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ध्रुवीकरण भी तेज होगा और आर्थिक उदारीकरण भी

Thu, 05 Jun 2014 06:56 PM IST
सीताराम येचुरी
सीताराम येचुरी Updated Thu, 05 Jun 2014 06:56 PM IST
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polarization and economic liberalisation will even sharper

नरेंद्र मोदी सरकार के आने के साथ ही संघ का असली एजेंडा दिखना शुरू हो गया है। पुणे में हिंदू राष्ट्र सेना से जुड़े कुछ लोगों ने एक मुस्लिम युवा की इस कारण पीट-पीटकर हत्या कर दी कि उसने फेसबुक पर भावनाओं को भड़काने वाली कथित आपत्तिजनक तस्वीरें जारी की थी। इससे पहले हिंदुत्ववादी संगठनों द्वारा प्रायोजित आतंकवादी हमलों के अनेक प्रकरणों में आरोपितों में एक और संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य इंद्रेश कुमार ने इन तमाम मामलों को बंद करने की मांग की है, जिनके सिलसिले में सीबीआई, एनआईए तथा एटीएस ने हिंदुत्ववादी संगठनों के कई नेताओं की गिरफ्तारियां की हैं।

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मंत्री पद संभालने के फौरन बाद प्रधानमंत्री कार्यालय में नए राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने संविधान के अनुच्छेद-370 को खत्म कराने की दिशा में काम करने का जो ऐलान किया था, उससे भी आशंकाएं पनपीं। इसी तरह धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षण आदि के मुद्दों पर भी नई सरकार ने रुख स्पष्ट कर दिया है। सामाजिक न्याय मंत्री थावरचंद गहलौत मीडिया को बता चुके हैं कि सरकार अल्पसंख्यकों के साढ़े चार फीसदी के उप-कोटे के खिलाफ है, क्योंकि यह धर्म पर आधारित आरक्षण है और असांविधानिक है। अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री नज्मा हेपतुल्ला ने भी कहा कि वह अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षण के खिलाफ हैं, क्योंकि कोटे की व्यवस्था प्रतिस्पर्धा की भावना को मार देती है। उनका यह भी कहना था कि मुसलमान तो अल्पसंख्यक हैं ही नहीं, क्योंकि उनकी आबादी बहुत बड़ी है।
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उन्हें बताने की जरूरत है कि मुस्लिमों को कभी उनकी संख्या के आधार पर नहीं, उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति के आधार पर देखा गया है। मुस्लिम अल्पसंख्यकों के आर्थिक व सामाजिक दर्जे पर न्यायमूर्ति राजिंदर सच्चर कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद, जिसने कई मानकों के आधार पर साबित किया था कि मुस्लिमों की दशा अनुसूचित जातियों-जनजातियों से भी खराब है, यूपीए सरकार ने न्यायमूर्ति रंगनाथ मिश्र आयोग का गठन किया था। उसकी सिफारिश के आधार पर ही सरकार ने मुस्लिमों के लिए साढ़े चार फीसदी का उप कोटा तय किया था। रंगनाथ मिश्र आयोग की रिपोर्ट के आधार पर ही पश्चिम बंगाल की पूर्व वाम मोर्चा सरकार ने राज्य के विभिन्न पिछड़े समूहों को अन्य पिछड़ा वर्ग में अधिसूचित किया था और अन्य पिछड़ा वर्ग के कोटे के दायरे में उनके लिए 10 फीसदी हिस्सा तय किया था।
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मोदी सरकार के शपथ ग्रहण से एक दिन पहले नमाज के लिए दी जानेवाली अजान पर प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए कर्नाटक के मंगलौर में विभिन्न हिंदुत्ववादी संगठनों ने एक विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया था। कर्नाटक के बीजापुर में भाजपा का एक जुलूस उसी समय सब्जी मंडी से गुजर रहा था, जब नई दिल्ली में शपथ ग्रहण समारोह चल रहा था। यह बाद में बाकायदा एक सांप्रदायिक दंगे में तब्दील हो गया, जिसमें कम से कम 15 लोग घायल हुए। शपथ ग्रहण की पूर्व संध्या पर अहमदाबाद के गोमतीपुरा क्षेत्र में सांप्रदायिक झगड़े हुए। यानी संघ और भाजपा के हिंदुत्व का एजेंडा देश के विभिन्न हिस्सों में अपना भयावह चेहरा चमकाने लगा है।


नई सरकार ने रक्षा उत्पादन में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा मौजूदा 26 फीसदी से बढ़ाने का संकेत दिया है। वाजपेयी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने ही सबसे पहले रक्षा उत्पादन के क्षेत्रों में एफडीआई की इजाजत दी थी। यानी शुरुआती संकेत बताते हैं कि नई सरकार के दौर में जहां सांप्रदायिक ध्रुवीकरण तेज होगा, वहीं और ज्यादा आर्थिक सुधार लागू किए जाने के चलते जनता पर अधिक बोझ डाले जाएंगे। दोहरे हमले का मुकाबला करने के लिए हमें तैयार रहना चाहिए।

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