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रील्स के बढ़ते ट्रेंड के दौर में तस्वीरें

मुकुल श्रीवास्तव मुकुल श्रीवास्तव
Updated Tue, 13 Feb 2024 07:08 AM IST
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सार
रील्स जैसा ही एक और प्रारूप इंटरनेट पर सुर्खियां बटोर रहा है, वह है 'व्लॉगिंग'। ये दो अलग-अलग डिजिटल मीडिया प्रारूप हैं, जिनका उपयोग वीडियो बनाने और साझा करने के लिए किया जाता है, जिनके कारण तस्वीरों की लोकप्रियता में कमी आ रही है।
 
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Photos in the growing trend of reels
इंटरनेट - फोटो : getty

विस्तार

इंटरनेट के आने से पहले की दुनिया में बदलाव की गति धीमी थी। पर अब यह प्रक्रिया इतनी तेज है कि नया द्रुत गति से पुराना हो रहा है। सोशल मीडिया के आने के बाद लोगों ने अपनी बात कहने के लिए ब्लॉग पोस्ट और तस्वीरों को जरिया बनाया, फिर वीडियो और ऑडियो सामग्री की धूम मची, पर तस्वीरें या फोटोग्राफ मांग में लगातार बने रहे। ये तस्वीरों का ही कमाल था, जिसने मोबाइल से अपनी खुद की तस्वीरें लेने की कला 'सेल्फी' को विकसित किया और देखते-देखते सारी दुनिया में छा गई। लेकिन इंटरनेट पर रील्स की बढ़ती लोकप्रियता ने इन तस्वीरों की लोकप्रियता खत्म तो नहीं की, पर कम जरूर कर दी है।



रील्स जैसा ही एक और प्रारूप इंटरनेट पर सुर्खियां बटोर रहा है, वह है 'व्लॉगिंग'। ये दो अलग-अलग डिजिटल मीडिया प्रारूप हैं, जिनका उपयोग वीडियो बनाने और साझा करने के लिए किया जाता है, जिनके कारण तस्वीरों की लोकप्रियता में कमी आ रही है। व्लॉगिंग का मतलब होता है कि व्यक्तिगत अनुभवों, ज्ञान, कला, साहित्य, यात्राओं आदि को वीडियो के माध्यम से साझा करना। इनकी अवधि रील के मुकाबले ज्यादा होती है।


रील्स एक प्रकार की वीडियो सामग्री है, जो आमतौर पर एमएक्स शॉर्ट वीडियो, मौज, जोश, चिंगारी, मित्रों इंस्टाग्राम, यूट्यूब और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बनाई जाती हैं। हालांकि  ये विभिन्न विषयों पर छोटे-छोटे वीडियो होते हैं, जिन्हें संगीत, डायलॉग, आदि के साथ तस्वीरों और क्लिप्स मिलाकर बनाया जाता है। रील में गति होती है, जबकि तस्वीरों में अगर गति लानी भी है, तो रील्स का ही सहारा लेना पड़ेगा।

सोशल इनसाइडर के अनुसार, रील्स इंस्टाग्राम पर किसी भी अन्य सामग्री से दोगुनी पहुंच उत्पन्न करती हैं। रील्स की औसत पहुंच दर 30.81 फीसदी है, जबकि कैरोसल (ऐसी पोस्ट, जिसमें एक से अधिक फोटो या वीडियो हों, जिन्हें उपयोगकर्ता फोन ऐप के माध्यम से पोस्ट पर स्वाइप करके देख सकते हैं।) और फोटो पोस्ट की औसत पहुंच दर क्रमशः 14.45 फीसदी और 13.14 फीसदी है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि 2022 और 2023 के बीच कैरोसेल पोस्ट की पहुंच दर में महत्वपूर्ण गिरावट आई है।

स्टैटिस्टा की एक रिपोर्ट के अनुसार, इंस्टाग्राम रील्स की पहुंच दर उन खातों के लिए कहीं अधिक है, जो कम फॉलोअर्स रखते हैं, 500 फॉलोअर तक के खातों की औसत पहुंच दर 892 फीसदी होती है। हालांकि यह उन खातों की पहुंच दर से कई गुना ज्यादा है, जिनके पास ज्यादा फॉलोअर्स होते हैं, पर बड़े खातों वालों के इंस्टाग्राम रील्स की पहुंच में भी काफी महत्वपूर्ण वृद्धि देखी जा रही है। ये आंकड़े बताते हैं कि भारत में फोटोग्राफ की तुलना में रील्स अधिक प्रभावी तरीका है, जिससे सुविधाजनक ढंग से जनसंचार और लोकप्रियता पाने में मदद मिल सकती है। डिमांड्सएज वेबसाइट के अनुसार, 23.025 करोड़ इंस्टाग्राम उपयोगकर्ताओं के साथ भारत इंस्टाग्राम रील्स का सबसे बड़ा बाजार है, दूसरे नंबर पर अमेरिका (15.975 करोड़) और तीसरे स्थान पर ब्राजील (11.945 करोड़) है।

रील्स इसलिए ज्यादा लोकप्रिय हैं, क्योंकि वे स्थिर तस्वीरों की तुलना में अधिक आकर्षक होती हैं। रील्स कहानियां बता सकती हैं, गति दिखा सकती हैं, और संगीत और ध्वनि प्रभाव जोड़ सकती हैं, जो उन्हें अधिक आकर्षक और दिलचस्प बना सकता है। दूसरा, रील्स बनाना पहले से कहीं अधिक आसान है। स्मार्टफोन और वीडियो संपादन ऐप्स के आगमन के साथ कोई भी रील बना सकता है। तीसरा, रील व्यापक दर्शकों तक पहुंचने का एक शानदार तरीका है। उन्हें इंस्टाग्राम, यूट्यूब, शॉर्ट्स जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर साझा किया जा सकता है, जिनके अरबों उपयोगकर्ता हैं। फिर भी स्थिर चित्रों का महत्व खत्म नहीं हुआ है। उन्हें घरों और व्यवसायों में मुद्रित और प्रदर्शित किया जा सकता है और कई वर्षों तक संजोया भी जा सकता है। रील्स का उपयोग अक्सर हास्य, रचनात्मकता और व्यक्तित्व को प्रदर्शित करने के लिए होता है।

इसलिए भले ही रील्स लोकप्रिय हो रही हैं, लेकिन ऐसा नहीं है कि वे पूरी तरह से स्थिर तस्वीरों को समाप्त कर देंगी। दोनों प्रारूपों की अपनी ताकत और कमजोरियां हैं, और वे आने वाले वर्षों में सह-अस्तित्व के साथ कितने वक्त तक रह पाएंगी, यह बताना अभी मुश्किल है।

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