विपक्ष, पुलिस और पाकिस्तानी फौज...विद्रोह की फूटी चिंगारी

मरिआना बाबर Updated Fri, 23 Oct 2020 05:43 AM IST
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पाकिस्तान की सेना
पाकिस्तान की सेना - फोटो : पीटीआई

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सिंध प्रांत में बगावत पर उतारु सिंध पुलिस का विद्रोह उस समय टल गया, जब पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल बाजवा को राजनीतिक मामलों में दखल देकर पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के नेता बिलावल भुट्टो जरदारी और सिंध पुलिस बल के आईजी से इसे टालने की सार्वजनिक अपील करनी पड़ी। जनरल बाजवा को बताना पड़ा कि उन्होंने सिंध के आईजी मुश्ताक मेहर के रैंजरों द्वारा अपहरण की घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं।
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इसकी पृष्ठभूमि में एक भयानक एवं शर्मनाक घटना है। पाकिस्तान मुस्लिम लीग (एन) की वरिष्ठ उपाध्यक्ष मरियम नवाज शरीफ कराची के एक होटल में अपने पति कैप्टन (सेवानिवृत्त) सफदर के साथ ठहरी हुई थीं। तड़के चार बजे होटल के कमरे का दरवाजा तोड़कर कैप्टन सफदर को जबरन ब्रिगेड पुलिस स्टेशन ले जाया गया, जो रैंजर्स और सेना के अंतर्गत आता है।   इसका जो कारण बताया गया और जिसके आधार पर सफदर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई, वह बहुत ही मामूली-सा मामला था। उन पर आरोप है कि जब वह जिन्ना की समाधि पर गए, तो उन्होंने जोरदार तरीके से नारा लगाया था कि, 'वोट को इज्जत दो'। यह नारा पीएमएलएन में बहुत प्रसिद्ध हो गया है, जिसने सेना पर पिछले चुनाव में धांधली करने और इमरान खान को प्रधानमंत्री बनाने का आरोप लगाया था।
मरियम और उनका प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट के मंच से ग्यारह विपक्षी दलों की रैली में भाग लेने के लिए कराची पहुंचा था, और उन्होंने एवं बिलावल भुट्टो ने उस रात से पहले कुछ भावनात्मक भाषण दिए थे। अपने भाषणों में उन्होंने प्रधानमंत्री इमरान खान, उनकी सरकार और मुल्क में बढ़ती महंगाई को लेकर तीखी आलोचना की थी, जिसके चलते रोजमर्रा की चीजें आम आदमी की पहुंच से बाहर हो गई हैं। दूसरा मुद्दा, जो उन्होंने और छोटे प्रांतों के नेताओं ने उठाया, वह यह कि सशस्त्र बलों को राजनीति में दखल नहीं देना चाहिए। साथ ही उन्होंने उनकी लोगों को गायब करने, फर्जी मुठभेड़ में मारने और किसी को भी आतंकवादी बताकर एक ही बार में काम खत्म कर देने की नीति की आलोचना की और कहा है कि सशस्त्र बलों को यह नीति छोड़नी होगी।
उन्होंने सभी नागरिकों को समान अधिकार दिए जाने की मांग की। हाल के दौर में सोती हुई महिला के कमरे का दरवाजा तोड़कर घुसने की बात कभी सुनी नहीं गई। केवल जिया उल हक की तानाशाही के दौरान इस तरह नागरिक अधिकारों का उल्लंघन किया गया था। पूरा मुल्क इस घटना से स्तब्ध रह गया और सोशल मीडिया पर आक्रामक सवाल पूछे जाने लगे। बिलावल भुट्टो, जिनकी मरियम मेहमान थीं, ने कहा, 'मैं शर्मिंदा हूं और हमारे प्रांत में जो कुछ हुआ है, उसके कारण मैं अपना चेहरा दिखाने लायक नहीं हूं। सुबह-सुबह मरियम और सफदर को परेशान करना और सफदर को गिरफ्तार करना सिंध के लोगों का अपमान है, जिन्होंने मरियम और उनके प्रतिनिधिमंडल को पीडीएम जलसा में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था।'

