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ईमानदार पूर्व मंत्रियों की कथा

Mon, 20 May 2013 03:17 PM IST
निर्मल गुप्त
निर्मल गुप्त Updated Mon, 20 May 2013 03:17 PM IST
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pawan kumar bansal and ashwani kumar

पिछले दिनों दो मंत्रियों ने स्वेच्छा से इस्तीफा दे दिया। दोनों अपने वाहन पर लालबत्ती चमकाते हुए प्रधानमंत्री आवास गए और हंसी-खुशी वाहन की लालबत्ती बुझाकर अपने-अपने घर वापस आ गए। सारा मुल्क त्याग का यह उदाहरण देख कृतार्थ हुआ।

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सच यह है कि दोनों मंत्रियों ने नैतिकता के आधार पर इस्तीफे दिए हैं। अब यह पूरे देश का कर्तव्य है कि वह नैतिकता की गरिमा को बनाए रखने के लिए दो मिनट का मौन या बोलती बंद रखे।
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सबको पता है कि दोनों मंत्री बेदाग थे। उनका साधुन धरा शरीर परमार्थ के कारने धूमिल हुआ था। उनमें से एक तो कोयले की कोठरी से आई फाइलों को साफ करने की मासूम-सी कोशिश में मुंह काला करा बैठे। दूसरे अपने नादान भानजे की काली आस्तीनों को स्नेहवश साफ करने के प्रयास में विवादों में जा फंसे।
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फिर भी ऐसा कोई गंभीर कारण था नहीं कि उनके नीचे की कुर्सी को कोई खिसका पाता। पर उनकी आत्मा से आवाज आई और उन्होंने इस्तीफा दे दिया। इतिहास में इस त्याग गाथा को स्वर्णिम अक्षरों में अवश्य अंकित किया जाएगा।

हालांकि दोबारा कुर्सी पाने की इन भाई लोगों की आस कायम है। राजनीति में धैर्य की परीक्षा बार-बार होती है। राजनीति हो या रोजमर्रा की जिंदगी, इसमें गिद्धों का महाभोज तभी होता है, जब कोई निरीह प्राणी मारा जाता है। गिद्ध आदतन उम्मीद का दामन नहीं छोड़ते और अपने लिए महाभोज के तमाम विकल्प खुले रखते हैं। इसी तरह इस दुनिया में कहीं खुशी कहीं गम का निर्बाध क्रम युगों से चलता आया है।

राजनीति की दो अभूतपूर्व शख्सियतें मंत्री के रूप में चूंकि भूतपूर्व हो गई हैं, इसलिए यह शोकाकुल होने का अवसर है। वैसे भी जो उत्सवधर्मी लोग होते हैं, वे जायज-नाजायज की परवाह ही कब करते हैं। इस दुख की घड़ी में भी एक चमकीली उम्मीद की किरण बाकी है। अब ये दोनों पूर्व मंत्री अपनी-अपनी अतिव्यस्तता से अवमुक्त हो गए हैं।


इनके पास अब समय ही समय है। इसलिए अब ये दूसरों पर कीचड़ उछालने का खेल पूरे मनोयोग से खेल सकते हैं या चाहें, तो टीवी चैनलों को अपने अतीत से जुड़ी टीआरपी बढ़ाने वाली दिलचस्प बाइट दे सकते हैं और अपने हाहाकारी संस्मरणों के जरिये सरकार को संकट में डाल सकते हैं। लेकिन भ्रष्ट यूपीए के ये दो अपवादस्वरूप ईमानदार पूर्व मंत्री ऐसा कोई काम करेंगे ही क्यों, जिससे सरकार का संकट बढ़े! ये तो हम सबके लिए प्रेरणास्वरूप हैं।

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