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प्याज के तेवर से डर लगता है

Wed, 13 Feb 2013 12:14 AM IST
सहीराम
सहीराम Updated Wed, 13 Feb 2013 12:14 AM IST
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onion rate scared

अपने उन्हीं पुराने तेवरों में फिर लौट आया है जी, प्याज। कहते हैं कि कुछ लोगों की फितरत नहीं बदलती। मसलन, नेता की नहीं बदलती, चोर की भी नहीं बदलती। इसीलिए तो कहा जाता है कि चोर चोरी से जाए, पर हेराफेरी से न जाए। फितरत धीरे-धीरे धर्म हो जाती है। जैसे सांप की फितरत है डसना, काटना। यह उसका धर्म है। वह धर्म को छोड़ेगा, तो फिर उसे सेपेरे की बीन पर नाचना ही पड़ेगा।

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खैर जी, प्याज की फितरत भी नहीं बदली है। बल्कि रुलाना अब तो उसका धर्म बनता जा रहा है। किसी दिन बाजार में प्याज सस्ता हो गया, तो कोई यकीन ही नहीं करेगा। हालांकि ऐसा रामराज कभी आएगा नहीं। खैर जी, आम तौर पर यही माना जाता है कि प्याज रसोई में ही रुलाता है, वह भी तब, जब वह चाकू के नीचे आता है। पर अब तो वह बड़ी-बड़ी कंपनियों के स्टोरों में भी रुलाता है। फिर चाहे ये कंपनियां कितनी ही छूट दे लें। राहत की तलाश में अगर सब्जी मंडी पहुंच जाओ, तो वहां भी वह बिना रुलाए नहीं छोड़ता।
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फितरत ऐसी हो गई है कि वह सिर्फ खरीदने वालों को ही नहीं रुलाता, पैदा करनेवाले किसान को भी रुलाता है। पैदा करने वाला कहता है, मैं लुट रहा हूं, खरीदने वाला कहता है, मुझे लूटा जा रहा है। पैदा करनेवाला कहता है, मुझे कीमत ही नहीं मिल रही, देखो कौड़ियों के भाव बिक रहा है।
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खरीदने वाला कहता है कि मैं इसकी कीमत नहीं दे सकता भाई, यह तो सोना हो गया है। इतने पर ही बस नहीं है। प्याज तो बड़ी-बड़ी राजनीतिक पार्टियों के भी आंसू निकाल देता है। जैसे ही पता चलता है कि प्याज ने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं, सरकारें हिल जाती हैं, थरथर कांपने लगती हैं।

कभी प्याज गरीब का साथी था। वह उसकी रोटी की पोटली में रहता था। पर अब वह भी इलीट हो गया है। अब वह सत्ता बनाता है, बिगाड़ता है, तख्ते पलटता है। वह किसी का साथ नहीं देता, बस फायदा देखता है। यानी पक्का किंगमेकर हो गया है। जरा-सा उसे कोई भुलाने की कोशिश करता है, जरा-सी उसकी बेकद्री करता है, तो वह फिर अपने पुराने तेवर में लौट आता है।


इधर वह फिर अपने उन्हीं तेवरों में लौट आया है। चिंता अपनी नहीं। हम तो प्याज नहीं, तो मिर्च से काम चला लेंगे। चिंता उनके लिए है, जो राज कर रहे हैं, क्योंकि यह चुनाव का साल है और बिजली-पानी के साथ अगर उसका गठजोड़ हो गया, तो सरकार को बचानेवाला कोई नहीं होगा।

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