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पाक-नापाक: अपने ही बनाए नियमों को सुबह शाम तोड़ रहे हैं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री...और उनके मंत्री
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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ
- फोटो :
ANI
विस्तार
बोलने की आजादी, जुझारू व हर तरह के सेंसरशिप से आजाद मीडिया, असहमति को सहन करने की ताकत, असंतोष को दबाना-ये सभी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दे हैं, जिनके बारे में हम दुनिया भर में पढ़-सुन रहे हैं। हर जगह शासक और ताकतवर लोग मीडिया की आवाज को दबाने की कोशिश कर रहे हैं। सिर्फ उन्हीं खबरों को प्रकाशित एवं प्रसारित करने की अनुमति देते हैं, जो उन्हें पसंद हों। दक्षिण एशिया के देश दुनिया के अन्य देशों से अलग नहीं हैं और इस हफ्ते मैं अमर उजाला के पाठकों का ध्यान इस खबर की ओर दिलाना चाहूंगी कि पाकिस्तान की मुख्य पार्टियां यह सुनिश्चित करने के लिए एकजुट हो गई हैं कि एक ऐसा कानून बनाया जाए, ताकि मीडिया की आवाज को और दबाया जा सके।
हालांकि पाकिस्तानी मीडिया को चुप कराने संबंधी खबरों में सबसे निराशाजनक खबर दिवंगत बेनजीर भुट्टो की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की तरफ से आई है, जिसने पंजाब प्रांत की पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) की मरियम नवाज सरकार के नए विवादास्पद पंजाब मानहानि विधेयक, 2024 को पारित कराने में साथ दिया है, ताकि उन आक्रोशित नागरिकों को शांत किया जा सके, जो अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए सोशल मीडिया का उपयोग करते हैं। अतीत में जनरल जिया उल हक जैसे सैन्य तानाशाहों ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी थी और विरोध करने वालों को सार्वजनिक रूप से कोड़े तक मारे थे। आज भी मेरे एक बुजुर्ग सहकर्मी नासिर जैदी जीवित हैं, जो बताते हैं कि कैसे तानाशाह ने उन्हें स्वतंत्र रूप से लिखने की हिम्मत करने के लिए कोड़ों से पीटा था। आज असैन्य तानाशाही अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को खत्म करने के लिए हर तरह के हथकंडे अपना रही है। यही नहीं, अब पत्रकारों के गायब होने और उनकी हत्या का खतरनाक चलन भी दिख रहा है।
इससे पहले दुनिया भर के तानाशाहों की तरह पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कुछ महीने पहले पूरे पाकिस्तान में एक्स पर प्रतिबंध लगा दिया था। तब लोगों को वीपीएन इंस्टाल करना पड़ता था, जो सिस्टम को अनब्लॉक करने में मदद करता है, ताकि उपयोगकर्ता ट्वीट कर सकें। इनमें से कुछ वीपीएन मुफ्त हैं, जबकि कुछ अन्य के लिए आपको भुगतान करना पड़ता है, तभी एक्स तक पहुंच सकते हैं। लेकिन विडंबना यह है कि जहां आम लोगों को एक्स का इस्तेमाल करने पर पाबंदी लगा दी गई है, वहीं प्रधानमंत्री खुद और उनके मंत्रिमंडल के सभी सदस्य सुबह-शाम एक्स का उपयोग कर अपने ही नियम को तोड़ रहे हैं। इस हफ्ते हम सबको इस बात पर हंसी आई कि एक्स को ब्लॉक किए जाने के बावजूद प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और उनके भाई नवाज शरीफ ने भारतीय प्रधानमंत्री को आम चुनाव में जीत की बधाई ट्वीट करके दी और प्रधानमंत्री मोदी ने भी ट्वीट करके जवाब दिया।