संघीय सरकार ने कुछ साल पहले कानून-व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए रेंजरों को सिंध भेजा था। वे सेना का हिस्सा हैं। पहले भी ऐसी शिकायतें आई हैं कि रेंजरों ने कानून तोड़े हैं और नागरिकों को परेशान किया है। इस बार ऐसा लगता है कि संभवतः रावलपिंडी स्थित सुरक्षा प्रतिष्ठान ने रेंजरों को सिंध के एक आईजी के अपहरण का आदेश दिया। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था। आईजी, सिंध को जबरदस्ती बख्तरबंद वाहन में डाल दिया गया और ब्रिगेड थाने ले जाया गया। वहां उन्हें सफदर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए मजबूर किया गया। 

अपने प्रांत के पुलिस बल, जिसका अपमान किया गया, के समर्थन में बिलावल ने कहा कि इस प्रांत में ऐसे महत्वपूर्ण संस्थान के काम को राष्ट्रीय सुरक्षा माना जाना चाहिए और प्रांत में शांति बनाए रखनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर मेरी पुलिस के लिए कोई सम्मान नहीं बचा है, तो वे काम कैसे करेंगे। यह बिल्कुल अस्वीकार्य है। पहली बार किसी राजनेता ने सेना प्रमुख जनरल बाजवा और आईएसआई प्रमुख जनरल फैज को चुनौती दी है कि वे सिंध के आईजी के अपहरण और सफदर की गिरफ्तारी के लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने उनसे जवाब मांगा है।  जब पूरे देश में यह खबर फैली कि सिंध के आईजी का अपहरण कर लिया गया और उन पर सफदर, मरियम और उनके दो सौ समर्थकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए दबाव डाला जा रहा था, तो पुलिस बल में गुस्सा था।

सबसे पहले आईजी पुलिस ने दो महीने के अवकाश के लिए आवेदन दिया। जल्द ही पूरे प्रांत के अन्य आईजी ने भी छुट्टी मांगी। छुट्टी मांगने का क्रम छोटे अधिकारियों तक भी पहुंच गया। सिंध पुलिस बल में विद्रोह को भांपते हुए बिलावल भुट्टो अपने मुख्यमंत्री मुराद अली शाह के साथ आईजी के घर गए और उन्हें अपनी छुट्टी की अर्जी वापस लेने के लिए मनाया। इंटर सर्विस पब्लिक रिलेशंस द्वारा जारी बयान के मुताबिक, इसी बीच जनरल बाजवा ने बिलावल भुट्टो और सिंध के आईजी मुश्ताक मेहर को फोन करके कहा कि उन्होंने कराची कोर कमांडर को मामले की तत्काल जांच कर जितनी जल्दी हो, रिपोर्ट देने के लिए कहा।

जनरल बाजवा ने रिपोर्ट देने के लिए दस दिन का समय दिया, लेकिन लोगों ने इस पर भी सवाल उठाया कि जब उन्हें मालूम है कि इसका जिम्मेदार कौन है, तो फिर इतना समय लगाने की क्या जरूरत है। लोग आईएसआई प्रमुख जनरल फैज पर उंगली उठा रहे हैं। लोगों को आशंका है कि अतीत की तरह इन रिपोर्टों को सार्वजनिक नहीं किया जाएगा और बयान जारी कर दिया जाएगा कि मामले को सुलझा लिया गया है।  बिलावल भुट्टो ने कराची की घटना का तत्काल संज्ञान लेने और पारदर्शी जांच कराने का आश्वासन देने के लिए जनरल बाजवा की सराहना की। मरियम ने ट्वीटर पर सिंध पुलिस बल की सराहना करते हुए कायदे आजम की उक्ति को उद्धृत करते हुए सलाह दी कि लोक सेवकों को किसी दबाव का शिकार नहीं होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि नागरिकों को डर के साए को तोड़ते देखना, संविधान की सर्वोच्चता के लिए खड़ा होना और लंबे समय से खोए हुए अपने अधिकारों को फिर से हासिल करते देखना सुखद है। षड्यंत्रकारी बुरी तरह से उजागर हुए हैं। उन्होंने समर्थन देने और स्पष्ट रुख के लिए बिलावल भुट्टो का धन्यवाद किया और कहा कि पाकिस्तान बदल गया है। लेकिन यह जानना जरूरी है कि सिंध के आईजी ने अपनी छुट्टी रद्द नहीं की है, बल्कि इसे तत्काल स्थगित किया है। सब कुछ जांच रिपोर्ट पर निर्भर करता है।
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