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थोड़ा इंतजार करो

Sun, 13 Sep 2015 07:15 PM IST
सहीराम
सहीराम Updated Sun, 13 Sep 2015 07:15 PM IST
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Please wait

देश को थोड़ा इंतजार करने दो। कोई आसमान नहीं टूटा जा रहा। कोई धरती नहीं फटी जा रही। ठीक है कि जीएसटी बिल पास होना है और सरकार उसके लिए संसद का संयुक्त सत्र बुलाने तक पर विचार कर रही है। यह भी ठीक है कि कांग्रेस उसकी इस कोशिश पर पानी फेरने की फिराक में है। ठीक है कि बिहार का चुनाव सिर पर है। वहां ताश के पत्तों की तरह दोनों टीमें अपने-अपने पैकेज फेंक रही हैं, जैसे तुरूप का पत्ता वही हो। ठीक है कि वहां गठबंधनों में दरार है। यह भी ठीक है कि इसी चुनाव से यह तय होगा कि देश की दिशा क्या होगी। पर अभी थोड़ा इंतजार करो।

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ठीक है कि रुपये की हालत खराब है। ठीक है कि शेयर बाजार की दुर्दशा है। ठीक है कि चीन दुनिया की अर्थव्यवस्था में भूचाल ले आया है। यह भी ठीक है कि अर्थव्यवस्था की स्थिति खराब होने से चिंतित प्रधानमंत्री ने इंडिया इंक की बैठक भी कर डाली। पर थोड़ा इंतजार करो। देश की राजनीति और अर्थव्यवस्था पर जरूर विचार होगा। चर्चा भी होगी, चिंताएं भी प्रकट की जाएंगी, आरोप-प्रत्यारोप भी होंगे। पर अभी थोड़ा इंतजार करो।
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अभी टीवी चैनलों पर इंद्राणी मुखर्जी का क्राइम थ्रिलर जारी है। अभी तो इसकी रोचकता को घूंट-घूंट पीने दो। प्राइम टाइम पर विशेष कार्यक्रम होने दो। टेलीविजन चैनलों के एक-एक सेकंड का इस्तेमाल होने दो। देखो, कहानी में कितना जबर्दस्त मोड़ आया है। मुंबई के पुलिस कमिश्नर का तबादला हो गया है और तबादले को इसी कहानी से जोड़कर देखा जा रहा है।
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अभी तक लोगों को लग रहा था कि यह विशुद्ध क्राइम थ्रिलर है। राजनीति से अघाए लोगों को इससे बड़ी राहत मिली थी। शेयर बाजार के पचड़े में न पड़ने वाले लोगों को इस कहानी में मजा आ रहा था। पर इस तबादले के साथ अब इसमें भी राजनीतिक एंगल आ गया है। अभी तो पता नहीं, कितने-कितने एंगल और आएंगे। फ्रॉड के, हवाला के, कर चोरी के। और ये सब एंगल तो बिना राजनीति के बनते ही नहीं। वैसे भी बंटी और बबली की कहानी बिना राजनीति के पूरी कैसे होगी! सो अभी थोड़ा इंतजार करो।

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