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जेहाद पर अब चुप्पी तोड़नी ही होगी

Sun, 07 Sep 2014 07:34 PM IST
तवलीन सिंह
तवलीन सिंह Updated Sun, 07 Sep 2014 07:34 PM IST
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Now it would be to break silence on Jihad

जिस दिन ओसामा बिन लादेन के पूर्व सेनापति ने ऐलान किया कि उनका जेहाद अब भारत के अंदर होने वाला है, उसी दिन राहुल गांधी अमेठी की एक दरगाह में माथा टेकते दिखाई दिए। दोनों घटनाओं में वास्ता क्या है? हाल ही में केपीएस गिल ने अपने एक लेख में लिखा था कि 26/11 के बाद छह वर्ष गुजर चुके हैं, पर राष्ट्र की सुरक्षा आज भी उतनी ही कमजोर है, जितनी छह वर्ष पहले थी। यानी कांग्रेस के हाथों में जब देश की बागडोर थी, तब देश को आतंकवाद से सुरक्षित करने के लिए कदम नहीं उठाए गए। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने 26/11 के फौरन बाद कहना शुरू कर दिया था कि यह हमला जेहाद नहीं, कुछ और था।

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याद कीजिए, किस तरह इन लोगों ने कहना शुरू किया था कि हिंदूवादियों ने मुंबई पुलिस के उन अधिकारियों को खत्म करने के लिए यह षड्यंत्र रचा था, जिनकी जांच ये अफसर कर रहे थे। याद कीजिए, किस तरह कांग्रेस के नेताओं ने बयान दिए थे उस समय, जिनका मकसद था संघ पर दोष थोपना। बाद में जब साबित हुआ कि इसके पीछे लश्कर का हाथ था, तो ये लोग चुप हो गए।
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मुंबई पुलिस को तो आतंकवादी हमला होने की खबर फौरन ही मिल गई थी, पर आला पुलिस अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे, जब तक दिल्ली से कमांडो नहीं पहुंचे। इनको पहुंचने में आठ घंटे से ज्यादा लगे, जिस दौरान अनेक लोगों की जानें गईं। मुंबई पुलिस को प्रशिक्षण दिया गया होता आतंकवादियों से मुकाबला करने का, तो इतने लोग न मरते। आज भी इस देश के आम सुरक्षा कर्मियों के पास हथियार के रूप में लाठियां होती हैं। इनसे कैसे कर सकेंगे मुकाबला ऐसे जेहादियों से, जो लैस हैं अत्याधुनिक हथियारों से? ऊपर से ये मजहब के नाम पर खून-खराबे को जायज ठहराते हैं। बगदादी और जवाहिरी जैसे हत्यारों की निंदा करनी चाहिए, पर अमूमन ऐसा होता नहीं, क्योंकि इसे सांप्रदायिक मामला मान लिया जाता है।
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सो जब उनसे उन बेचारे अमेरिकी पत्रकारों के बारे में पूछा जाता है जिनके गले काटे गए हैं, तो जवाब मिलता है कि यह भी अमेरिका की चाल हो सकती है। सच यह है कि कई भारतीय मुसलमान 9/11 का दोष अमेरिकी सरकार पर लगाते हैं, वैसे ही, जैसे 26/11 का दोष संघ पर लगाया जाता है। दुनिया की बात मैं नहीं कर सकती, पर भारत में यह माहौल बना है कांग्रेस की गलत नीतियों के कारण।

दशकों से मुस्लिम समुदाय को बताती आई है कांग्रेस कि उनका दोष नहीं हो सकता है किसी हाल में। उनको बताती आई है कि यदि भारत के खिलाफ जेहाद करने को भी तैयार हो गए हैं कुछ सिरफिरे नौजवान, तो इसलिए, क्योंकि हमारे यहां विवादित ढांचा गिराया गया, फिर दंगे हुए थे गुजरात में। अगर सचमुच यही कारण होते जेहाद के, तो कहां से पैदा हुए बोको हरम और आईएस जैसे खतरनाक जेहादी संगठन? कहां से पैदा हुए लश्कर-ए-तैयबा और तालिबान?


सच यह है कि इन संस्थानों का एक ही मकसद है-अमेरिका, इस्राइल और भारत का नाश करना, क्योंकि इन देशों को वे इस्लाम का दुश्मन मानते हैं। इस हकीकत का सामना करना पड़ेगा भारत के मुस्लिम रहनुमाओं को, वर्ना जीत होगी जेहादियों की।

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