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अब तो चले आइए गुरुदेव
सुरजीत सिंह
Updated Thu, 04 Sep 2014 08:05 PM IST
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जब स्कूल में अनिवार्य रूप से प्रधानमंत्री का भाषण सुनाने का सर्कुलर आ गया है, तो हे गुरुदेव, आप भी दौड़े-दौड़े चले आए हैं। किस शिद्दत से इसके इंतजाम में जुटे हैं। टीवी, डिश, जनरेटर की व्यवस्था पूरी तन्मयता से कर रहे हैं। आपकी मेहनत देखकर लग रहा है कि अभी आप चुके नहीं हैं। हम उम्मीद करेंगे कि प्रधानमंत्री के भाषण के बाद भी आप नियमित रूप से स्कूल में दिखेंगे!
उम्मीद तो तब भी थी, जब चुनाव निपटे थे। चुनाव ड्यूटी से आपके लौट आने की राह तकते रहे हम। चुनाव के नतीजे आ गए, मगर आप नहीं आए। सरकार बदल गई, पर आप नहीं बदले। हम क्लास में हल्ला मचाते रहे इस उम्मीद से कि शोरगुल सुन कभी तो आएंगे आप। इससे पहले भी जनगणना में ड्यूटी की बात कहकर गए थे आप। फिर साल भर अता-पता न चला। एक दिन जब आबादी का नया आंकड़ा आया, तब आप ध्यान में आए।
वैसे आप जब स्कूल आते थे, तब भी क्लास में कहां तशरीफ लाते थे! या तो मिड डे मील का हिसाब भिड़ाते रहते या जरूरी डाक लेकर जिला मुख्यालय की ओर चल देते। लौटकर डाक आ जाती, आप न आते। टीचर्स ट्रेनिंग और बच्चों के बैंक खाते खुलवाने के नाम पर भी खूब नदारद होने का कौशल आता है आपको। चाइल्ड ट्रेकिंग सर्वे भी हमें तो लगता है, आपका एक बहाना ही है। वरना सर्वे के बाद आंकड़े जरूर आए, लेकिन बच्चे क्यों नहीं आए?
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जब सरकार से नामांकन बढ़ाने का निर्देश आता, तब आप बच्चों को डोर टू डोर ढूंढने के बहाने ऐसे गायब होते कि कोई जादूगर भी नहीं खोज पाता आपको। हां, पल्स पोलियो अभियान के दिन जरूर आप ईद के चांद की झलक दिखाते हैं! आपको कोई गुरु के दायित्व बोध याद दिलाए, तो आप इतर सरकारी कामों की दुहाई देने लगते हैं। यह आपका प्रिय अस्त्र है, जिससे आप अपने ऊपर उठे हर सवाल के जवाब में भांजने लगते हैं। फिर भी आपको शिक्षक दिवस की मुबारकबाद! उम्मीद है कि आप हमें पढ़ाने के लिए स्कूल में नियमित रूप से आएंगे।
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उम्मीद तो तब भी थी, जब चुनाव निपटे थे। चुनाव ड्यूटी से आपके लौट आने की राह तकते रहे हम। चुनाव के नतीजे आ गए, मगर आप नहीं आए। सरकार बदल गई, पर आप नहीं बदले। हम क्लास में हल्ला मचाते रहे इस उम्मीद से कि शोरगुल सुन कभी तो आएंगे आप। इससे पहले भी जनगणना में ड्यूटी की बात कहकर गए थे आप। फिर साल भर अता-पता न चला। एक दिन जब आबादी का नया आंकड़ा आया, तब आप ध्यान में आए।
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वैसे आप जब स्कूल आते थे, तब भी क्लास में कहां तशरीफ लाते थे! या तो मिड डे मील का हिसाब भिड़ाते रहते या जरूरी डाक लेकर जिला मुख्यालय की ओर चल देते। लौटकर डाक आ जाती, आप न आते। टीचर्स ट्रेनिंग और बच्चों के बैंक खाते खुलवाने के नाम पर भी खूब नदारद होने का कौशल आता है आपको। चाइल्ड ट्रेकिंग सर्वे भी हमें तो लगता है, आपका एक बहाना ही है। वरना सर्वे के बाद आंकड़े जरूर आए, लेकिन बच्चे क्यों नहीं आए?
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जब सरकार से नामांकन बढ़ाने का निर्देश आता, तब आप बच्चों को डोर टू डोर ढूंढने के बहाने ऐसे गायब होते कि कोई जादूगर भी नहीं खोज पाता आपको। हां, पल्स पोलियो अभियान के दिन जरूर आप ईद के चांद की झलक दिखाते हैं! आपको कोई गुरु के दायित्व बोध याद दिलाए, तो आप इतर सरकारी कामों की दुहाई देने लगते हैं। यह आपका प्रिय अस्त्र है, जिससे आप अपने ऊपर उठे हर सवाल के जवाब में भांजने लगते हैं। फिर भी आपको शिक्षक दिवस की मुबारकबाद! उम्मीद है कि आप हमें पढ़ाने के लिए स्कूल में नियमित रूप से आएंगे।