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नौकरी के लिए सिफारिश या योग्यता क्या है जरूरी, जान लीजिए
जयरामदास दीन
Updated Tue, 24 Feb 2015 09:28 AM IST
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राजा करणी सिंह को अपने दरबार में सलाहकार के तौर पर योग्य और विश्वसनीय व्यक्ति की तलाश थी। उन्होंने अपने आस-पास के युवकों को परखना शुरू किया। उन्होंने दो युवकों को चुना। उनमें से एक का चयन करना था। राजा दुविधा में थे। वह किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पा रहे थे। वह उलझन में थे, तभी एक महात्मा राजमहल में पधारे। अहोबा गुरु नाम के वह संत कभी-कभी महल में आते रहते थे।
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राजा करणी सिंह ने अहोबा गुरु के सामने दरबार की जरूरत और अपनी दुविधा रखी। उन्होंने कहा, मैं यह तय नहीं कर पा रहा हूं कि दोनों युवकों में से किसका चयन करूं। अहोबा गुरु ने पूछा, कौन हैं ये दोनों? राजा ने बताया, एक तो राज परिवार से ही संबंधित है, पर दूसरा बाहर का है। उसके पिता पहले हमारे सेवक हुआ करते थे। उनका अब देहांत हो चुका है। उनका यह बेटा पढ़ा-लिखा सुयोग्य है।
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कुछ पल रुककर राजा ने दूसरे युवक के बारे में बताना शुरू किया, राज परिवार से संबंधित दूसरा युवक भी अच्छा है, मगर उसकी योग्यता 'मामूली' है। यह सुनकर अहोबा ने पूछा, आपका मन किसके पक्ष में है? राजा ने अपनी दुविधा स्पष्ट करते हुए कहा, मेरे मन में द्वंद्व यह है स्वामी कि राज परिवार का रिश्तेदार कम योग्य होने पर भी अपना है, और...यह कहकर वह चुप हो गए।
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यह सुनकर अहोबा गंभीर हो गए, पर कुछ कहा नहीं। वह इधर-उधर की बातें करने लगे। थोड़ी देर बाद फिर किसी प्रसंग के छिड़ने पर उन्होंने कहा, राजन! रोग शरीर में उपजता है, तो वह भी अपना ही होता है, पर उसका उपचार जंगलों और पहाड़ों पर उगने वाली जड़ी-बूटियों से होता है। ये चीजें अपनी नहीं होकर भी हितकर होती हैं।