इस पाखंड को सबने समझ लिया कि पाकिस्तान के राजनेता कैसे अपने ही कानून का उल्लंघन कर रहे हैं। अब पंजाब प्रांत की सरकार ने पंजाब मानहानि विधेयक, 2024 के लिए आधिकारिक रूप से गजट अधिसूचना जारी कर दी है, जिसे विवादास्पद कहा जाता है। नए कानून का उद्देश्य यूट्यूब, टिकटॉक, एक्स, फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर गलत सूचनाओं से निपटना है, जिससे ‘फर्जी खबर’ फैलाने वालों के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया जा सके।
इस बात से हर कोई सहमत है कि सोशल मीडिया पर जो कुछ पोस्ट किया जाता है, उनमें से कुछ नफरत से भरा और अस्वीकार्य होता है। लेकिन उन अकाउंट को बंद करने के बजाय, जो नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं, आप पूरे नेटवर्क को बंद नहीं कर सकते। पत्रकार समुदाय ने इस विधेयक का जमकर विरोध किया है। गैर-लोकतांत्रिक बताते हुए इसकी निंदा की है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की ओर से भी प्रेस की स्वतंत्रता को बाधित करने के कारण कड़ी आपत्ति जताई गई है। अंग्रेजी दैनिक द डॉन ने संपादकीय में लिखा है- 'ये घटनाक्रम इस बात की याद दिलाते हैं कि हमारे संविधान द्वारा प्रदत्त अभिव्यक्ति और भाषण की स्वतंत्रता पर शिकंजा कसा जा रहा है, जिसे आम नागरिक अभी तक पूरी तरह समझ नहीं सके हैं। यहां चिंता यह नहीं है कि नागरिकों को जो कुछ भी वे कहना या उपभोग करना चाहते हैं, उन्हें उसकी अनुमति दी जानी चाहिए, आखिरकार नागरिक होने के नाते वे भी देश के कानून से बंधे हैं। बल्कि डर यह है कि इन हथकंडों का इस्तेमाल पुलिस और सत्ता से असहमत केवल चुनिंदा लोगों को निशाना बनाने के लिए किया जाएगा।'
इस हफ्ते की दूसरी चौंकाने वाली खबर यह है कि शहबाज शरीफ सरकार अब इंटरनेट फायरवॉल बना रही है, जिसे कथित तौर पर अधिकारियों ने गुप्त रूप से लागू करना शुरू कर दिया है, जो उन्हें पाकिस्तानी उपयोगकर्ताओं द्वारा इंटरनेट पर पोस्ट की जाने वाली या देखी जाने वाली हर चीज पर जासूसी करने की अनुमति देगा। यह इंटरनेट फायरवॉल ग्रेट फायरवॉल की तरह है, जिसका उपयोग चीनी अधिकारी अपने नागरिकों पर नजर रखने के लिए करते हैं। यह इंटरनेट फायरवॉल इंटरनेट पुलिस की तरह काम करेगा। खबरें बताती हैं कि सरकार ने विभिन्न प्रौद्योगिकियों का उपयोग शुरू कर दिया है, जिससे यह निगरानी की जा सकेगी कि कोई उपयोगकर्ता इंटरनेट पर क्या कह, सुन या पढ़ रहा है।
एक दृष्टिकोण है कि इसके दुरुपयोग की संभावना बहुत ज्यादा है, इसलिए इस परियोजना के पूरा होने से पहले उचित मंचों पर इसे जांच के दायरे में लाया जाना चाहिए। पाकिस्तान तानाशाहों को अपने लोगों पर नियंत्रण बढ़ाने का जोखिम नहीं ले सकता। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बाधित करने के निरंतर प्रयासों पर पूर्व संपादक अब्बास नासिर ने कहा, 'यह उल्लेखनीय है कि इन दिनों मीडिया पर होने वाली किसी भी चर्चा में लगभग हमेशा पारंपरिक मीडिया को शामिल नहीं किया जाता है, जैसे कि ऑनलाइन समाचार साइटों के अलावा, चौबीसों घंटे चलने वाले दर्जनों टीवी चैनल और समाचार पत्र। इसका केवल एक कारण हो सकता है : पारंपरिक मीडिया अब अधिकारियों के इतने अधीन है कि इसे बड़े पैमाने पर उनका मुखपत्र माना जाता है। बहुत कम सम्मानजनक अपवादों के बावजूद। अगर आप मुझसे पूछें, तो यह दुखद है।' बहरहाल, कई दशकों के अपने अनुभव के आधार पर मेरा मानना है कि पाकिस्तानी मीडिया इस पर पलटवार करेगा। यहां तक कि अतीत में भी इसने सैन्य एवं असैन्य तानाशाही का विरोध किया है। हम अपनी जगह वापस पाने, अपनी आवाज बुलंद करने और सच बोलने के लिए लड़ेंगे।