फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   our thoughts are the base of or life

पाप पुण्य का निर्धारण हमारे विचारों से होता है

Wed, 10 Feb 2016 09:08 PM IST
अमर उजाला, नई दिल्ली
अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 10 Feb 2016 09:08 PM IST
विज्ञापन

ब्राह्मण और वेश्या एक ही गली में एक दूसरे के पड़ोस में रहते थे। ब्राह्मण अपनी भक्ति के लिए बहुत विख्यात था। वह तप और संयम का जीवन जीता था। वह कभी हंसता नहीं था और स्वयं को महान संत समझता था। भक्तों को वह ईश्वर की ओर ले जाने वाले उस मार्ग का उपदेश देता था, जो केवल त्याग और समर्पण से प्रशस्त था। दूसरी ओर, वेश्या जीवन यापन के लिए अपना शरीर बेच रही थी। एक दिन ब्राह्मण उसे उपदेश देने उसके घर गया। ब्राह्मण ने उसे कहा, तुम बड़ी पापिन हो, तुम्हारे पाप कर्मों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। मृत्यु के पश्चात तुम्हारा परिणाम भयंकर होगा। उस स्त्री ने पूरे मन से प्रायश्चित किया। ईश्वर से उसने क्षमा याचना की। लेकिन उसके पास कोई दूसरी जीविका नहीं थी, इसलिए उसने वेश्यावृति जारी रखी। मगर, उसने एक क्षण भी ईश्वर से क्षमा याचना और विनती करना नहीं छोड़ा। ब्राह्मण और वेश्या की मृत्यु एक ही दिन हुई। मृत्यु के देव उस स्त्री की आत्मा को लेने आए और उसे स्वर्ग की ओर ले गए। जबकि ब्राह्मण की आत्मा को नर्क में डालने के लिए दैत्य पहुंचे। ब्राह्मण चिल्लाया, यह कैसी बात है? अवश्य तुमसे कोई भूल हुई है। मैंने पवित्र जीवन जिया है। मैं नर्क में क्यों जाऊंगा? जबकि पाप का जीवन जीने वाली यह स्त्री स्वर्ग जा रही है! दैत्यों ने कहा, यह स्त्री अपना शरीर बेच रही थी। लेकिन वह सदा ईश्वर के बारे में सोचती रहती थी। वह ईश्वर से क्षमा याचना करती रहती थी। इसके विपरीत तुम हमेशा पूजा-पाठ किया करते थे। तब भी तुम्हारा मन सदा तुम्हारी पड़ोसन के पाप कर्म पर लगा रहता था। हम क्या बनेंगे, इसका निर्धारण हमारे कर्मों से नहीं, बल्कि हमारे विचारों से होता है।

विज्ञापन

-रामकृष्ण परमहंस

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed