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निशाने पर पोलियो टीम

Mon, 26 Mar 2018 05:44 PM IST
कुलदीप तलवार
कुलदीप तलवार Updated Mon, 26 Mar 2018 05:44 PM IST
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Polio team on target
कुलदीप तलवार
हाल ही में अफगानिस्तान सीमा से सटे पाकिस्तान के आदिवासी बहुल इलाके सफी तहसील में आतंकियों ने पोलियो की दवा पिलाने गई सात सदस्यों की टीम के दो सदस्यों को मार गिराया, वहीं तीन को बंधक बना लिया। दो लोग आतंकियों के चंगुल से बच निकले। पाकिस्तान में पोलियो टीम पर यह पहला हमला नहीं है।

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पिछले महीने कराची के एक स्कूल में बच्चों को पोलियो की दवा पिलाने गई एक टीम पर स्कूल प्रशासन ने ही हमला किया था। विगत जनवरी में बलूचिस्तान में कट्टरपंथियों ने क्वेटा में पोलियो टीम में शामिल एक महिला और उसकी बेटी की तथा पंजाब के स्यालकोट में पोलियो टीम की दो महिला की गोली मारकर हत्या कर दी थी।

पाकिस्तान में ओसामा बिन लादेन की तलाश करने के लिए अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए ने पोलियो टीकाकरण की जो जाली मुहिम शुरू की थी, उसके कारण वहां पोलियो की दवा पिलाने का विरोध शुरू हो गया था, जो अब काफी बढ़ गया है। पोलियो अभियान रोकने के लिए कट्टरपंथियों ने विदेशी संस्थाओं के कई कर्मचारियों का अपहरण व हत्याएं की हैं। उनका कहना है कि यह अभियान उनकी जासूसी के लिए है।

कई कट्टरपंथी संगठनों ने यह भी अफवाह फैला रखी है कि पोलियों की दवा पिलाने वाली टीमें इसके जरिये बच्चों को नपुंसक बना रही हैं। जबकि अभियान के समर्थक कहते हैं कि ये हत्याएं पाकिस्तान को ‘पोलियो मुक्त’ बनाने से रोकने की साजिश है। पाकिस्तान उन तीन देशों में एक है, जहां पोलियो एक बड़ी समस्या है। दो अन्य देश हैं-अफगानिस्तान और नाइजीरिया। वहां पिछले बीस साल में हजारों बच्चे पोलियो का शिकार हुए हैं। फिर भी कट्टरपंथी इस अभियान में बाधा डाल रहे हैं। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने एक ताजा रिपोर्ट में ऐसे लोगों के लापता होने पर रोष प्रकट करते हुए कहा है कि ऐसे मामलों में अदालत में कोई आरोप पत्र भी दायर नहीं किया गया।

हालांकि पोलियो टीम पर हमले का पाकिस्तान में विरोध भी हो रहा है। उदारवादी इमामों के संगठन पाकिस्तान उलेमा परिषद के प्रमुख ताहिर अशरफी कह चुके हैं कि हमारे देश की परंपरा तथा इस्लाम, दोनों इन घटनाओं का विरोध करते हैं।

लाहौर के सबसे बड़े मदरसे जामिया मंजूर इस्लामिया के मौलाना अब्दुल फारूक का भी मानना है कि ऐसे हत्यारे मुसलमान अथवा इंसान कहलाने के काबिल नहीं है। उलेमा ने मस्जिदों में पोलियो टीम के कार्यकर्ताओं की हत्याओं को शहादत माना, शहीदों के लिए प्रार्थना की गई जुम्मे की नमाज के बाद दुआएं भी पढ़ी गईं। पर कट्टरपंथी विरोध की परवाह नहीं कर रहे, और न केवल पाकिस्तान में, बल्कि अफगानिस्तान में भी पोलियो टीम पर हमले कर रहे हैं।

अफगानिस्तान में कुछ दिन पहले ही पोलियो के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा अभियान शुरू किया गया है, जिसमें सत्तर हजार कर्मचारी हिस्सा ले रहे हैं और सभी 41 जिलों में घर-घर जाकर करीब एक करोड़ बच्चों को पोलियो की दवा पिलाने के लिए तैनात हैं। पर वे भी कट्टरपंथियों के निशाने पर हैं। उन सुरक्षाकर्मियों को भी निशाना बनाया जा रहा है, जो पोलियो टीम की सुरक्षा के लिए तैनात किए गए हैं। आतंकियों की कोशिश है कि विदेशी संस्थाएं अफगानिस्तान छोड़कर चले जाएं। 

वैसे पाकिस्तान सरकार भी पोलियो के विरोधी कट्टरपंथियों पर शिकंजा कसने से परहेज कर रही है। आम ख्याल यह है कि आईएसआई ऐसे कट्टरपंथियों का इस्तेमाल अपने हित में तथा भारत व अफगानिस्तान के खिलाफ कर रही है।
 
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