{"_id":"6455ace89545b141b50b3784","slug":"online-finance-fraud-rising-in-india-cyber-frauds-due-to-digital-payments-2023-05-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"चिंता: ऑनलाइन लेन-देन में सेंध, बढ़ते खतरे का आभास देते हैं धोखाधड़ी के मामले","category":{"title":"Opinion","title_hn":"विचार","slug":"opinion"}}
चिंता: ऑनलाइन लेन-देन में सेंध, बढ़ते खतरे का आभास देते हैं धोखाधड़ी के मामले
विज्ञापन
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
सार
आगे पढ़ने के लिए लॉगिन या रजिस्टर करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
फ्री ई-पेपर
सभी विशेष आलेख
सीमित विज्ञापन
सब्सक्राइब करें
Online Fraud
- फोटो :
istock
विस्तार
भारत में ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी एक बढ़ती हुई समस्या है, जिसमें धोखाधड़ी के शिकार होने वाले लोगों की संख्या बढ़ रही है। भारत के 60 करोड़ से ज्यादा इंटरनेट कनेक्शन के साथ डिजिटल रूप से जुड़ने के कारण अपराधियों के लिए ऑनलाइन धोखाधड़ी करना आसान हो गया है। लेकिन पीड़ितों को अक्सर अपने नुकसान की भरपाई करने के लिए बहुत कम सहारा मिलता है। यह एक वैश्विक घटना है, एफबीआई ने पिछले वर्ष अमेरिका में 3.3 अरब डॉलर की ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी की सूचना दी थी।
भारतीय रिजर्व बैंक की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, देश में मार्च 2023 तक पिछले सात महीनों में 1,750 करोड़ रुपये की ऑनलाइन धोखाधड़ी हुई है। यह भारत में एक वर्ष में किए गए कुल डिजिटल लेन-देन की तुलना में छोटी रकम है, क्योंकि देश में एक वर्ष में 30 लाख करोड़ रुपये के मूल्य के साथ 12,000 करोड़ से अधिक लेन-देन का अनुमान है। रिजर्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2023 में देश में धोखाधड़ी से जुड़े 2.25 लाख लेन-देन हुए, जिसमें लोगों को कुल 333 करोड़ रुपये की चपत लगी। हालांकि इस धोखाधड़ी को प्रतिशत के संदर्भ में देखें, तो मार्च में यह ऑनलाइन लेन-देन के 0.0022 फीसदी के बराबर, और कुल धनराशि के 0.13 फीसदी के बराबर है। इसके बावजूद लगभग 2,000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी चिंता का कारण है।
ऐसा क्यों हो रहा है? इसकी एक मुख्य वजह यह है कि हमारे देश में आम लोगों में ऑनलाइन लेन-देन के मामले में शामिल जोखिम के प्रति जागरूकता की कमी है। देश में अनेक लोग वित्तीय लेन-देन के लिए इंटरनेट का उपयोग करने के आदी नहीं हैं, न ही वे धोखाधड़ी से बचने के लिए विभिन्न सुरक्षा उपायों से परिचित हैं। एक अन्य कारक प्रभावी विनियमन और प्रवर्तन की कमी है। कई मामलों में ऑनलाइन धोखाधड़ी करने वाले कानून की खामियों का फायदा उठाते हुए या ऑनलाइन बैंकिंग प्रणाली की कमजोरियों का फायदा उठाते हुए बेखौफ धोखाधड़ी करने में सक्षम होते हैं।
जालसाज भी बहुत परिष्कृत तकनीक का उपयोग कर रहे हैं, प्रशिक्षण दे रहे हैं और संगठित तरीके से काम कर रहे हैं, जैसा कि जामताड़ा, नूंह और अन्य मामलों में पाया गया है। जालसाजों द्वारा संगठित कॉल सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं, जिनमें कॉल एजेंटों को लोगों को गुमराह करने और धोखा देने का काम सौंपा गया है। कई कंपनियां भी धोखाधड़ी का शिकार हुई हैं, ई-मेल को बीच में रोककर धोखेबाजों के खातों में भुगतान करने के लिए भुगतान निर्देशों को संशोधित किया गया है। बैंकों को एटीएम बूथों पर भी धोखाधड़ी का सामना करना पड़ा है, जालसाजों ने बैंक ग्राहकों को बेवकूफ बनाने के लिए नए तरीके ईजाद किए हैं, जिस कारण बैंक भी कई बार सोचते हैं कि नकदी प्राप्त नहीं हुई है।
