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मनोविज्ञान: हाथ भी बातें करते हैं...सोचने और महसूस करने पर भी असर, मनुष्य को भी मिलती है संतुष्टी
Sun, 07 Apr 2024 05:58 AM IST
यशोधन शर्मा
मर्खेम हीड न्यूयॉर्क टाइम्स
मर्खेम हीड न्यूयॉर्क टाइम्स
Published by: यशोधन शर्मा
Updated Sun, 07 Apr 2024 05:58 AM IST
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विस्तार
अपने हाथों को कम मत समझिए। पृथ्वी पर किसी भी अन्य प्राणी, यहां तक कि मानव के निकटतम प्राइमेट रिश्तेदारों के हाथ भी हमारे जैसे नहीं हैं, जो इतनी सटीक पकड़ और हेरफेर करने में सक्षम हों। यह दीगर बात है कि पहले के समय की तुलना में आज हम अपने हाथों से कम जटिल कार्य कर रहे हैं। पर क्या आप जानते हैं कि हाथों से कम, जटिल काम करते रहने का हमारे सोचने और महसूस करने पर भी असर पड़ता है? वर्जीनिया की एक यूनिवर्सिटी में व्यावहारिक मनोविज्ञान की प्रोफेसर डॉ. लैंबर्ट का कहना है कि जब हम किसी चीज के लिए प्रयास करते हैं, और वह चीज हमें मिलती है, तो दोनों के बीच एक संबंध होता है। वह यह भी मानती हैं कि अपने हाथों से काम करना मनुष्य को अद्वितीय रूप से संतुष्टि दे सकता है।
जानवरों पर किए गए एक शोध में भी यह बात सामने आई है कि जो चूहे भोजन खोदने के लिए अपने पंजों का इस्तेमाल करते हैं, उनमें तनाव झेलने की क्षमता दूसरे चूहों से ज्यादा होती है। डॉ लैबर्ट इस शोध के निष्कर्षों की तुलना मनुष्यों पर किए अध्ययनों से करती हैं। उन्होंने पाया कि बुनाई, बागवानी और रंग भरने जैसे काम करने वालों को संज्ञानात्मक और भावनात्मक लाभ होता है, जिससे याददाश्त भी अच्छी रहती है। कनाडा की ब्रिटिश कोलंबिया यूनिवर्सिटी में ऑक्युपेशनल थेरेपी की प्रोफेसर कैथरीन बेकमैन कहती हैं कि कढ़ाई जैसे कामों में दोहराव तो होता है, पर बार-बार एक ही चीज करने से इसके प्रभान 'ध्यान' करने जैसे होते हैं।
नौवें की एक यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान की प्रोफेसर ऑड्रे वॉन डेर मोर के अनुसार, हाथ से लिखने के फायदे कंप्यूटर पर टाइप करने से कहीं ज्यादा होते हैं। प्रोफेसर डॉ. रस्टी गेज कहती हैं कि हाथ से की गई क्रियाएं मस्तिष्क में नई कोशिकाओं के विकास में सहायक होती हैं। उनके अनुसार, जब आप कोई जटिल काम करते हैं, जिसमें निर्णय लेना और योजना बनाना शामिल होता है, तब यह काफी मायने रखता है कि आप अपने हाथों का उपयोग कर रहे हैं या नहीं। जैसे, जब आप बागवानी, हस्तशिल्प, चित्रकेला करते या फिर वाद्ययंत्र बजाते हैं, आपके हाथ और दिमाग एक आदर्श तालमेल दिखाते हैं। वह कहती हैं कि यह दुनिया त्रिआगामी है और ऐसे हाथ व दिमाग के तालमेल वाले रचनात्मक कार्यों की मदद से आप दुनिया से उसकी ही भाषा में बात कर सकते हैं।