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मौत के मुंह से कैसे बचा, ईश्वर का चमत्कार था या कुछ और

Thu, 29 Jan 2015 12:31 PM IST
सुदर्शन सिंह
सुदर्शन सिंह Updated Thu, 29 Jan 2015 12:31 PM IST
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on a laugh stalled the raised sword

यूनान के बादशाह रोगी हो गए थे। हकीमों की चिकित्सा कोई लाभ नहीं दे रही थी। अंत में हकीमों ने मिलकर सलाह की। उन्होंने कुछ लक्षण बताए और कहा कि जिस मनुष्य में ये लक्षण हों, उसका पित्ताशय मिले बिना बादशाह के रोग को दूर करनेवाली दवा नहीं बन सकती।

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राजसेवक इधर-उधर दौड़े और एक बालक को पकड़ लाए। बालक एक निर्धन परिवार का था। उसके और भी भाई थे। उसके माता-पिता ने पर्याप्त धन लेकर अपने पुत्र को वध के लिए दे दिया था। बादशाह ने काजी से पुछवाया कि क्या करना चाहिए, तो उसने फतवा दे दिया-मुल्क के शहंशाह की जान बचाने के लिए रिआया में किन्हीं एक-दो की जान लेनी हो, तो वह गुनाह नहीं है।
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हकीमों की व्यवस्था के अनुसार लड़के को बादशाह के सामने खड़ा किया गया। हकीम अपनी तैयारी करके बैठ गए। जल्लाद ने तलवार उठाई। तभी लड़के ने आकाश की ओर देखा और हंस पड़ा। बादशाह ने पूछा, लड़के, तू हंसा क्यों?
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लड़का बोला, मां-बाप जिस संतान की रक्षा के लिए प्राण देते थे, उसी संतान को उन्होंने मारने के लिए बेच दिया। जो काजी न्यायमूर्ति होता है, उसने एक निरपराध की हत्या का फतवा दे दिया। बादशाह, जो मुल्क का रक्षक है, अपनी निर्दोष प्रजा के एक बालक की हत्या करवा रहा है।


ऐसी दशा में असहाय मनुष्य किसका आश्रय ले? मैं इस असहाय अवस्था में पहुंच गया हूं। अभी मैं परमात्मा की ओर देखकर हंसा कि ईश्वर, संसार की लीला तो देख ली, अब तेरी लीला देखनी है। जल्लाद की उठी तलवार का तू क्या करेगा?

'मुझे माफ कर बेटा, यह तलवार अब फिर नहीं उठेगी।' बादशाह ने उस दरिद्र बालक से क्षमा मांगी।

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