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दूसरा पहलू: महाकुंभ, पर्यावरण और सनातनी समाधान... उम्मीद है थैला और थाली अभियान परिवारों तक पहुंचेगा

Mon, 20 Jan 2025 06:37 AM IST
दीपक कुमार शर्मा विवेक एस अग्रवाल
विवेक एस अग्रवाल Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Mon, 20 Jan 2025 06:37 AM IST
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सार
महाकुंभ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का ‘एक थैला-एक थाली’ अभियान पर्यावरण संरक्षण में अहम योगदान दे रहा है। प्रयागराज महाकुंभ में अपनाए जाने वाले पर्यावरण सम्मत अभिनव अनुष्ठानों की मिसाल दुनिया में आने वाली कई सदियों तक दी जाएगी।
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Prayagraj Maha Kumbh environment and Sanatani solutions hope families will accept RSS bag and plate campaign
प्रयागराज महाकुंभ में आरएसएस ने की लंगर व्यवस्था - फोटो : वीडियो ग्रैब/एएनआई

विस्तार

यह महाकुंभ अनेकानेक मायनों में अद्वितीय और अनुकरणीय भी है। इसके तमाम पक्षों में जहां प्रबंधन, सुरक्षा, विशालता, भव्यता इत्यादि की हर ओर चर्चा है, वहीं यहां अपनाए जाने वाले पर्यावरण सम्मत अभिनव अनुष्ठानों की मिसाल भी दुनिया में आने वाले कई वर्षों या सदियों तक दी जाएगी। इन नवाचारों का उद्देश्य यह है कि विश्व के सबसे बड़े समागम में सूखे एवं गीले कचरे के साथ-साथ किसी भी प्रकार के तरल कचरे की या तो उत्पत्ति ही न हो और यदि हो, तो उसका समुचित निराकरण भी किया जाए।



महाकुंभ में आ रहे करोड़ों लोगों में कुछ तो पूरी अवधि के लिए यहां रुके हैं, तो कुछ एक या दो दिन के लिए। मिसाल के तौर पर अगर यह माना जाए कि 40 करोड़ लोग मात्र एक दिन के लिए महाकुंभ में आए हुए हैं, तो वे औसतन 250 ग्राम प्रति व्यक्ति कचरा उत्पन्न करेंगे। पूरे आयोजन के दौरान लगभग एक लाख मीट्रिक टन कचरा उत्पन्न होगा, जो कि यह कचरा प्रयागराज में सृजित होने वाले छह से आठ माह के कुल कचरा उत्पादन के बराबर है। इस आयोजन के कचरे को एकत्र करने के लिए जहां विपुल संसाधनों की आवश्यकता रहेगी, वहीं इसका निष्पादन करने के लिए भी कम से कम दो लाख वर्ग मीटर जमीन की आवश्यकता होगी। यह ज्ञात तथ्य है कि कचरे का एकत्रीकरण, परिवहन और निष्पादन सभी स्तरों पर अपरिमित कार्बन उत्सर्जन करता है, जो कि मानवता के लिए खतरा भी है। लेकिन इस बार का पर्यावरणसम्मत महाकुंभ विश्व को भारत की स्वच्छता की दृष्टि से सनातनी परंपरा की व्यापकता के रूप में पुख्ता जवाब देगा।




महाकुंभ के दौरान अनेकानेक नवाचारों में सर्वाधिक प्रभावशील राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा संपूर्ण राष्ट्र में छेड़ा गया ‘एक थैला-एक थाली’ अभियान है, जिसके माध्यम से यह आह्वान किया गया कि प्रत्येक तीर्थयात्री अपने साथ एक कपड़े का थैला और एक स्टील की थाली अवश्य लाए, ताकि एकबारगी उपयोग होने वाले प्लास्टिक को प्रभावी तौर पर नकारा जा सके। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा पूरे राष्ट्र में जहां समस्त तीर्थयात्रियों तक अधिक से अधिक थैला और थाली वितरण का लक्ष्य रखा है, वहीं इस संदेश को आमजन तक पहुंचाने के लिए घर-घर से थैला और थाली एकत्रित भी की गई है, ताकि उसकी महत्ता को योगदान देने वाले परिवार और स्वीकार्य करने वाले परिवार दोनों के मध्य बराबरी से समझा जा सके। उम्मीद है कि थैला और थाली अभियान  महाकुंभ तक ही सीमित नहीं रहेगा, अपितु यह एक संदेश और महत्वपूर्ण अवयव के रूप में परिवारों तक पहुंचेगा, जो इसे अपने व्यवहार में अपनाने के लिए प्रेरित होंगे।

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