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सोना नहीं, तो सोना नहीं

Wed, 23 Oct 2013 08:03 PM IST
सुनीता शानू
सुनीता शानू Updated Wed, 23 Oct 2013 08:03 PM IST
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No sleeping without gold

उन्नाव जिले के डौंडिया खेड़ा में आजकल दिल्ली के शनि बाजार जैसा माहौल है। लोग कुदाल-फावड़ों के साथ अपने दैनिक रोजगार का साज-ओ-सामान लेकर आ धमके हैं। ये लोग दिन भर चाट-पकौड़े और गरमा-गरम जलेबियों का आनंद उठाते हैं और रात-भर जागकर सोने की तलाश में सारा किला खोद डालते हैं। संन्यासी सोने के चक्कर में हवन कर रहे हैं, तो कहीं-कहीं चोर-डाकुओं ने भी रात के अंधेरे में चुपचाप खुदाई का काम चालू कर दिया है। क्या पता, सोना डौंडिया खेड़ा की जगह कहीं और मिल जाए। एक जगह तो कुछ लोगों ने मंदिर के पुजारी को कैद कर मंदिर के अंदर का भाग ही खोद डाला।

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शोभन सरकार की भविष्यवाणी पर सोना मिलेगा या नहीं, यह तो मालूम नहीं, लेकिन उन्नाव में त्योहार जैसी हलचल मच गई है। देश के नेता हों या अभिनेता, सभी की दिलचस्पी है इस सोने में। कुछ लोगों का मानना है कि पूरे देश में अनेक स्थानों पर खजाना दबा पड़ा है, बस जमीन को खोदने की जरूरत है। कहा भी गया है कि जिन खोदा तिन पाइयां...। उपकार फिल्म का गाना, मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे मोती भी शायद किसी खजाने की खुदाई से प्रेरित होकर ही बना होगा।
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पुरातत्व विभाग का मानना है कि खुदाई में एक महीना लग सकता है। तो क्या सब लोग एक महीना वहीं तंबू तानकर इंतजार करें कि कब धरती माता सोना उगलेगी और कब उनके दिन बहुरेंगे। एक महीने तक वहां बैठे रहकर साधु-संतों के भजन सुनकर दिन बिताना तो कठिन है। ऐसे में यह भी हो सकता है कि लोग गुस्से में आकर कुदाल-फावड़े लेकर ऐसी खुदाई कर दें, जो एक महीना क्या, एक दिन में पूरी हो जाए। सबकी नजर उन्नाव पर टिकी है।
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चाहे कुछ भी हो जाए, खुदाई होगी। आखिर साधु बाबा की जुबान है। भई, सोना न मिला, तो गर्दन कटवा लेंगे, वह कोई साधारण मनुष्य नहीं हैं। कुछ मॉडर्न कथावाचकों की पोल खुलने के कारण लोगों का साधु-संतों से भले ही विश्वास उठ जाए, पर सोने के लिए खुदाई करने में आखिर क्या जाता है!


अभी तक तो खुदाई में किले की दीवार ही निकली है। खुदाई करते-करते अंत में महाराज के सोने का पलंग निकल आया, तो क्या कर लेंगे? बाबा कहेंगे, यही तो है। इसी की बात कर रहा था मैं। लो, जितना सोना चाहो सो लो...और मेरी तरह स्वप्न देखो सोने के।

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