लोगों को सतर्क रहने और देश में कई अलग-अलग प्रकार की ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी (जिनमें हरेक की अपनी विशेषता या खास तरीके हैं) के बारे में खुद को शिक्षित करने की आवश्यकता है। फिशिंग घोटाले, पहचान की चोरी, क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी और निवेश घोटाले कुछ सबसे आम धोखाधड़ी हैं। फिशिंग घोटालों में कपटपूर्ण ई-मेल या वेबसाइटों का उपयोग होता है, जो किसी वैध कंपनी, जैसे बैंक या क्रेडिट कार्ड कंपनी से आई प्रतीत होती हैं। इस तरह की धोखाधड़ी को उपयोगकर्ताओं की संवेदनशील जानकारी, जैसे लॉगिन क्रेडेंशियल या क्रेडिट कार्ड नंबर प्रकट करने के लिए तैयार किया गया है। पहचान की चोरी में धोखाधड़ी करने वाले खाते खोलने या अनधिकृत लेन-देन करने के लिए चुराई गई व्यक्तिगत जानकारी, जैसे आधार कार्ड और पैन या बैंक खाता संख्या का उपयोग करते हैं।
क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी में खरीदारी करने या नकदी निकालने के लिए जालसाजों द्वारा क्रेडिट कार्ड का अवैध उपयोग किया जाता है। इस तरह की धोखाधड़ी स्किमर्स या क्रेडिट कार्ड की जानकारी पाने वाले अन्य उपकरणों के उपयोग के साथ-साथ चुराए गए क्रेडिट कार्ड नंबरों के उपयोग से हो सकती है। निवेश घोटालों में झूठी या भ्रामक जानकारी देकर निवेशकों को कपटपूर्ण योजना में निवेश करने के लिए राजी करना शामिल है। ये घोटाले बहुत परिष्कृत हो सकते हैं, जिनमें निवेशकों को धोखा देने के लिए अक्सर नकली वेबसाइटों, झूठे प्रशंसापत्रों और अन्य तरीकों का उपयोग होता है। ज्यादा चालाक धोखेबाज एकाकी, अमीर लोगों से ऑनलाइन दोस्ती करते हैं और उनके वीडियो शूट कर उन्हें ब्लैकमेल करते हैं या उन्हें वास्तविक ऑनलाइन क्रिप्टो या विदेशी मुद्रा व्यापार योजनाओं में निवेश करने के लिए धोखा देते हैं।
जालसाजों ने मोबाइल फोन ऐप भी तैयार किए हैं, जो एक बार लोड होने के बाद फोन डाटा को अपने कब्जे में ले लेते हैं और धोखेबाजों को भेज देते हैं। हाल ही में एक मामला आम लोगों को फर्जी एसएमएस भेजने का सामने आया है, जिसमें बिलों का भुगतान न करने पर उनकी बिजली काट देने की धमकी दी गई है। इसमें उपयोगकर्ता को एक लिंक पर क्लिक करने के लिए कहा जाता है। यह उन्हें जालसाजों के कॉल सेंटर से जोड़ता है, जो उपयोगकर्ताओं से ओटीपी मांगकर धोखा देता है और उनके खातों से धन की हेराफेरी करता है।
कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाकर ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार होने से बचा जा सकता है। सबसे पहले तो यह जानना महत्वपूर्ण है कि ऑनलाइन लेन-देन में जोखिम है और ऑनलाइन संवेदनशील जानकारियां देते हुए हमें सावधानी बरतनी चाहिए। दूसरी बात, मजबूत पासवर्ड बनाएं और कई खातों के लिए एक ही पासवर्ड का उपयोग करने से बचें। किसी तरह की अनधिकृत गतिविधि का पता लगाने के लिए नियमित रूप से बैंक स्टेटमेंट और क्रेडिट रिपोर्ट की निगरानी करना भी अच्छा विचार है।
यदि आप ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार हो जाते हैं, तो क्षति को कम करने के लिए तुरंत कार्रवाई करना महत्वपूर्ण है। धोखाधड़ी की सूचना देने के लिए आप अपने बैंक या क्रेडिट कार्ड कंपनी से संपर्क करने के साथ-साथ प्रवर्तन अधिकारियों (पुलिस में) के पास शिकायत दर्ज करा सकते हैं। वित्तीय लेन-देन के लिए इंटरनेट का उपयोग बढ़ने से ऑनलाइन धोखाधड़ी एक बड़ी समस्या बन गई है। लेकिन जागरूकता बढ़ाकर धोखाधड़ी को रोकना और अन्य नकारात्मक परिणामों से खुद को बचाना संभव है।