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पाकिस्तान, चीन और आतंकवाद...भारत दे रहा करारा जवाब

Wed, 25 Nov 2020 02:32 AM IST
हर्ष कक्कड़ हर्ष कक्कड़
हर्ष कक्कड़ Published by: हर्ष कक्कड़ Updated Wed, 25 Nov 2020 02:32 AM IST
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Pakistan, China and terrorism ... India is giving a befitting reply
सुरक्षाबल - फोटो : अमर उजाला

एक सुरंग के जरिये सांबा में घुसपैठ करने वाले चार पाकिस्तानी आतंकवादियों का नगरोटा में हुई हालिया मुठभेड़ में भारतीय सेना ने सफाया कर दिया। यह घटना पाकिस्तानी सत्ता प्रतिष्ठान की बढ़ती हताशा को दर्शाती है। इस सुरंग की खोज और चीन को छोड़ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के चार सदस्यों समेत चुनींदा दूतों को भारत सरकार द्वारा इस मुठभेड़ की जानकारी देने के निर्णय का मतलब है कि भारत के पास पाकिस्तान की इस घटना में संलिप्तता के पक्के सबूत हैं। पाकिस्तान की हताशा के कई कारण हैं। सबसे पहला तो यही कि पाकिस्तान की कश्मीर रणनीति विफल हो रही है। इस साल वे मुश्किल से 20-25 आतंकवादियों की घुसपैठ करा पाए हैं, जिनमें से कई का सफाया हो चुका है। घुसपैठ की अधिकांश कोशिशों को नाकाम कर दिया गया है। मजबूत भारतीय प्रतिशोध के कारण पाक चौकियों और आतंकी शिविरों को नष्ट कर दिया गया है, जिससे आतंकवादियों और पाक सैनिकों, दोनों को जान गंवानी पड़ी है और भारत को कोई नुकसान नहीं हुआ है।


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घाटी में अधिकांश आतंकवादी समूह अभी नेतृत्वविहीन हैं या उनका नेतृत्व ऐसे लोगों के हाथों में है, जिन्हें आतंकवादी गतिविधियों के समन्वय का कोई अनुभव नहीं है। घाटी में हथियार और गोला-बारूद की उपलब्धता कम हो गई है, जिससे पाकिस्तान को हथियारों को भेजने के लिए ड्रोन या तस्करी का सहारा लेना पड़ा। तथ्य यह है कि ये चारों आतंकवादी 11 एके सैंतालिस राइफल लेकर आ रहे थे, जिसका मतलब है कि हथियारों की कमी हो गई है। दूसरा कारण यह कि पाकिस्तान के मुख्य प्रतिनिधि हुर्रियत को पूरी तरह से अलग-थलग कर दिया गया है। उनके विशेषाधिकारों को खत्म कर, हवाला निधियों के प्रवाह को रोक कर, अवैध साधनों द्वारा अर्जित उनकी संपत्तियों की जांच करके, सरकार ने पाकिस्तान से उनके संपर्क को उजागर किया है। फंड की कमी, संगठित विरोध, मुठभेड़ के दौरान फंसे हुए आतंकियों को भगाने के लिए हिंसा, जबरन बंद, मुठभेड़ में मारे गए आतंकियों की अंत्येष्टि जैसे कार्यक्रम बंद हो गए हैं। इसने घाटी में अपेक्षाकृत शांति कायम की है, जिसने पाकिस्तान के इस दावे को झुठला दिया है कि घाटी में सेना का नियंत्रण है। 

तीसरी बात, घाटी में निरंतर अशांति बनाए रखने की चीन की मांग को पूरी करने में भी पाकिस्तान विफल रहा है। हालांकि भारत के साथ अपने मौजूदा गतिरोध के मद्देनजर चीन पाकिस्तान से सीधे सैन्य हस्तक्षेप की मांग करने से हिचकिचा रहा है, लेकिन उसने मांग की है कि पाकिस्तान नियंत्रण रेखा पर अशांति बनाए रखे और घाटी में आतंकवाद को बढ़ाए, ताकि भारतीय सेना का ध्यान विचलित हो सके। पाकिस्तान इन दोनों मांगों को पूरा करने में असमर्थ है। भारत की जवाबी कार्रवाई गंभीर एवं दंडात्मक है, जिससे काफी पाकिस्तानी आतंकी हताहत हुए हैं और उसके सैनिकों के मनोबल पर असर पड़ा है। घाटी में आतंकवाद कम हो रहा है, जिससे ज्यादातर क्षेत्रों में हालात सामान्य हो रहे हैं। इसमें कोई शक नहीं कि चीन पाकिस्तान की विफलताओं के लिए उसकी आलोचना करेगा। 

