फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   Pak acting in desperation

हताश पाकिस्तान की तिलमिलाहट, कश्मीर की शांति है परेशानी का कारण

Tue, 03 Sep 2019 04:56 AM IST
Raman Singh हर्ष कक्कड़
हर्ष कक्कड़ Published by: Raman Singh Updated Tue, 03 Sep 2019 04:56 AM IST
विज्ञापन
Pak acting in desperation
इमरान खान - फोटो : a

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा विगत पांच अगस्त को सदन में की गई घोषणा ने पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान को हैरान कर दिया। उसे सबसे अधिक दुख इससे हुआ कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेशों में बांटकर उसे पूरी तरह भारत में मिला लिया गया। घाटी स्थित सभी राजनीतिक पार्टियां और हुर्रियत कॉन्फ्रेंस न केवल अपनी ताकत, बल्कि उन्होंने घाटी में जितनी नफरत फैलाई थी, उसको लेकर भी निश्चिंत थीं। इसीलिए उन्होंने सरकार को चुनौती दी थी कि वह जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाकर तो देखे।


loader

सरकार ने भी इस मामले में पूरी तैयारी कर ली थी। उसने स्थानीय राजनेताओं और अलगाववादियों को अलग-थलग कर दिया और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए घाटी में भारी सुरक्षा बल तैनात कर दिए। उसने शांति स्थापित करने के लिए कर्फ्यू लगा दिया और सभी संचार साधनों को बाधित कर दिया। जानमाल के नुकसान को रोकने के लिए उसने कड़े कदम उठाए, क्योंकि यही एकमात्र उपाय था। इसी कारण तीन सप्ताह से अधिक समय बीतने के बावजूद इस क्षेत्र में शांति बनी हुई है, सुरक्षा बलों की गोलीबारी में किसी की जान नहीं गई है। पीर पंजाल के दक्षिण में सामान्य स्थिति बहाल कर दी गई है, जबकि घाटी में प्रतिबंध अभी लागू हैं। कश्मीर के कुछ हिस्सों में लैंडलाइन फोन सेवा बहाल कर दी गई है।

भारत के इस कदम से हैरान पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मदद की गुहार लगाने लगा। यह उसकी निराशा को दर्शा रहा था। चीन को छोड़कर उसके अपने सभी सहयोगी भारत के पक्ष में खड़े हो गए। संयुक्त राष्ट्र ने उसकी लगातार अपीलों की अनदेखी कर दी, तो पहले मध्यस्थता की इच्छा जताने वाले अमेरिका ने भी बाद में कह दिया कि कश्मीर एक द्विपक्षीय मसला है। यहां तक कि जिन देशों पर पाकिस्तान ने भरोसा किया था, उन्होंने भी भारत का समर्थन किया, जिनमें सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात भी शामिल हैं। पाकिस्तान ने महसूस किया कि वह अकेला पड़ गया है, फिर भी उसने बयानबाजी जारी रखी। जबकि कूटनीतिक रूप से वह हार गया है।

इसके बावजूद आईएसआई (इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस) और आईएसपीआर (इंटर सर्विसेज पब्लिक रिलेशन्स) जैसी उसकी संस्थाओं ने कश्मीर में हिंसा की आग भड़काने के लिए सोशल मीडिया पर फर्जी वीडियो प्रसारित किए। पर उसकी यह कोशिश विफल रही, क्योंकि घाटी में सोशल मीडिया पर प्रतिबंध बरकरार है और सुरक्षा बल तैनात हैं। इसने पाकिस्तान की हताशा और बढ़ा दी। कश्मीरियों के प्रति प्रेम के कारण नहीं, बल्कि घाटी के लोगों को भड़काने की अपनी मंशा के चलते पाकिस्तान वहां सोशल मीडिया के बंद होने की शिकायत कर रहा है।

अब पाकिस्तान ने घुसपैठ की कोशिश शुरू कर दी है, ताकि घाटी में मरणासन्न आतंकवाद को फिर से जीवित किया जा सके। घाटी में आतंकवादियों की संख्या कम है, क्योंकि सुरक्षा बलों की मौजूदगी बढ़ गई है। सरकार के इस फैसले के बाद बहुत कम मुठभेड़ें हुई हैं। फाइनेंशियल ऐक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) से बचने के लिए पाकिस्तान पाक अधिकृत कश्मीर के लोगों और अफगान नागरिकों को घुसपैठ कराने की कोशिश कर रहा है। लेकिन भारत के कठोर और मजबूत प्रतिरोध ने पाक ठिकानों को क्षतिग्रस्त कर उसके नुकसान को बढ़ाया है।

