Xi Jinping: जिनपिंग की नेतृत्व क्षमता पर सवाल, कोरोना मामले में बिगड़ी छवि
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विस्तार
बीजिंग में शी जिनपिंग की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाए जाने लगे हैं। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी उनके द्वारा कोविड प्रतिबंधों को अचानक हटाए जाने को सकारात्मक रंग देने के लिए संघर्ष कर रही है। यह यू-टर्न शी जिनपिंग की अन्य प्रमुख नीतियों को छोड़ने और उनके अत्यधिक वफादार एवं आक्रामक ‘वुल्फ वारियर’ राजनयिकों में से एक को हटाए जाने के बाद लिया गया है। कुछ हफ्ते पहले तक जिनपिंग लगभग अजेय नजर आ रहे थे और लग रहा था कि उन्होंने सारे विरोधियों को धूल चटाकर पार्टी प्रमुख के रूप में तीसरा अभूतपूर्व कार्यकाल सुरक्षित कर लिया है। सरकारी प्रोपेगेंडा मशीन शी जिनपिंग की शून्य कोविड नीति को खत्म किए जाने को सोची-समझी रणनीति का हिस्सा बता रही है। सोशल मीडिया पर हो रही आलोचना को निशाना बनाया जा रहा है। वीबो नामक सोशल मीडिया प्लेटफार्म का कहना है कि उसने एक हजार से ज्यादा एकाउंट डिलीट किए हैं, हालांकि असली आंकड़े ज्यादा भी हो सकते है।
चीन के स्वास्थ्य अधिकारियों ने बीते वर्ष सात दिसंबर और इस वर्ष 12 जनवरी के बीच करीब 60,000 लोगों की मौत का आंकड़ा जारी कर पारदर्शिता के अभाव की बढ़ती आलोचना का जवाब देने की कोशिश की है। गौरतलब है कि कोविड नियंत्रण विगत सात दिसंबर को हटाए गए थे। उनका कहना है कि इन 60,000 में से 5,503 की मौत कोविड संक्रमण की वजह से श्वसन तंत्र की विफलता के कारण हुई, जबकि 54,435 लोग कोविड संक्रमण के साथ अन्य बीमारियों के मिल जाने के कारण मरे। अधिकांश मृतकों की उम्र 65 वर्ष से ज्यादा थी। चीनी मीडिया का दावा है कि वायरस अपने चरम पर था, लेकिन स्वतंत्र आकलन कहता है कि आने वाले हफ्तों में चीन के नए साल के आगमन में, जब लोग बड़ी संख्या में यात्राएं करते हैं, इसके फैलाव के गति पकड़ लेने के कारण 17 लाख लोग अपनी जान से हाथ धो सकते हैं। इस रविवार यानी कल, 22 जनवरी से ‘द ईयर ऑफ द रैबिट’ शुरू हो रहा है। अधिकारियों का मानना है कि इस अवकाश काल में दो करोड़ से भी अधिक यात्राएं होंगी। आवाजाही की गतिविधियों पर नियंत्रण खत्म होने से चीन में यात्रा सुविधाओं की मांग के दरवाजे पूरी तरह से खुल गए हैं और स्वास्थ्य अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि कोविड का फैलाव खास तौर से ग्रामीण इलाकों में नाटकीय रूप से बढ़ सकता है, जहां चिकित्सा सुविधाएं अपर्याप्त हैं और योग्य डॉक्टरों और नर्सों की तैनाती काफी कम है।
चीन की पश्चिम पर श्रेष्ठता के प्रमाणस्वरूप शून्य कोविड नीति की वकालत ही शी की एकमात्र नीति नहीं है, जिसे खारिज किया जा रहा है। तकनीकी कंपनियों पर जोर-शोर से हमला भी बंद कर दिया गया है और धमकियों की जगह सांत्वनाएं दी जा रही हैं। घरेलू व्यापार और विदेशी निवेश को बांधने वाली राज्य पर नियंत्रण की संहिता यानी शी की ‘सामान्य समृद्धि’ की बातें भी बंद हो चुकी हैं। पिछले हफ्ते देश की समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, प्रधानमंत्री ली केकियांग ने 'बाजार की ताकतों को मुश्किलों से उबरने और बाजारों की जैविकता बढ़ाने और सार्वजनिक सृजनात्मकता को बढ़ाने के लिए सुधार हेतु नीतियों को लागू करने के प्रयासों को रेखांकित किया।' इस तरह की बाजार समर्थक भाषा शी के चीन में दुर्लभ हो चुकी है।
संपत्ति व्यापार करने वाली कंपनियों से भी प्रतिबंध हटाए जा रहे हैं। देश के विशाल संपत्ति बुलबुले को फिर से फुलाने के प्रयासों के तहत डेवलपरों को पैसा भी दिया जा रहा है। अनुमानात्मक निवेश से बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य शुरू कर दिए गए हैं और संपत्ति को एक विशाल पोंजी स्कीम में बदला जा रहा है। इसे एक बार फिर प्रोत्साहित किया जा रहा है। शी के प्रमुख मंत्र-मकान रहने के लिए हैं, न कि सट्टा लगाने के लिए- को ताक पर रख दिया गया है। शून्य कोविड नीति से हुए नुकसान के बाद अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने के लिए यह सब एक रणनीतिक प्रयास हो सकता है, लेकिन चीन पर नजर रखने वालों के लिए यह चर्चा का सबब बन गया है। चीनी विश्लेषक दिमौन ल्यू कहते हैं कि 'वे टूट-फूट गए हैं। उनका पद तो उनके पास है, लेकिन अधिकार और प्रतिष्ठा अब नहीं है।' जे. कैपिटल रिसर्च की सह संस्थापक और 25 साल से अधिक समय तक चीन में रह चुकी ऐन स्टीवेंसन यांग का मानना है कि शी के खिलाफ एक अंदरूनी विद्रोह है और उन्हें चुपचाप किनारे किया जा रहा है। उनकी सभी प्रमुख नीतियों को 180 डिग्री पीछे कर दिया गया है।
पिछले सप्ताह चीन की आक्रामक 'वुल्फ वारियर डिप्लोमेसी' के सार्वजनिक चेहरे झाओ लिजियान को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता पद से हटाकर सीमा विवादों को देखने का काम सौंप दिया गया। उन्होंने अपने पद का उपयोग विदेशी डर की धारा बहाने और षड्यंत्र की फर्जी कहानियां चलाते हुए पश्चिमी सोशल मीडिया को प्रभावित करने के लिए किया था। कोविड नियंत्रणों से आजाद होकर नए साल में घर लौट रहे चीनी लोग उत्सव के दौरान प्रतिबंधों को झेलने के मूड में बिल्कुल नहीं हैं। पटाखों पर कम्युनिस्ट पार्टी के प्रतिबंध को जनसामान्य की अवज्ञा का सामना करना पड़ रहा है। कहीं-कहीं जनता की पुलिस से झड़पें भी हो रही हैं। हेन्नान प्रांत के वीडियो में प्रतिबंध लागू कर रहे पुलिसकर्मियों की कार पर प्रदर्शनकारी हमला करते दिखाई दे रहे हैं।
जीरो कोविड प्रतिबंधों को लागू करने वाले उत्साही कर्मचारियों को आनन-फानन में हटा लिए जाने से भी कई विरोध प्रदर्शनों को बढ़ावा मिला है। दक्षिण पश्चिमी शहर चोंगकिंग के टेस्ट किट बनाने वाले कारखाने के कर्मचारियों की पुलिस से तब झड़प हो गई, जब वे अपनी मजदूरी के भुगतान और एकाएक काम बंद करने के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। सोशल मीडिया पर चल रहे वीडियो में गुस्साए कर्मचारी मशीनों को तोड़ते और उपकरणों को फेंकते नजर आ रहे हैं। बहरहाल, एक कमजोर शी जिनपिंग अपने नेतृत्व के खिलाफ विरोधों का सामना कर रहे हैं। देखना यह है कि वह अपने ही देश में इस चुनौती का सामना किस तरह करते हैं। बाहरी दुनिया में तो उनके क्रियाकलापों और तौर-तरीकों के खिलाफ अच्छा-खासा विरोधपूर्ण रवैया है ही। आगे आगे देखिए होता है क्या...।