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समाज: 'चौमुखी' पहल से आ सकती है शांति, बेहतर व्यवस्था के लिए अहिंसक शासन पहली शर्त

Tue, 23 May 2023 07:09 AM IST
Rajgopal P V राजगोपाल पीवी
Updated Tue, 23 May 2023 07:09 AM IST
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सार
कोई भी शांतिपूर्ण और अहिंसक शासन एक बेहतर व्यवस्था से आता है, जो लोगों और राज्य के बीच सहयोग को बढ़ाता है।
 
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Peace can come from comprehensive initiative nonviolent governance first condition for better system
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI

विस्तार

मैं आपके सामने उन अनुभवों को रखना चाहता हूं, जिन्होंने अहिंसा और शांति के प्रति मेरे विचारों को ज्यादा ठोस बनाया। मैंने अपनी शांति यात्रा की शुरुआत एक भयानक संघर्ष वाले क्षेत्र से की। दिल्ली से लगभग 300 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में चंबल घाटी है, जहां सर्वोदय के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के साथ काम करने के दरम्यान मेरा सामना डकैतों की हिंसा से हुआ। उन्होंने अहिंसा के विचारों से प्रभावित होकर आत्मसमर्पण किया और जेल की सजा काटकर समाज की मुख्यधारा में वापस आ गए। हमने पिछले साल उनके आत्मसमर्पण की 50वीं वर्षगांठ मनाई थी।



इस अनुभव के बाद मैं भारत में अन्य स्थानों पर चला गया, जहां मैं कुछ मूल सामाजिक समस्याओं के समाधान के लिए काम कर सकता था। मेरा मानना है कि गरीबी, भेदभाव और बहिष्कार के कारणों का समाधान करने से ही शांति आ सकती है। अहिंसा मेरे लिए प्रेरक शक्ति रही है। इस प्रक्रिया में मैं राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और उनके दिए ‘ताबीज’ से प्रभावित हुआ। उन्होंने कहा है-'सबसे गरीब और सबसे कमजोर व्यक्ति का चेहरा याद करें, जिसे आपने अपने जीवन में देखा हो और अपने आप से पूछें कि क्या आप जो कदम उठाने जा रहे हैं, वह उसके लिए उपयोगी होगा।' मैं अपनी इस यात्रा में भारत और कुछ अन्य देशों के उन हजारों लोगों के योगदान को स्वीकार करता हूं जो इतने वर्षों से मेरे साथ खड़े हैं। हम वर्तमान में क्या कर रहे हैं? हमने शांति निर्माण के लिए ‘चतुस्तरीय’ दृष्टिकोण अपनाया है, जिसमें अहिंसक शासन; अहिंसक सामाजिक कार्रवाई; अहिंसक अर्थव्यवस्था; और अहिंसक शिक्षा शामिल हैं।


अहिंसक शासन : विज्ञान और प्रौद्योगिकी जैसे कई क्षेत्रों में प्रगति करने के साथ हमें यह मानना चाहिए कि सत्ता और पदों पर बैठे लोगों द्वारा अधिक सभ्य व्यवहार किया जाए। दुर्भाग्य से जब हम कई देशों में नेतृत्व को देखते हैं, तो ऐसा नहीं लगता। इस संदर्भ में हम नीति निर्माताओं को वंचित समुदायों के प्रति अधिक जवाबदेह बनाने के लिए काम कर रहे हैं। हमने जल, जंगल और जमीन के मुद्दों के संबंध में सामाजिक रूप से समावेशी नीतियां बनाने के लिए कई नीति निर्माताओं के साथ काम किया है। शांतिपूर्ण और अहिंसक शासन एक बेहतर व्यवस्था से आता है, जो लोगों और राज्य के बीच सहयोग को बढ़ाता है।

अहिंसक सामाजिक कार्रवाई : मौजूदा समय में लाखों लोगों के जीवन और आजीविका पर प्रभाव डालने वाले कई संकट हैं, जिन्हें हम ‘ढांचागत’ या ‘व्यवस्थागत’ हिंसा कहते हैं। हम इस बात से चिंतित हैं कि आज वैसे विरोध प्रदर्शन अधिक हो रहे हैं, जो हिंसक हैं और लोग अपने लक्ष्य को प्राप्त तक नहीं कर पा रहे हैं। 2007 में हमने एक बड़ी अहिंसक कार्रवाई की, जब 25,000 लोगों ने चंबल से नई दिल्ली तक एक महीने में 350 किलोमीटर की पैदल यात्रा की। यह लोगों के लिए भूमि पर अधिकार, आजीविका के संसाधनों और आदिवासी आबादी के लिए वनभूमि पर अधिकार हासिल करने के लिए था।

अहिंसक अर्थव्यवस्था : महात्मा गांधी, जेसी कुमारप्पा और ईएफ शुमाकर ने सुझाया था कि अर्थव्यवस्था अधिक सहभागी और ‘नीचे से ऊपर’ हो सकती है और इस अर्थ में स्व-संगठित समुदाय एक अर्थव्यवस्था बनाने के लिए एक साथ आते हैं। इसके विपरीत, ऐसी अर्थव्यवस्था जो कुछ लोगों को अवसर देती है और लाखों लोगों की गरीबी और दुख बढ़ाती है, वह ‘अच्छी’ या समावेशी नहीं हो सकती।

अहिंसक शिक्षा : आजकल के युवा शांति के बजाय क्रूर बल में विश्वास करते हैं। कक्षा और पाठ्येतर गतिविधियों के अलावा, हम विभिन्न राज्य सरकारों के साथ यह वकालत कर रहे हैं कि क्या वे ‘शांति विभागों’ की मार्फत स्वावलंबी तरीकों से अहिंसक शिक्षा को प्रोत्साहित करेंगे।
मैं यह कहकर अपनी बात समाप्त करता हूं कि अहिंसा का यह अनुभव मुझे भारत में सबसे अधिक वंचित समुदायों के साथ कई वर्षों तक काम करने के बाद हुआ है। (सप्रेस)

 - वरिष्ठ गांधीवादी कार्यकर्ता एवं ‘एकता परिषद’ के संस्थापक राजगोपाल पीवी को हाल में जापान के प्रतिष्ठित ‘निवानो शांति पुरस्कार’ (2023) से नवाजा गया है। यहां पुरस्कार स्वीकार करते हुए दिए गए उनके भाषण के संपादित अंश।

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