बहुत संभव है कि पाकिस्तान ने घुसपैठियों को स्थानीय आबादी पर हमले करने का काम सौंपा हो, ताकि वह भारतीय सेना या संघ परिवार के सदस्यों को इसका दोषी ठहरा सके और स्थानीय लोगों में आक्रोश बढ़ा सके। इसके बाद उसे वैश्विक स्तर पर भुनाया जाएगा कि भारत ने नरसंहार की कोशिश की। भारत पाकिस्तान की किसी भी बड़ी कार्रवाई का प्रतिकार करने के लिए बाध्य है, जैसा उसने उरी और पुलवामा हमले के बाद किया था। पाकिस्तान को उम्मीद है कि इस तरह की घटना कश्मीर मुद्दे को विश्व मंच पर वापस ले आएगी।

जम्मू-कश्मीर में भारत सरकार के कदम के कारण पाकिस्तान की सरकार को घरेलू मोर्चे पर अपना चेहरा बचाने में मदद मिली है। वहां आवश्यक खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ रही हैं। बेरोजगारी बढ़ी है और महंगाई 10 फीसदी के आसपास है। एफएटीएफ का बड़ा खतरा मंडरा रहा है, जबकि पाकिस्तान ने ब्याज भुगतान के लिए 42 फीसदी और रक्षा के लिए 17 फीसदी बजट आवंटित किया है। सामाजिक और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए वहां कुछ भी नहीं है। पाकिस्तानी सेना हर मोर्चे पर विफलता का सामना कर रही है। भारतीय गोलाबारी से नुकसान के अलावा उसे बलोच स्वतंत्रता सेनानियों और पाकिस्तान तालिबान का भी सामना करना पड़ रहा है। कश्मीर, भारत, धर्म और सेना का समर्थन जैसे मुद्दे पाकिस्तान में लोगों को एकजुट रखते हैं और पाक सरकार की नाकामयाबी से उनका ध्यान भटकाते हैं। वहां मीडिया पर नियंत्रण है और विपक्षी नेताओं को जेल में बंद कर दिया गया है, इसलिए सरकार और सेना की विफलता पर बोलने वाला कोई नहीं है।

इस पृष्ठभूमि में पाकिस्तानी नेताओं के बयान देखने लायक हैं। इमरान खान ने कई बार भारत के झूठे गोपनीय अभियानों का जिक्र किया है, जिससे बालाकोट जैसी कार्रवाई हो सकती है। पाक विदेश मंत्री महमूद कुरैशी ने चेतावनी दी कि दोनों परमाणु संपन्न राष्ट्रों के बीच युद्ध का खतरा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि संघ परिवार के कट्टरपंथियों को नरसंहार के लिए घाटी भेजा जा रहा है। पाक सेना प्रमुख लगातार कह रहे हैं कि वह किसी भी कीमत पर अपने मुल्क की रक्षा करेंगे। गजनवी मिसाइल का परीक्षण इसी उद्देश्य से किया गया है। एक और पाक मंत्री शेख रशीद ने अक्तूबर में युद्ध की चेतावनी दी है। पाकिस्तान किसी भी तरह घाटी में हिंसा फैलाना चाहता है।

उसके लिए समय बीतता जा रहा है। कश्मीर में शांति के साथ दुनिया की दिलचस्पी घटती जा रही है। दुनिया भर के देशों ने कहा है कि यह मुद्दा द्विपक्षीय है। उनके सामने ध्यान देने योग्य और भी मसले हैं। भारत के लिए जरूरी है कि वह पाकिस्तान की योजनाओं को सफल न होने दे। भारत अब घाटी में अपने सुरक्षा बलों को कम नहीं कर सकता। घाटी में जितने ज्यादा दिनों तक शांति रहेगी, पाकिस्तान उतना ही परेशान होगा। भारत ने आज तक पाकिस्तान से जीता है, उसे आगे भी जीतने की योजना बनानी चाहिए।

 

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed