हताशा से उबारने का वायदा
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यह ध्यान देने वाली बात है कि 2014 के लोकसभा चुनाव आर्थिक मुद्दों पर लड़े जा रहे हैं। बढ़ती महंगाई और अपनी ही संतानों की बेरोजगारी से त्रस्त देश के नागरिकों के पास बयां करने के लिए खुद अपने बेहाल जीवन की कहानी है। अर्थव्यवस्था की बदहाली ने लोगों की कमर तोड़कर रख दी है। चारों ओर कांग्रेस के नेतृत्व्ा वाली सरकार की नाकामयाबियों की चर्चा हो रही है। लोग यह समझ चुके हैं कि कांग्रेस का दामन छोड़ने का वक्त आ गया है और अब अहंकार से लबरेज उसका कुशासन नाकाबिले बर्दाश्त है। कुछ ऐसी ही पृष्ठभूमि में भारतीय जनता पार्टी ने अपना घोषणापत्र जारी किया, जिसमें अर्थव्यवस्था के त्वरित पुनरुद्धार की वकालत की गई है।
यह घोषणापत्र पार्टी की प्रतिबद्धता का ऐसा दस्तावेज है, जिसमें योजनाओं के क्रियान्वयन के तरीके भी सुझाए गए हैं। इनमें से कुछ तो बिल्कुल अनूठे हैं, वहीं ज्यादातर मामलों में तकनीक और मानवीय संसाधनों के सर्वोत्तम उपयोग से योजनाओं को जमीनी स्तर पर उतारने की बात कही गई है। हालांकि विशेष ध्यान अर्थव्यवस्था के पुनर्स्थापन पर रखा गया है, ताकि इसे रोजगार-केंद्रित बनाया जा सके। किसी भी तरह के शब्दाडंम्बर से बचते हुए घोषणापत्र में सबसे जरूरी माने जा रहे रोजगार निर्माण के तीन तरीकों पर जोर दिया गया है। इसमें रोजगार कार्यालयों को करियर सेंटर में बदलने की बात भी शामिल है।
परंपरागत तौर पर भारत में कृषि व इससे जुड़ी गतिविधियों और खुदरा क्षेत्र में रोजगार पैदा होते रहे हैं। ज्यादा राशि के आवंटन और बेहतर मार्केटिंग व नेटवर्किंग के जरिये इन क्षेत्रों का कायाकल्प करने से, इनमें रोजगारों के ज्यादा अवसरों के पैदा होने की उम्मीद की जा सकेगी। ऐसा करने के दौरान देश के 100 सबसे पिछड़े जिलों पर फोकस किया जाएगा, ताकि प्राथमिकता के स्तर पर एकीकृत विकास के जरिये इन्हें देश के बाकी जिलों के बराबर लाया जा सके। एक एग्री-रेल नेटवर्क स्थापित किया जाएगा। दूध और सब्जियों जैसे जल्दी खराब होने वाले कृषि उत्पादों को ले जाने के लिए रेल की स्पेशल बोगियां तैयार की जाएंगी। हम कृषि और ग्रामीण विकास में सार्वजनिक निवेश को बढ़ाएंगे। शहरी निर्धनों के कौशल विकास पर जोर दिया जाएगा, ताकि वे भी नए मौकों का फायदा उठा सकें। फिलहाल हालत यह है कि स्थायित्व न होने की वजह से लोग कृषि और खुदरा व्यापार से उकता रहे हैं।
दूसरा, श्रम आधारित और लागत प्रतिस्पर्धी विनिर्माण उद्योगों, इलेक्ट्रिकल व इलेक्ट्रॉनिक एसेंबलिंग यूनिटों, टेक्सटाइल और फुटवियर जैसे उद्योगों के उन्नयन पर खासा जोर होगा। पर्यटन को अम्ब्रेला क्षेत्र की तरह विकसित किया जाएगा, जिसके तले परिवहन, यात्रा, हॉस्पिटैलिटी, केटरिंग और रिटेल व्यापार जैसे क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों को पैदा करने पर जोर होगा।
तीसरा, अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार की तरह इस बार भी आधारभूत ढांचे को मजबूत बनाने पर जोर दिया जाएगा। इसका फायदा देश भर में सीमेंट, इस्पात, परिवहन और रोजगार निर्माण जैसे क्षेत्रों में महसूस किया जा सकेगा। हम एक डायमंड चतुर्भुज परियोजना की भी शुरुआत करेंगे। इसके तहत देश में हाई स्पीड बुलेट ट्रेनों का एक नेटवर्क स्थापित किया जाएगा। इसके अलावा हम बंदरगाह विकास पर आधारित आर्थिक मॉडल्ा की नींव रखेंगे। इसमें एक ओर वर्तमान बंदरगाहों का आधुनिकीकरण किया जाएगा, तो दूसरी ओर नए पत्तनों के विकास के जरिये सागरमाला परियोजना के सिलसिले को आगे बढ़ाया जाएगा। बेहतर बुनियादी सुविधाएं छोटे-बड़े, स्थानीय-विदेशी, सभी तरह के निवेशों के लिए नई संभावनाओं के दरवाजे खोलती हैं।
इतना ही नहीं, उद्योगों में सिंगल विंडो मंजूरियों की सुविधा होगी। पर्यावरणीय मंजूरियां पारदर्शी और समयबद्ध होंगी। छोटे और मझोले उद्योगों को नया जीवन देने के लिए एक टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा। ऐसे उद्योगों में रोजगार सृजन की प्रचुर संभावनाओं के मद्देनजर इनके आधुनिकीकरण के लिए औपचारिक ऋण और तकनीक की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा 'जीरो डिफेक्ट' नजरिये पर जोर होगा, ताकि 'ब्रांड इंडिया' के लिए विनिर्माण हो सके। व्यापार और तकनीकी के क्षेत्र में हमारे देश की महान संस्कृति रही है। इसे ध्यान में रखते हुए घोषणापत्र में नवप्रवर्तन के लिए अनुसंधान और विकास के लिए एक बेहतर माहौल तैयार करने पर जोर दिया गया है।
लगातार बढ़ते मूल्यों पर लगाम लगाने के लिए कई उपायों का उल्लेख घोषणापत्र में है। भारतीय खाद्य निगम के काम करने की शैली में सुधार लाया जाएगा। कड़े मापदंडों और विशेष्ा अदालतों के जरिये कालाबाजारी पर अंकुश लगाया जा सकेगा। एक एकल राष्ट्रीय कृषिगत बाजार की स्थापना होगी। इससे उपभोक्ता और उत्पादक, दोनों को लाभ मिलेगा। विपरीत हालात से जूझते किसानों की मदद के लिए मूल्य स्थायित्व कोष का गठन होगा। राष्ट्रीय विकास परिषद और अंतरराज्यीय परिषद में जरूरी सुधार किए जाएंगे, ताकि ये राष्ट्र निर्माण की भूमिका निभा सकें।
केंद्र से लेकर पंचायतों तक के लिए राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना शुरू की जाएगी, ताकि पारदर्शिता को सुशासन का जरूरी हिस्सा बनाया जा सके। अनुसूचित जाति/ जनजाति, पिछड़ा वर्ग और समाज के दूसरे कमजोर वर्गों को आईटी आधारित विकास के दायरे में लाने पर जोर रहेगा। लगातार बढ़ते भ्रष्टाचार के चलते पिछले दस वर्षों में लोगों का सरकार पर से भरोसा उठा है। भारत की क्षमता पर फिर से भरोसा जगाना ही हमारा प्रमुख उद्देश्य है।
(लेखिका भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं)