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कुत्ता बिरादरी का दुख

Wed, 17 Jul 2013 09:44 PM IST
मनु पंवार
मनु पंवार Updated Wed, 17 Jul 2013 09:44 PM IST
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pain of dog community

कुत्तों के प्रति इन दिनों नेताओं में कुछ ज्यादा ही वात्सल्य उमड़ रहा है। नरेंद्र मोदी ने कहा है कि उनकी गाड़ी के नीचे कुत्ते का पिल्ला भी कुचला जाता है, तो उन्हें दुख होता है। यह बात सुनकर कुत्ते बड़े इमोशनल हो गए हैं। उनसे नेताओं का यह दुख देखा नहीं जाता। कुत्तों ने तय किया है कि आपस में लड़-भिड़कर मर जाएंगे, लेकिन किसी की गाड़ी के नीचे आकर कुत्ते की मौत नहीं मरेंगे।

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पूरी कुत्ता बिरादरी में इस बात की मुनादी करवा दी गई है। सड़क पर भागते समय सबको सावधानी बरतने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। वैसे कुत्तों को इस बात का बड़ा दुख है कि उनके अधिकार क्षेत्र में राजनीति का दखल बढ़ रहा है। भौंकना, काटना, दुम हिलाना इत्यादि कुत्तों के बुनियादी अधिकारों पर नेताओं ने अतिक्रमण कर लिया है। एक-दूसरे पर बेवजह भौंकने और मौका लगते ही एक-दूसरे को काटने से उन्हें गुरेज नहीं। दुम हिलाना तो आज की राजनीति में सबसे बड़ी काबिलियत हो गई है। राजनीति में दुम हिलाना तरक्की की राह खोलता है। यह कला इतनी ज्यादा लोकप्रिय हो पाई और इसे सरकारी संरक्षण भी हासिल हो गया।
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इसीलिए कुत्ता बिरादरी परेशान है। यह समुदाय अपने सांविधानिक अधिकारों की बहाली तो चाहता ही है, साथ-साथ नेताओं की इस फितरत को रोकने की गुहार भी लगा रहा  है, क्योंकि उनके सामने अपना अस्तित्व बचाने का बड़ा प्रश्न खड़ा हो गया है। स्कूल के ज़माने में किसी चार्ल्स डार्विन नाम के विद्वान के बारे में पढ़ा था। उन्होंने कहा था कि जो योग्य होगा, वही ज़िंदा रहेगा। कुत्तों के सामने सबसे बड़ी चिंता यही है। अगर नेताओं ने उनके सारे काम हड़प लिए, तो फिर उनका तो अस्तित्व ही नहीं बच पाएगा।
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गनीमत यह है कि कुत्तों के कुछ गुण एक्सक्लूसिव हैं। उन पर इनसान चाहकर भी डाका नहीं डाल पाया है। राजनीति में तो बिल्कुल नहीं। ऐसा माना जाता है कि कुत्ता जिसका नमक खाता है, उसके गीत गाता है। हां, कई कुत्ते अच्छे गायक नहीं होते। इसलिए अगर वे गीत न गा पाएं, तो भी नमक का फर्ज निभाते ज़रूर हैं। लोग कुत्तों की वफादारी के कई किस्से सुनाते हैं। लेकिन राजनीति में वफादारी का भला क्या काम? इसलिए हे कुत्ता बिरादरी! तुम्हें ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है। राजनीति तुमसे भौंकना, काटना, दुम हिलाना भले सीख गई हो, वफादारी फिर भी नहीं सीख पाई।

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