फिर पाकिस्तान की जनता ने भी पता नहीं, कितने तानाशाहों को इतिहास के कूड़ेदान में फेंका ही है न। तो फिर ये सांसद क्या चीज हैं।
लेकिन ऐसा नहीं कि बुरे दिन सिर्फ पाकिस्तानी सांसदों के ही आए। पिछले दिनों यूक्रेन के एक सांसद विटेली झुरवास्की भी कचरे के डिब्बे में पाए गए थे। तो जी, अच्छे दिनों का इंतजार सिर्फ यहां नहीं, बाहर भी है।