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नेता बदलेंगे, तभी आएंगे अच्छे दिन

Sun, 04 Jan 2015 07:18 PM IST
तवलीन सिंह
तवलीन सिंह Updated Sun, 04 Jan 2015 07:18 PM IST
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Politician change, then good days would come

नववर्ष के प्रारंभिक दिनों में लोग अक्सर दुआ करते हैं कि आने वाले दिन अच्छे हों, सो इस दुआ से शुरू करती हूं मैं भी इस साल का यह पहला लेख। इस वर्ष अच्छे दिनों का मतलब और ही है, क्योंकि अच्छे दिनों का वायदा कर नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनाव में आम लोगों का दिल जीता था। कांग्रेस के हारे हुए नेता और वामपंथी सेक्यूलरवादी चाहे जो भी कहें, कुछ हद तक मोदी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद अच्छे दिनों की उम्मीदें पूरी भी की हैं। मेरी नजरों में सबसे बड़ा फर्क यह आया है कि निराशा, जो पिछले कुछ वर्षों में देश भर में फैल चुकी थी, कम हो गई है।

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स्वच्छ भारत अभियान का असर दिखने लग गया है समुद्र के किनारे के छोटे-से गांव में भी, जहां से यह लेख आपके पास आ रहा है। माना कि पड़ोसी गांव का प्रधान आज भी हमारे गांव में चुपके से अपने गांव का कूड़ा फिंकवाता है, लेकिन अब जब हम स्वच्छ भारत अभियान की याद दिलाते हैं उसे, तो उसकी आंखों में शर्म दिखती है। और 2014 की अंतिम शाम जब मैं समुद्र किनारे बैठकर जाते वर्ष के आखिरी सूर्यास्त का मजा ले रही थी, तो यह भी देखने को मिला कि पर्यटकों की भीड़ होने के बावजूद समुद्र तट उतना गंदा नहीं था, जितना हुआ करता था। साथ वाले मछुआरों के गांव में कुछ हद तक सफाई दिखने लग गई है, पर आज भी शौचालयों के अभाव में लोग समुद्र तट पर शौच करते हैं। पुरानी आदतों को बदलना मुश्किल होता है, पर इतना तो है कि प्रधानमंत्री खुद इन पर ध्यान दिलाते हैं।
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मोदी कई बार कह चुके हैं कि उनका कोई बड़ा 'विजन' नहीं है देश के लिए। वह कई ऐसी छोटी-छोटी चीजें करना चाहते हैं, जिनसे अपने इस गरीब, बेहाल भारत देश में बड़ा फर्क आ सके। इस लक्ष्य को सामने रखकर उन्होंने जब कुछ महीने पहले वाराणसी के जयापुर गांव को गोद लिया था, तब ऐसा भाषण दिया वहां जाकर, जिनमें छोटी-छोटी बातों में छिपे थे कई बड़े-बड़े विचार। अफसोस कि उनके इस अति महत्वपूर्ण भाषण को हम मीडिया वाले समझ नहीं सके। वहां भ्रूणहत्या का विरोध करते हुए उन्होंने कहा था कि बेटियों को अगर उनकी मां की कोख में ही मार डाला जाए, तो कैसे चलेगा संसार का चक्र। पर्यावरण की सुरक्षा की तरफ ध्यान दिलाया उन्होंने यह कहते हुए, कि जब भी गांव में बेटी जन्म ले, तो उसके मां-बाप को एक या दो वृक्ष उसके नाम से लगाना चाहिए। उन्होंने गांववालों को बेटियों के जन्म पर उत्सव मनाने को भी कहा।
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अच्छे दिन तभी आएंगे भारत में, जब समाज में हर तरह का बदलाव आएगा, पर उतना ही जरूरी है, राजनीति में परिवर्तन लाना। उम्मीद हम जैसे राजनीतिक पंडितों में थी कि मोदी के मंत्री और मुख्यमंत्री नए सिरे से अपनी भूमिका निभाया करेंगे, लेकिन अभी तक यह परिवर्तन नहीं आया है। मेरे गांव के पास मंडवा बंदर में जब सरकार के आला राजनेता आते हैं, तो वही शान दिखाते हैं, वही अकड़ और वही नखरे।


अच्छे दिन तब आएंगे अपने देश में, जब जनप्रतिनिधियों और आला अधिकारियों को एहसास दिलाया जाए कि वे जनता के सेवक हैं। लेकिन लगता है कि प्रधानमंत्री की इस भावना की अहमियत उनके साथी अभी तक समझ नहीं पाए हैं। इसलिए दुआ कीजिए मेरे साथ, कि 2015 में ऐसा राजनीतिक परिवर्तन आए कि हमारे जनप्रतिनिधियों को जल्दी ही समझ आए कि वे राजनीति में आए हैं जनता की सेवा करने, राज करने नहीं।

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