फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   Nobel punch!

नोबेल मुक्का!

Tue, 27 Nov 2012 11:52 AM IST
Updated Tue, 27 Nov 2012 11:52 AM IST
विज्ञापन
Nobel punch!
नोबेल पुरस्कार से सम्मानित वीएस नायपॉल पर गत दिनों नाटककार गिरीश कर्नाड ने हमला बोला, तो कई लोगों ने कहा कि नोबेल विजेता पर ऐसा आक्रमण नहीं करना चाहिए।
विज्ञापन


फेसबुक पर किसी ने पूछा कि क्या उस तरह करना चाहिए जैसे वर्गास ल्योसा ने गाब्रिएल गार्सिया मार्क्वेज पर किया था। जब इस मामले की पड़ताल करने निकले तो साइबर वर्ल्ड में यह तस्वीर मिली। मार्क्वेज की यह फोटो उनके दोस्त राद्रिगो मोया ने 1976 में खींची थी।
विज्ञापन


इस फोटो में बाईं आंख और नाक पर कुछ काले धब्बे नजर आ रहे हैं। ये धब्बे उस घूंसे के गवाह हैं, जो ल्योसा ने उन्हें एक मैक्सिकन थियेटर में मारा था।

एक रोचक तथ्य यह है कि तब तक दोनों लेखकों को नोबेल नहीं मिला था। मार्क्वेज को उक्त घूंसा-कांड के छह साल बाद 1982 में और ल्योसा को 34 साल बाद 2010 में नोबेल मिला।
विज्ञापन
विज्ञापन

इस घूसा-कांड से पहले दोनों दोस्त थे।

मार्क्वेज के बाद ल्योसा को भी नोबेल मिल जाने पर साहित्यकारों के हंसी- मजाक में नोबेल मुक्का के नाम से चर्चित हो चुके उस मुक्के ने इन दोनों को पुरस्कार दिलाने में भले ही कोई भूमिका न निभाई हो, उनकी दोस्ती तो तोड़ ही दी थी।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed