अघोषित युद्ध लड़ रहा पाकिस्तान
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी देश के विकसित या अविकसित या गरीब देश की श्रेणी में स्थान पाने में उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा की अहम भूमिका होती है! पश्चिम एशिया के अरब देशों के पास काला सोना यानी तेल के भंडार होने के बावजूद उनकी अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा उतनी नहीं है, जितनी एक साधारण यूरोपीय देश या दूसरे विश्वयुद्ध में बर्बाद जापान की है। 1967 में मिस्र, लेबनान, जॉर्डन एवं सीरिया की सेनाओं ने यह कहकर इस्राइल पर हमला किया था कि इस युद्ध के द्वारा इस्राइल का नाम विश्व के नक्शे से मिटा देंगे, परंतु अंत में इस युद्ध में मिस्र ने सिनाई रेगिस्तान तथा सीरिया ने अपना पहाड़ी क्षेत्र इस्राइल के हाथों गंवा दिया। चारों तरफ से दुश्मन देश होने तथा क्षेत्र में केवल भारत के हरियाणा के बराबर क्षेत्रफल होने के बावजूद आज इस्राइल विश्व के विकसित एवं शक्तिशाली देशों में गिना जाता है। यह कीर्तिमान इस्राइल ने इसलिए हासिल किया, क्योंकि वहां राष्ट्रवाद एवं सांप्रदायिक सौहार्द उच्च कोटि का है।
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
इधर भारत में सांप्रदायिक सौहार्द के प्रतीक उच्च शिक्षा संस्थानों और धार्मिक स्थलों में राष्ट्र विरोधी हरकतों के जरिये सौहार्द को बिगाड़ने की कोशिश हो रही है, जिसमें पाकिस्तान की परोक्ष भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई भारत विरोधी विचारधारा फैलाने की कोशिश कर रही है। आतंकी मन्नान वानी और अफजल गुरु के उदाहरण हमारे सामने हैं कि किस तरह से उनके पक्ष में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी और जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में नारे लगाए गए।
80 के दशक में पाकिस्तानी सैन्य तानाशाह जनरल जिया उल हक के कार्यकाल में हमारे देश में आईएसआई ने अपना ऑपरेशन शुरू किया था। इस ऑपरेशन का मुख्य लक्ष्य था, भारत के नौजवानों की सोच-बदल कर उन्हें अपने देश के विरुद्ध ही खड़ा करना। वर्तमान घटनाक्रम इसी सोच से उपजे लगते हैं। सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के लिए पाकिस्तान ने 1970 के दशक में पंजाब को निशाना बनाना शुरू किया था। तब दिन-रात रेडियो से सिखों को हिंदुओं के विरुद्ध भड़काया जाता था, जिससे खालिस्तानी विचारधारा को पनपने का मौका मिला। इसी के फलस्वरूप ऑपरेशन ब्लू स्टार में देश को जानमाल और सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने के रूप में बड़ा नुकसान उठाना पड़ा था। आईएसआई और आतंकी सरगना हाफिज सईद सीमावर्ती प्रांतों में अल्पसंख्यकों के बीच पैठ जमाकर एक बार फिर सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश में है।
पाकिस्तान के इस ऑपरेशन को सुरक्षा विशेषज्ञ हाइब्रिड युद्ध या मिला-जुला युद्ध कहते हैं। मानवीय सोच तथा तकनीक के विकास के कारण आजकल भारी-भरकम परंपरागत युद्ध कोई देश नहीं लड़ता, इसके स्थान पर यही हाइब्रिड प्रणाली का युद्ध लड़ा जाता है।
इस युद्ध के लिए ज्यादातर उस क्षेत्र को चुना जाता है, जहां का कोई विवाद सरकार के पास लंबे समय से लंबित हो और इसके अतिरिक्त वह क्षेत्र विकास के रूप से पिछड़ा हो। इसके बाद इसको हिंसक रूप देने के लिए अपने आतंकियों से सार्वजनिक स्थानों तथा जनता पर हमले करवाया जाता है और उनके पकड़े जाने पर उन्हें नॉन स्टेट एक्टर्स बता दिया जाता है। पाकिस्तान ने पहले पंजाब में यह किया और वहां पर विफल रहने के बाद अब जम्मू कश्मीर में कर रहा है। साफ है कि पाकिस्तान चूंकि परंपरागत युद्ध में मुकाबला नहीं कर सकता, वह हाइब्रिड युद्ध के जरिये देश की एकता और अखंडता को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहा है। इसे समझने और इसकी काट तलाशने की जरूरत है और ऐसा जम्मू-कश्मीर में विकास के जरिये ही संभव हो सकता है।