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पाकिस्तान को बदलना पड़ेगा
आनंद कुमार
Updated Wed, 24 Jun 2015 08:01 PM IST
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भारत-म्यांमार के सीमावर्ती इलाके में भारतीय सेना द्वारा पिछले दिनों जवाबी कार्रवाई करने पर पाकिस्तान ने हास्यास्पद प्रतिक्रिया दी थी। आतंकी संगठनों के जरिये भारत के खिलाफ छद्म युद्ध चलाने वाले पाकिस्तान ने कहा कि भारत को पाकिस्तान के भीतर ऐसी कार्रवाई करने के बारे में नहीं सोचना चाहिए, क्योंकि पाकिस्तान म्यांमार नहीं है। बेशक कई मायनों में पाकिस्तान म्यांमार से अलग है, पर उसे अपने पड़ोसी मुल्कों में आतंक फैलाने का भी अधिकार नहीं है।
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इसमें कोई शक नहीं कि पाकिस्तान सैन्य क्षमता के मामले में म्यांमार से ज्यादा ताकतवर है। इसके अलावा वह परमाणु हथियारों और मिसाइल प्रणाली से लैस देश है। सबसे खतरनाक यह कि वह युद्ध की स्थितियों में वास्तविक उपयोग के लिए सामरिक परमाणु हथियार विकसित कर रहा है। उसे अमेरिका और चीन से उन्नत हथियार प्रणाली और सैन्य साज-ओ-सामान मिल रहे हैं।
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चूंकि भारत और पाकिस्तान, दोनों परमाणु हथियारों से लैस हैं, इसलिए संभवतः वे एक-दूसरे से सीधे युद्ध में नहीं उलझेंगे, कम से कम परमाणु युद्ध के स्तर पर तो नहीं ही। हालांकि अतीत में भारत को कारगिल की रक्षा के लिए युद्ध में उतरना पड़ा था। इसी तरह संसद पर हमले और मुंबई आतंकी हमले के बाद भी पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध छेड़ने का भारत पर भारी दबाव था। पाकिस्तान मानता है कि एक पूर्ण युद्ध को (जो परमाणु युद्ध के स्तर तक जा सकता है) टालना भारत की जिम्मेदारी है।
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युद्ध किसी भी देश के लिए ठीक नहीं है। पर पाकिस्तान ऐसी शत्रुतापूर्ण कार्रवाई करता है, जिससे ऐसी स्थिति पैदा हो जाए कि भारत जवाबी कार्रवाई के लिए मजबूर हो जाए। हालांकि भारत की प्रतिक्रिया तत्कालीन स्थितियों और पाकिस्तान की उत्तेजक कार्रवाई पर निर्भर करेगी।
पाकिस्तान अगर यह सोचता है कि वह चाहे कितना ही भड़काऊ काम क्यों न करे, भारत जवाब नहीं देगा, क्योंकि उसकी सेना म्यांमार से ज्यादा ताकतवर है और उसके पास परमाणु हथियार हैं, तो यह उसकी मूर्खता है। बेहतर होगा कि वह लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठन के खिलाफ कार्रवाई करे, जो पाकिस्तान में शरण लिए हुए है और जिसके आतंकी हमलों के कारण भारतीय सेना पाकिस्तान में घुसकर सैन्य कार्रवाई कर सकती है। आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान दोहरा रवैया अपनाता रहा है। एक तरफ तो वह कुछ आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है, दूसरी तरफ हाफिज सईद जैसे आतंकी सरगनाओं और लश्कर जैसे संगठनों की रक्षा कर रहा है। यह सही है कि भारत अमेरिका नहीं है, पर यह भी सच है कि दक्षिण एशिया में सुरक्षा का परिदृश्य बदल रहा है। अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी के बाद आगे यह और बदल सकता है।
अभी हमारे देश में ऐसी सरकार है, जो राष्ट्र निर्माण को उत्सुक है, पर राष्ट्र निर्माण के लिए शांति जरूरी है। इसलिए इसकी पूरी संभावना है कि भारत किसी भी पड़ोसी से युद्ध में नहीं उलझना चाहेगा। लेकिन यह भी सच है कि मौजूदा सरकार आतंकवाद को लेकर कठोर है। इसलिए बेहतर होगा कि पाकिस्तान आतंकी तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे और ऐसी कोई स्थिति पैदा न होने दे कि भारत को म्यांमार जैसी कार्रवाई के लिए मजबूर होना पड़े।
-लेखक आईडीएसए में एसोसिएट फेलो हैं