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क्रिकेट में भूचाल लाने की तैयारी
धर्मेंद्रपाल सिंह
Updated Mon, 17 Aug 2015 08:11 PM IST
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एक ओर आईपीएल के पूर्व कमिश्नर ललित मोदी के कारण संसद ठप रही। दूसरी तरफ वह क्रिकेट की दुनिया में भूचाल लाने की तैयारी में जुटे हैं। प्रवर्तन निदेशालय के गिरफ्तारी वारंट से बेपरवाह ललित मोदी ने आईसीसी के समानांतर एक अलग क्रिकेट संगठन खड़ा करने की घोषणा की है। इसके झंडे तले टेस्ट मैच और बीस-बीस ओवर के मैच ही होंगे।
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कुछ दिनों पहले एस्सल ग्रुप के मालिक सुभाष चंद्र ने क्रिकेट को विस्तार देने के नाम पर नया संगठन खड़ा करने का संकेत दिया था, जिससे बीसीसीआई और आईसीसी के आका परेशान थे। मोदी ने नया बम फोड़कर उनकी रही-सही नींद उड़ा दी है। कयास लगाए जा रहे हैं कि मोदी और सुभाष चंद्र की योजनाओं के तार आपस में जुड़े हैं। सुभाष चंद्र वही हैं, जिनकी पहल पर आठ साल पहले पूर्व कप्तान कपिल देव ने धूम-धड़ाके के साथ इंडियन क्रिकेट लीग (आईसीएल) शुरू की थी। जवाब में ललित मोदी की बात मानकर बोर्ड ने इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) को खड़ा किया। सात साल के भीतर आईपीएल की ब्रांड वैल्यू तीन अरब डॉलर (लगभग 18.30 खरब रुपये) हो चुकी है।
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भारत के कारण क्रिकेट अरबों रुपये का व्यापार बन चुका है। फीफा के बाद बीसीसीआई विश्व का सबसे अमीर खेल संगठन है। पिछले साल बीसीसीआई ने अपनी बैलेंस शीट में 364 करोड़ रुपये अतिरिक्त घोषित किए थे। वर्ष 2000 में टीवी प्रसारण अधिकार बेचने से हुए मुनाफे से बोर्ड ने अपनी हर इकाई को 4.76 लाख डॉलर (करीब 2.8 करोड़ रुपये) दिए, जबकि 2010 में यह रकम बारह गुना से अधिक बढ़कर 66 लाख डॉलर (करीब 40 करोड़ रुपये) हो गई। फिलहाल पूरी दुनिया में क्रिकेट से होने वाली कमाई का 70 फीसदी पैसा अकेले हमारे देश से मिलता है, इसीलिए आईसीसी को भारत की मुट्ठी में माना जाता है।
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पुरानी गलतियों से सबक सीख सुभाष चंद्र इस बार फूंक-फूंककर कदम उठा रहे हैं। बीसीसीआई और आईसीसी के कोप से बचने के लिए ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और स्कॉटलैंड में समानांतर क्रिकेट बोर्ड गठित कर दिए गए हैं। खिलाड़ियों को साथ जोड़ने के लिए मोटे पैसे का लालच दिया जा रहा है। दुनिया के मात्र दस देशों को टेस्ट मैच खेलने का अधिकार है, जिनमें से आधे के क्रिकेट बोर्ड घोर वित्तीय संकट से गुजर रहे हैं। इसलिए वहां से खिलाड़ियों को जोड़ने में ज्यादा कठिनाई नहीं आएगी। हां, भारत से अच्छे खिलाड़ी तोड़ना मुश्किल होगा।
पिछले पांच दशक में पूरी दुनिया में खेल प्रतियोगिताओं की मानो बाढ़ आ गई है। साथ-साथ सट्टेबाजी का धंधा भी जोरों से पनपा है। टेलीविजन, इंटरनेट और मोबाइल की मदद से सट्टा खेलना बहुत आसान हो गया है। वर्ल्ड एंटी डोपिंग एजेंसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के 25 फीसदी खेलों पर संगठित अपराधी गिरोहों का कब्जा है। सट्टा बाजार का 90 प्रतिशत कारोबार गैरकानूनी है। इसमें मैच फिक्सिंग जैसा अनैतिक धंधा भी शामिल है। बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष एन श्रीनिवासन के दामाद गुरुनाथ मयप्पन और राजस्थान रॉयल्स के मालिक राज कुंद्रा के नाम पर तो काफी पहले कालिख पुत चुकी है। अब यदि ललित मोदी और सुभाष चंद्र की योजना सिरे चढ़ गई, तब देश में कानून के रखवालों का सिरदर्द और बढ़ जाएगा।