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विश्लेषण: पाकिस्तान का चुनावी प्रहसन, जनादेश सैन्य प्रतिष्ठान के लिए चुनौती

Sat, 10 Feb 2024 07:20 AM IST
Maroof Raza मारूफ रजा
Updated Sat, 10 Feb 2024 07:20 AM IST
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सार
पाकिस्तान के आम मतदाता पीटीआई उम्मीदवारों पर भरोसा जताते दिख रहे हैं, जो सैन्य प्रतिष्ठान के लिए चुनौती है। ऐसे में अगर सेना रातों-रात कोई खेल कर दे, तो आश्चर्य नहीं।
 
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Pakistan Election Result common voters confidence in Imran Khan PTI backed candidates challenge to military
Imran Khan - फोटो : Social Media

विस्तार

लगता है कि पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में आम चुनाव के बाद भी राजनीतिक संकट जल्दी खत्म होने वाला नहीं है। अब तक घोषित नतीजों के अनुसार, पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए इंसाफ समर्थित उम्मीदवार बढ़त बनाए हुए हैं। पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की पार्टी दूसरे स्थान पर है, जबकि बिलावल भुट्टो के नेतृत्व वाली पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी तीसरे नंबर पर है। एक से अधिक सीटों से चुनाव लड़ रहे नवाज शरीफ को नेशनल एसेंबली की 15 नंबर सीट से हार का सामना करना पड़ा है और वहां इमरान खान की पार्टी पीटीआई समर्थित उम्मीदवार की जीत हुई है। नेशनल एसेंबली की 233 सीटों पर हुए चुनाव में किसी भी पार्टी को बहुमत हासिल करने के लिए 166 सीटों की जरूरत होगी।



पाकिस्तान के लोग इस राजनीतिक प्रहसन को इलेक्शन (चुनाव) के बजाय सेलेक्शन (चयन) बता रहे हैं, जबकि मानवाधिकार पर्यवेक्षकों ने इसकी निंदा करते हुए कहा कि चुनाव न तो स्वतंत्र था और न ही निष्पक्ष। अमेरिका स्थित गैलप पोलिंग कंपनी ने पाया कि पाकिस्तान के लोग आर्थिक, राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों से हतोत्साहित हैं, जो उनके मुल्क की स्थिरता को खतरे में डालती हैं, और मतदान से पहले ही असंतोष रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था।


गैलप के सर्वेक्षण में कहा गया कि पाकिस्तान का राजनीतिक माहौल उतना ही निराशाजनक है, जितना आर्थिक माहौल। दस में से सात पाकिस्तानियों को इस चुनाव की निष्पक्षता पर भरोसा नहीं है। और हाल ही में बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में आतंकवादी हमलों और पीओके एवं गिलगित बाल्टिस्तान में बढ़ते असंतोष ने सैन्य प्रतिष्ठान को हिलाकर रख दिया है।

असंख्य खतरों से निपटने के लिए पाकिस्तान ने 6,50,000 से अधिक सेना, अर्धसैनिक बलों और पुलिस के जवानों को हजारों मतदान केंद्रों की सुरक्षा के लिए तैनात किया। और यह सुनिश्चित किया कि सैन्य प्रतिष्ठान अपनी इच्छा के अनुसार काम करता है। मतदान के दिन देश भर में मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं बाधित रहीं, जिसके खिलाफ विपक्षी दलों एवं लोगों में भारी नाराजगी दिखी। पाकिस्तान के सैन्य प्रतिष्ठान ने इमरान खान की किस्मत पर ताला जड़ दिया है। लेकिन जिस तरह से पाकिस्तान के आम मतदाता पीटीआई उम्मीदवारों पर इस चुनाव में भरोसा जताते हुए दिख रहे हैं, वह पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान के लिए एक नई चुनौती है। सेना इमरान खान को समर्थन देगी, इसकी कोई संभावना नजर नहीं आती। इमरान खान ने चुनाव नतीजों में धांधली का आरोप भी लगाया है। ऐसे में अगर पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान रातों-रात कोई खेल कर दे, तो कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए। इस बात की पूरी संभावना है कि मियां नवाज शरीफ सेना द्वारा 'चयनित' प्रधानमंत्री बन सकते हैं।

पाकिस्तान के चुनाव में सभी दावेदारों का कहना है कि वे मुल्क को उस गंदगी से बाहर निकालेंगे, जो सेना के लालच और पिछली सरकारों के भ्रष्टाचार ने पैदा की है। लेकिन क्या वे ऐसा कर सकते हैं? नवाज शरीफ ने चुनाव में चाहे जो भी वादे किए हों, पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को पटरी पर नहीं ला सकते हैं। उन्होंने भारत और अमेरिका के साथ रिश्ते सुधारने का भी वादा किया है, लेकिन तुरंत उनसे कुछ खास उम्मीद नहीं की जा सकती है।

पाकिस्तानी सेना चाहे जिसे भी अपनी कठपुतली के रूप में अगला प्रधानमंत्री चयनित करे, वहां सामाजिक और जातीय विभाजन इतना गहरा गया है कि कोई भी राजनीतिक मैच फिक्सिंग इसे ठीक करने में सक्षम नहीं होगी। और यह भी ध्यान रखना चाहिए कि कर्ज और राहत पैकेज पर टिकी अर्थव्यवस्था के साथ आतंकवाद को अपनी नीति का साधन बनाने से आपदा ही आएगी।
(-लेखक रणनीतिक विश्लेषक हैं)

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