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Opinion: टैरिफ और अवसर, भारत-ईयू एफटीए एक मील का पत्थर

Sat, 31 Jan 2026 07:35 AM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नितिन गौतम Updated Sat, 31 Jan 2026 07:35 AM IST
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सार
विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा ने भारत को सलाह दी है कि टैरिफ जैसी रुकावट पर ध्यान देने के बजाय भारत को व्यापारिक अवसरों पर फोकस करना चाहिए। अजय बंगा ने कहा कि भारत-ईयू एफटीए इसी दिशा में एक मील का पत्थर है।
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Opinion Tariffs and Opportunities India-EU FTA Milestone
विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा। - फोटो : amar ujala

विस्तार

विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा द्वारा भारत को दी गई सलाह कि वह टैरिफ पर कम और व्यापारिक अवसरों पर अधिक ध्यान दे, महज एक टिप्पणी नहीं है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के बदलते मिजाज में भारत की भूमिका को रेखांकित करने वाला संकेत भी है। यह बयान ऐसे समय में आया है, जब वैश्विक व्यापार भू-राजनीतिक तनावों और अमेरिका की उच्च टैरिफ वाली नीतियों की वजह से अनिश्चितता से घिरा हुआ है। यही कारण है कि आज भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं को नए अवसरों की तलाश में सक्रिय होना पड़ा है।


दरअसल, भारत की अर्थव्यवस्था में निर्यात का हिस्सा अब भी कुल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का तकरीबन 20-22 फीसदी ही है, जबकि कई अन्य देशों में यह 40 से 60 फीसदी तक पहुंच चुका है। ऐसे में, टैरिफ की दीवारें खड़ी करने के बजाय, नए बाजारों में प्रवेश और व्यापार समझौतों के जरिये वृद्धि हासिल करना अधिक फायदेमंद हो सकता है। भारत-ईयू एफटीए इसी दिशा में एक मील का पत्थर है, जिसमें दोनों पक्षों ने टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को कम किया है और जिसकी सराहना विश्व बैंक ने भी की है।


वर्तमान में भारत के प्रमुख निर्यात क्षेत्र वस्त्र, फार्मास्युटिकल, आईटी सेवाएं, रत्न-आभूषण और इंजीनियरिंग का सामान हैं। यूरोपीय संघ के बाजार में प्रवेश से इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, कृषि उत्पाद और हरित ऊर्जा से जुड़े उत्पादों के क्षेत्र में नई संभावनाएं खुलेंगी। हालांकि, इससे घरेलू उद्योगों, खासकर एमएसएमई को अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा का सामना करने के लिए तैयार करना होगा। इसलिए सरकार को व्यापार समझौतों की राह को आगे बढ़ाने के साथ ही घरेलू उद्योगों को सब्सिडी, कौशल विकास और तकनीकी सहायता पर भी ध्यान देना होगा।

विश्व बैंक के अध्यक्ष ने पांच ऐसे क्षेत्रों की पहचान की है, जिनमें व्यापक रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकते हैं। ये हैं-अवसंरचना, कृषि, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा, पर्यटन और मूल्यवर्धित विनिर्माण। इन क्षेत्रों में निवेश बढ़ाकर भारत न केवल टैरिफ के दबाव से उबर सकता है, बल्कि वैश्विक आपूर्ति शृंखला में अपनी स्थिति भी मजबूत कर सकता है। बंगा का यह कहना भी महत्वपूर्ण है कि पिछले बीस वर्षों में वैश्विक व्यापार चौगुना हो गया है, जिसमें उभरते बाजारों की हिस्सेदारी 20 से बढ़कर 40 फीसदी हो गई है। चूंकि, भारत वैश्विक व्यापार का एक प्रमुख घटक है, लिहाजा उसे अवसरों का लाभ उठाने के लिए नीतिगत सुधारों पर ध्यान देना होगा।
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