पाकिस्तान को इस बात का भी डर है कि कोई बड़ी आतंकी घटना को अंजाम देने पर भारत जवाबी कार्रवाई करेगा। परमाणु मिथक का भंडाफोड़ होने पर उसके पास सीमित विकल्प होंगे। कोई भी भारतीय जवाबी कार्रवाई पाकिस्तानी सेना पर दबाव बढ़ाएगी, जो पहले से ही विपक्षी दलों के पीपुल्स डेमोक्रेटिक मूवमेंट के घरेलू दबाव में है, जो सेना के राजनीति में दखल खत्म करने की मांग कर रहा है। नेशनल एसेंबली में अयाज सादिक के कबूलनामे से पाकिस्तानी सैन्य एवं राजनीतिक नेतृत्व में घबराहट है। पाकिस्तान की बदहाल अर्थव्यवस्था ने उसे किसी बड़े सैन्य ऑपरेशन को कुछ दिनों से ज्यादा झेलने की हालत में नहीं छोड़ा है। पाकिस्तान द्वारा डोजियर जारी करना भारत पर दोष मढ़ने की हताश कोशिश है। डोजियर झूठ और त्रुटियों से भरा पड़ा है। चीन को छोड़कर और किसी भी देश ने उसका संज्ञान नहीं लिया है।

इस सप्ताह शुरू होने वाले जिला विकास परिषद के चुनावों की घोषणा से ही साबित होता है कि भारत सरकार घाटी में आतंकवाद को नियंत्रित करने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को फिर से मजबूत करने के प्रति आश्वस्त है। जो माहौल बनाया गया है, वह सभी राजनीतिक दलों को इस चुनाव में भाग लेने के लिए प्रेरित करता है, जिसमें राज्य और केंद्र शामिल हैं। घाटी के ग्यारह
राजनीतिक दलों का समूह पॉलिटिकल एलायंस फॉर गुपकार डेक्लेयरेशन, जो अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद किसी भी राजनीतिक प्रक्रिया में शामिल होने के लिए तैयार नहीं था, ने अपनी भागीदारी की घोषणा की है। इन राजनीतिक दलों ने हमेशा पाकिस्तान के साथ बातचीत की मांग की थी, लेकिन वे अब अलग मंच पर लड़ेंगे।

इन चुनावों के सुचारू संचालन से दुनिया को यह संदेश जाएगा कि घाटी में शांति है और लोकतांत्रिक प्रक्रियाएं शुरू की गई हैं। बड़ी संख्या में मतदाताओं के मतदान करने से यह साबित होगा कि आम कश्मीरियों ने पाकिस्तान और उसके दावे को खारिज कर दिया है तथा स्वेच्छा से अनुच्छेद 370 के निरस्तीकरण को स्वीकार किया है। इससे कश्मीर पर पाकिस्तान के दावे का भी खात्मा होगा और उसके सभी झूठ उजागर हो जाएंगे। विभिन्न देशों के दूतों के समक्ष पाकिस्तान की संलिप्तता के सबूत पेश करने के बाद अब अगर चुनाव से पहले या उस दौरान कोई आतंकी हमला होता है, तो उसका दोष पाकिस्तान पर मढ़ा जाएगा। चीन को लद्दाख में भारत से कड़ी चुनौती मिल रही है। इसने चीनी हान सैनिकों को उस क्षेत्र में सर्दियां बिताने के लिए मजबूर किया है। यथास्थिति बदलने और अपने दावे के क्षेत्र को सुरक्षित करने की उसकी नीति विफल हो गई है।

कैलास रिज पर कब्जा और सर्दियों में भारत के ऊंचाइयों पर टिके रहने के संकल्प ने चीन को चौंका दिया है। फिलहाल भारत को बढ़त हासिल है, हालांकि यह बड़ी महत्वाकांक्षा पालने का वक्त नहीं है। कश्मीर पर वैश्विक दृष्टिकोण को बदलने के लिए चुनाव का सुचारू संचालन आवश्यक है। जब तक इसका कोई निष्कर्ष नहीं निकलता है, सुरक्षा बलों को अत्यंत सावधानी बरतनी चाहिए और चुनावी प्रक्रिया को बाधित करने के पाकिस्तानी कोशिश को ध्वस्त करना चाहिए। यह पाकिस्तान के झूठ को बेनकाब करने का वक्त है, और ऐसा किया ही जाना चाहिए।

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