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मुख्य राजनयिक के रूप में मोदी : पहली विदेश यात्रा के लिए भी छोटे-से पड़ोसी मुल्क-मालदीव को चुना
Mon, 17 Jun 2019 07:26 AM IST
Raman Singh
चिंतामणि महापात्र
चिंतामणि महापात्र
Published by: Raman Singh
Updated Mon, 17 Jun 2019 07:26 AM IST
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एससीओ में मोदी
- फोटो : a
अपने प्रधानमंत्री काल की शुरुआत से ही नरेंद्र मोदी भारत के प्रमुख राजनयिक के रूप में उभरे हैं। मई, 2019 में अगले पांच वर्षों के लिए सरकार चलाने के लिए बड़े पैमाने पर जनादेश मिलने के बाद भारत को वैश्विक मामलों में एक सम्माननीय, तेजी से विकसित और ताकतवर नेता के रूप में स्थापित करने का उनका उत्साह दोगुना हो गया है।
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2014 में प्रधानमंत्री पद के शपथ ग्रहण समारोह में सार्क देशों के शासनाध्यक्षों को आमंत्रित कर उन्होंने कूटनीति की दुनिया और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के इतिहास में एक हैरानी पैदा की थी। दूसरी बार जनादेश प्राप्त करने के बाद उन्होंने एक दूसरे क्षेत्रीय समूह (बिम्सटेक) के सदस्य देशों को शपथ ग्रहण समारोह में बुलाया, जिनमें कुछ दक्षिण एशियाई पड़ोसी भी शामिल थे। विदेशी आमंत्रितों की सूची में किर्गिस्तान के नेता भी शामिल थे, जिन्हें शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की शिखर बैठक की मेजबानी करनी थी।
अपने दूसरे कार्यकाल की पहली विदेश यात्रा के लिए भी मोदी ने छोटे-से पड़ोसी मुल्क-मालदीव को चुना, जो रणनीतिक रूप से एक महत्वपूर्ण देश है और जिसे भारत द्वारा एक टिकाऊ अर्थव्यवस्था, शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक शासन संरचना और समुद्री लुटेरों, आतंकवादियों और नशीले पदार्थों के तस्करों द्वारा उत्पन्न चुनौतियों के सामने अपनी सुरक्षा बनाए रखने के लिए सहायता प्रदान की जा सकती है।
मोदी की मालदीव यात्रा व्यापक रूप से सफल रही, जिससे न केवल उस देश में भारत के बारे में बनती नकारात्मक छवि पर रोक लगी, बल्कि दोनों देशों के बीच सुरक्षा संबंधों को भी मजबूती मिली। भारत मालदीव में रक्षा बलों के प्रशिक्षण केंद्र और तटीय निगरानी गतिविधियों में सहायता करेगा। कुछ समय के लिए ही सही, प्रधानमंत्री की श्रीलंका की यात्रा का विचार बहुत महत्वपूर्ण था।
चर्चों पर आतंकवादी हमले के कारण श्रीलंका ने न केवल पर्यटकों का, बल्कि संभावित निवेशकों का भी भरोसा खो दिया। प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा ने आश्वस्त किया कि उस द्वीपीय देश में कानून और व्यवस्था की स्थिति सामान्य है। यही नहीं, उस आतंकी हमले के बाद श्रीलंका में किसी भी विदेशी नेता की यह पहली यात्रा थी।
श्रीलंका की यात्रा के तुरंत बाद प्रधानमंत्री मोदी एससीओ (शंघाई सहयोग संगठन) के शिखर सम्मेलन में भागीदारी करने किर्गिस्तान चले गए। वहां उन्होंने शक्तिशाली अंतरराष्ट्रीय नेताओं के साथ मुलाकात की। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ उनकी द्विपक्षीय वार्ता हुई।