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इस्राइल पर पसोपेश में पाकिस्तान, मान्यता देने का भारी वैश्विक दबाव 

मरिआना बाबर Published by: मरिआना बाबर Updated Fri, 02 Jul 2021 05:30 AM IST
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इमरान खान
इमरान खान - फोटो : Instagram
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भारत में कोविड की सुधरती स्थिति देखकर पाकिस्तान में अनेक लोगों ने राहत की सांस ली है। पाकिस्तान में भी हालात सुधर रहे हैं और जल्दी ही इस्लामाबाद देश का पहला कोविड मुक्त शहर घोषित होने वाला है। इस्लामाबाद में ऑफिस जाने वाले लोगों ने टीका लगाने का मौका न मिल पाने की जो शिकायत दर्ज की थी, उसका भी समाधान निकाल लिया गया है। अब वे फातिमा जिन्ना पार्क में अपनी कारों में बैठे-बैठे टीका लगवा सकेंगे। अलबत्ता जिस खबर की पाकिस्तान भर में चर्चा है, वह इस्राइल है। पाकिस्तान ने अभी तक इस्राइल को मान्यता नहीं दी है। पर प्रधानमंत्री इमरान खान ने माना है कि इस्राइल को मान्यता देने के लिए पाकिस्तान पर भारी वैश्विक दबाव है। 
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यह दबाव सऊदी अरब से भी आ रहा है। उसका कहना है कि विशाल मुस्लिम आबादी वाला पाकिस्तान पहले इस्राइल को मान्यता दे, तो फिर उसके लिए भी ऐसा करना आसान हो जाएगा।  पाकिस्तान पर दबाव बनाने वाला दूसरा देश संयुक्त अरब अमीरात है। पिछले कुछ समय से उसने पाक नागरिकों को वीजा देना बंद कर रखा है। कहा यह जाता है कि कोविड के कारण अमीरात ने यह कदम उठाया है। पर असल में अमीरात इस्राइल के मुद्दे पर पाकिस्तान पर दबाव बना रहा है। वीजा मामले के हल के लिए पाकिस्तान के सैन्य व असैन्य नेतृत्व ने कई बार अमीरात का दौरा किया, पर कुछ नहीं हुआ।


एक पाक पत्रकार की ट्विटर पर आई रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख के दिशा-निर्देश पर विदेशी मामलों पर प्रधानमंत्री के विशेष सहायक  सईद जुल्फिकार अब्बास बुखारी ने कुछ महीने पहले इस्राइल का गोपनीय दौरा किया था। इस्राइल के एक अखबार हायोम के मुताबिक, बुखारी ने विगत नवंबर में तेल अवीब में विदेश मंत्रालय के अधिकारियों और खुफिया एजेंसी मोसाद के निदेशक से मुलाकात की थी। हालांकि बुखारी ने इस खबर का खंडन किया था। पाक विदेश मंत्रालय, उसके वरिष्ठ अधिकारियों तथा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने भी इस्राइली मीडिया में आई इस खबर को खारिज किया कि एक पाक अधिकारी ने इस्राइल का दौरा किया है। साथ ही, इस पर जोर दिया गया कि पाकिस्तान वहां हमेशा फलस्तीनियों के हक और दो राष्ट्रों वाले समाधान के पक्ष में है।

इसके बावजूद इस अफवाह को रोका नहीं जा सका है कि पाक सैन्य नेतृत्व इस्राइल को मान्यता देने के बारे में सोच रहा है। जाहिर है, पाकिस्तान के राजनीतिक नेतृत्व या किसी राजनेता का इस्राइल को मान्यता देने के बारे में खुलेआम कहना असंभव है, क्योंकि वोटर इसकी तीखी आलोचना करेंगे। पाकिस्तान के एक सैन्य तानाशाह ने ही इस दिशा में पहला कदम उठाते हुए सितंबर, 2005 में तुर्की में अपने विदेश मंत्री को इस्राइली विदेश मंत्री से मिलने भेजा था। उस मुलाकात के बाद इस्राइली विदेश मंत्री ने, जो उप-प्रधान मंत्री भी थे, कहा था, 'मैंने अभी-अभी पाकिस्तान के विदेश मंत्री खुर्शीद कसूरी से पहली ऐतिहासिक मुलाकात की है। इस्राइल इस मुलाकात का स्वागत करता है और यह उम्मीद करता है कि इससे दोनों देशों के बीच खुले और लाभदायक रिश्ते की शुरुआत होगी।'

पर उस मुलाकात के बाद दोनों के बीच रिश्तों पर सार्वजनिक रूप से कुछ सामने नहीं आया। हालांकि कुछ लोगों ने मुझे बताया है कि अफगानिस्तान पर सोवियत नियंत्रण के दौर में पाक और इस्राइली सेना के बीच संपर्क था। पाक सुरक्षा प्रतिष्ठान के मुताबिक, मुंबई पर किए गए हमले से बहुत पहले पाकिस्तान ने इस्राइल को चेताया था कि भारत में कुछ इस्राइली ठिकानों पर हमले हो सकते हैं। रक्षा विशेषज्ञ आएशा सिद्दिका के मुताबिक, 'भारत जैसे ताकतवर देश से जूझता पाकिस्तान इस्राइल की सैन्य ताकत से अभिभूत है कि किस तरह उसने ताकतवर अरब पड़ोसियों को काबू में कर रखा है। इस्राइल से बेहतर रिश्ता होने पर नाराज अमेरिका को भी साधा जा सकता है।' दूसरी ओर, विपक्षी नेता बिलावल भुट्टो जरदारी ने पाकिस्तान के एक विमान के इस्राइल जाने और वहां आठ घंटे रुकने के मामले की जांच की मांग की है। वह यह भी जानना चाहते हैं कि उस विमान में कौन था?



 
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