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समानांतर व्यूह: चीन-तुर्किये पर भारतीय प्रतिबंध का परिप्रेक्ष्य व्यापक; आतंकवाद-दुष्प्रचार के खिलाफ लड़ाई जारी

Thu, 15 May 2025 07:32 AM IST
ज्योति भास्कर अमर उजाला, नई दिल्ली।
अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: ज्योति भास्कर Updated Thu, 15 May 2025 07:32 AM IST
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सार
जम्मू-कश्मीर में आतंकियों की धर-पकड़, भार्गवास्त्र का सफल परीक्षण और अब तुर्किये व चीन के सरकारी मीडिया चैनलों के सोशल मीडिया खातों पर सांकेतिक प्रतिबंध को व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखने की जरूरत है। इससे यह संकेत भी मिलता है कि आतंकवाद और दुष्प्रचार के खिलाफ भारत की समानांतर व्यूह रचना जारी है।
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Parallel strategy India sanctions China Turkish media have broader perspective in fighting terror propaganda
फर्जी खबरों के प्रति भारत की लड़ाई (प्रतीकात्मक) - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

विस्तार

भारत सरकार द्वारा तुर्किये और चीन के सरकारी मीडिया चैनलों के सोशल मीडिया खातों पर कुछ घंटों के लिए सांकेतिक प्रतिबंध लगाया जाना, सिर्फ तकनीकी या कूटनीतिक निर्णय नहीं है, बल्कि यह एक बड़ी तस्वीर की ओर इशारा करता है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद अब यह किसी से छिपा नहीं है कि ये दोनों ही देश पाकिस्तान के समर्थन में भारत-विरोधी दुष्प्रचार में शामिल रहे हैं, चाहे वह भ्रामक रिपोर्टिंग हो, भारत के आंतरिक मसलों को बढ़ा-चढ़ाकर बताना हो या फिर आतंकवाद पर भारत के रुख को कमजोर करने वाली खबरों को दिखाना हो।



इस पृष्ठभूमि में भारत ने अब जो आक्रामकता दिखाई है, वह रणनीतिक अधिक प्रतीत होती है, जो साफ संकेत देती है कि भारत अब अपनी वैश्विक छवि को तोड़ने या कमजोर करने की किसी भी कोशिश को नजरअंदाज नहीं करेगा। उल्लेखनीय है कि चीन और तुर्किये का पाकिस्तान के साथ गठजोड़ कोई नया नहीं है।


तुर्किये द्वारा पाकिस्तान को भारत के खिलाफ हथियार उपलब्ध कराए जाने और उसके एक युद्धपोत के कराची बंदरगाह तक पहुंचने की खबरें इसके ही उदाहरण हैं। दूसरी ओर चीन, पाकिस्तान में जिसके एयर डिफेंस सिस्टम की भारत ने हवा निकाल दी थी, का पाकिस्तान को आर्थिक और रणनीतिक रूप से समर्थन देना भी छिपा नहीं है।

भारत ने इन देशों की मदद से हुए हमलों को तो नाकामयाब किया ही, अब इनके दुष्प्रचार तंत्र पर भी निशाना लगाया है। हालांकि, यह कार्रवाई केवल डिजिटल दुष्प्रचार रोकने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसे भारत की आतंकवाद और उसे बढ़ावा देने वाले देशों के खिलाफ एक बहुस्तरीय रणनीति के हिस्से के रूप में देखा जाना चाहिए।

युद्ध विराम की घोषणा के बाद जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों की धर-पकड़ जारी है, जो दर्शाती है कि सुरक्षाबलों ने अपनी सतर्कता और सक्रियता को बढ़ाया ही है। यह भी कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई को किसी भी स्थिति में कमजोर नहीं होने देगा। सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (एसडीएएल) द्वारा विकसित एंटी ड्रोन सिस्टम भार्गवास्त्र का सफल परीक्षण इस दिशा में एक मील का पत्थर है और अब भारत विरोधी प्रोपेगेंडा चलाने वाले देशों की आधिकारिक मीडिया के सोशल मीडिया अकाउंट पर प्रतिबंध से यही जाहिर होता है कि भारत द्वारा पाकिस्तान और आतंकवाद को नेस्तनाबूद करने के लिए समानांतर व्यूह रचना जारी है।

चूंकि सूचना के इस युग में प्रोपेगेंडा भी एक हथियार बन चुका है, ऐसे में, आतंकवाद के खिलाफ कोई भी लड़ाई इसका समाधान किए बगैर प्रभावी नहीं बन सकती। सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचनाओं के जाल को देखते हुए, सरकार के सांकेतिक कदम का महत्व है, जिसे आतंकवाद और दुष्प्रचार के खिलाफ देश की निर्णायक लड़ाई का हिस्सा माना जाना चाहिए।

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