फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   Now India will become an economically competitive : New logistic policy n Gatishakti scheme will give speed

अब आर्थिक प्रतिस्पर्धी देश बनेगा भारत : नई लॉजिस्टिक नीति और गति शक्ति योजना का आगाज देगा रफ्तार

Wed, 26 Oct 2022 06:47 AM IST
Jayantilal Bhandari जयंतीलाल भंडारी
Updated Wed, 26 Oct 2022 06:47 AM IST
विज्ञापन
सार
इससे देश में उद्योग और कारोबार, निर्यात और निवेश तथा रोजगार के मौके बढ़ने से देश की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ेगी और आम आदमी की मुट्ठियों में भी अधिक विकास की खुशियां पहुंचते हुए दिखाई देगी।
loader
Now India will become an economically competitive : New logistic policy n Gatishakti scheme will give speed
indian economy - फोटो : istock

विस्तार

इन दिनों राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक विचार मंथन में यह कहा जा रहा है कि भारत की नई लॉजिस्टिक नीति और गति शक्ति योजना का आगाज अभूतपूर्व रणनीतियों के साथ हुआ है। यदि इन दोनों योजनाओं को अपेक्षित रूप से अंजाम दिया गया, तो भारत जहां दुनिया में प्रमुख आर्थिक प्रतिस्पर्धी देश बन सकेगा, वहीं 21वीं सदी में भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया में अपना परचम फहराते हुए आगे बढ़ेगी। 



इन दोनों योजनाओं की बुनियाद पर देश से निर्यात और निवेश तेजी से बढ़ेंगे, उद्योग-कारोबार और कृषि क्षेत्र की तस्वीर संवारी जा सकेगी, इसके अलावा महंगाई में कमी और रोजगार में वृद्धि के साथ विकास के नए अध्याय लिखे जा सकेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विगत 17 सितंबर को लांच की गई और 21 सितंबर को कैबिनेट से मंजूर की गई बहुप्रतीक्षित नई लॉजिस्टिक पॉलिसी देश की ऊंची लॉजिस्टिक लागत कम करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है। 


इस नई नीति को लांच करते हुए  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इससे माल परिवहन की लागत घटेगी और सभी प्रकार के उद्योग-कारोबार को बढ़ावा मिलेगा। नई नीति ऊंचे लॉजिस्टिक अंतर को पाटने और भारत को वैश्विक आपूर्ति शृंखला में प्रतिस्पर्धी बनाने में अहम भूमिका निभाएगी। साथ ही, मेक इन इंडिया और स्टार्ट-अप इंडिया को भी यह मजबूती प्रदान करेगी। इससे वैश्विक व्यापार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ेगी और भारत दुनिया का नया मैन्यूफैक्चरिंग हब बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा। 

नई लॉजिस्टिक नीति दरअसल कोई एक वर्ष पहले 13 अक्तूबर, 2021 को शुरू हुई देश की महत्वाकांक्षी गति शक्ति योजना की ही अनुपूरक है। इसे नेशनल इन्फ्रास्ट्रक्चर मास्टर प्लान नाम भी दिया गया है। गति शक्ति योजना करीब 100 लाख करोड़ रुपये की महत्त्वाकांक्षी परियोजना है, जिसका लक्ष्य देश में एकीकृत रूप से बुनियादी ढांचे का विकास करना है। वस्तुतः देश में सड़क, रेल, जलमार्ग आदि का जो इन्फ्रास्ट्रक्चर हैं, वह अलग-अलग 16 मंत्रालयों और विभागों के अधीन हैं, उनके बीच में सहकार व समन्वय बढ़ाना गति शक्ति योजना का मुख्य फोकस है। 

यह कोई छोटी बात नहीं है कि विभागीय बाधाएं हटाने और विभिन्न 16 विभागों में समन्वय के लिए गति शक्ति योजना और बुनियादी ढांचा कनेक्टिविटी परियोजनाओं के समन्वित कार्यान्वयन के लिए योजना की घोषणा के बाद महज एक साल में डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार कर लिया गया है। साथ ही, रेलवे, सड़क, बंदरगाह, जलमार्ग, हवाई अड्डे, सार्वजनिक परिवहन और लॉजिस्टिक्स इन्फ्रास्ट्रक्चर के रूप में चिह्नित किए गए सात इंजनों के तहत भारतमाला (राजमार्ग), सागरमाला (तटीय नौवहन), उड़ान (वायु सेवाओं), भारत नेट (दूरसंचार सेवाओं), रेलवे विस्तार और अंतर्देशीय जलमार्ग विस्तार जैसी महत्त्वपूर्ण योजनाओं को समन्वित रूप से आगे बढ़ाया जा रहा है। 

यकीनन इस समय जब कुल वैश्विक व्यापार में भारत का हिस्सा दो फीसदी से कम है, देश में माल परिवहन की लागत बहुत ऊंची 13-14 फीसदी है। विश्व बैंक के मुताबिक, भारत लॉजिस्टिक खर्च के मामले में दुनिया में बहुत पीछे 44वें स्थान पर है, ऐसे में भारत ने इंजीनियरिंग, डिजिटलीकरण और बहु-साधन परिवहन जैसे क्षेत्रों पर फोकस कर नई लॉजिस्टिक नीति से माल ढुलाई क्षमता में सुधार की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। अब नई नीति के तहत लॉजिस्टिक्स से जुड़े सभी मसलों के लिए सिंगल रेफरेंस पॉइंट बनाया जाएगा। 

देश में सतत एकीकृत और डिजिटल लॉजिस्टिक्स इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा। इसके साथ ही, लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में ड्रोन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होगा। नई लॉजिस्टिक नीति का लक्ष्य यह है कि अगले 10 सालों में लॉजिस्टिक्स सेक्टर की लागत को 10 प्रतिशत तक लाया जाए। चूंकि वर्तमान में लॉजिस्टिक्स का ज्यादातर काम सड़कों के जरिये होता है, अतएव अब नई नीति के तहत रेल ट्रांसपोर्ट के साथ-साथ शिपिंग और एयर ट्रांसपोर्ट पर जोर दिया जाएगा। 

लगभग 50 प्रतिशत कार्गो को रेलवे के जरिये भेजा जाएगा। इससे सड़कों पर ट्रैफिक को कम किया जा सकेगा, कच्चे तेल के आयात में कमी आएगी और लॉजिस्टिक्स के खर्च में भी कमी की जा सकेगी। साथ ही, माल परिवहन में लगने वाला समय भी कम होगा। देश की अर्थव्यवस्था को इन सबके आर्थिक फायदे प्राप्त होंगे। गौरतलब है कि नई लॉजिस्टिक नीति और गति शक्ति योजना ऐसे समय में लागू हुई है, जब विकसित देशों में मंदी है और भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी संभावना है। 

ऐसे में, घरेलू और निर्यात बाजारों में भारतीय सामान की प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार आएगा। लागत कम होने से जहां सामान की कीमत कम होगी, वहीं भारत नया निर्यात प्रतिस्पर्धी देश बनकर आगे बढ़ेगा। नई लॉजिस्टिक नीति से कृषि पदार्थों की कीमतों में कमी आएगी, खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र लाभान्वित होगा और कृषि निर्यात बढ़ेंगे तथा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में बढ़ोतरी हो सकेगी। इस समय भारत दुनिया की सबसे तेज विकास दर के साथ विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। 

अब नई लॉजिस्टिक नीति के सहारे देश और बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की डगर पर आगे बढ़ सकेगा। इस सेक्टर में इस समय देश के करीब 2.2 करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला हुआ है। अब नई लॉजिस्टिक नीति और गति शक्ति योजना के कारगर क्रियान्वयन से रोजगार के मौके भी तेजी से बढ़ेंगे। हम उम्मीद करें कि नई लॉजिस्टिक नीति और गति शक्ति योजना के उपयुक्त क्रियान्वयन से भारत वर्ष 2030 तक कम लॉजिस्टिक खर्च और मजबूत बुनियादी ढांचे वाले दुनिया के शीर्ष 25 देशों की सूची अपना स्थान बना पाएगा। 

इससे देश में उद्योग और कारोबार, निर्यात और निवेश तथा रोजगार के मौके बढ़ने से देश की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ेगी और आम आदमी की मुट्ठियों में भी अधिक विकास की खुशियां पहुंचते हुए दिखाई देगी। साथ ही, हम यह उम्मीद करें कि नई लॉजिस्टिक नीति और गति शक्ति योजना के उपयुक्त क्रियान्वयन से भारत इस उपमहाद्वीप के सभी पड़ोसी देशों के साथ अधिक और उत्साहजनक द्विपक्षीय कारोबार का मौका भी अपनी मुट्ठियों में ले सकेगा, और इससे भारतीय उपमहाद्वीप के पड़ोसी देशों के करोड़ों लोगों की खुशियां भी बढ़ाई जा सकेगी।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed